पंचायतों के लिए 5 साल में मिलेगा भारी-भरकम अनुदान, खर्चे पर होगी कड़ी निगरानी
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में पंचायतों को 2031 तक 31,467 करोड़ रुपए का अनुदान मिलेगा।
- अनुदान के लिए शर्तें जोड़ी, सड़क निर्माण पर 20% सीमा, वेतन खर्चों पर पूरी रोक।
- पारदर्शिता और ऑडिट, ई-ग्राम स्वराज और समर्थ पोर्टल पर हिसाब देना अनिवार्य।
- समय पर होगा फंड ट्रांसफर, 10 दिन में राशि नहीं मिलने पर ब्याज देगी सरकार।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 16वां वित्त आयोग की सिफारिश पर अनुदानों के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
इसके तहत राजस्थान को वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक की पांच साल की अवधि के लिए कुल 31,467 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं।
देश भर के लिए तय किए गए कुल 4,35,236 करोड़ रुपए के राष्ट्रीय बजट में राजस्थान की हिस्सेदारी 7.23 फीसदी है।
केंद्र ने राज्यों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे पंचायती राज संस्थाओं में पारदर्शी वित्तीय अनुशासन, समयबद्ध निधि हस्तांतरण और समय पर ऑडिट सुनिश्चित करें।
ऐसे होगा 5-वर्षीय बजट का आवंटन
राजस्थान को मिलने वाले 31,467 करोड़ रुपए के कुल अनुदान में से 25,173 करोड़ रुपए मूल अनुदान के रूप में हैं। जबकि 6,294 करोड़ रुपए की राशि परफॉर्मेंस ग्रांट्स मानदंडों से जुड़ी है।
राजस्थान के मूल अनुदान को 50:50 के अनुपात में दो भागों में बांटा गया है
टाइड: 12,587 करोड़ विशेष रूप से पेयजल प्रबंधन और स्वच्छता व ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए सुरक्षित है। इस पैसे का उपयोग जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) जैसी राष्ट्रीय योजनाओं के साथ मिलाकर किया जा सकता है।
अनटाइड: 12,587 करोड़ 11वीं अनुसूची में बताए गए 29 विषयों के तहत स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के लिए पंचायत अपने विवेक से इस्तेमाल कर सकेगी।
मुख्य दिशा-निर्देश एवं आवंटन के कड़े नियम
16वें वित्त आयोग के दिशा-निर्देशों में राजस्थान की पंचायतों द्वारा राशि के व्यय और वितरण हेतु कड़े नियम तय किए हैं-
त्रि-स्तरीय वितरण फॉर्मूला
राज्य वित्त आयोग की नई सिफारिशों के अभाव में राज्य के भीतर कुल अनुदान का 80 फीसदी भाग ग्राम पंचायतों, 10 फीसदी ब्लॉक पंचायतों और 10 फीसदी जिला परिषद में विभाजित होगा। प्रत्येक स्तर पर आवंटन 90 फीसदी जनसंख्या और 10 फीसदी क्षेत्रफल के अनुपात पर आधारित होगा।
सड़क निर्माण पर 20 फीसदी की सीमा
राजस्थान की पंचायतें अपने अनटाइड अनुदान का अधिकतम 20 फीसदी पैसा ही सड़कों के निर्माण एवं रखरखाव पर खर्च कर सकेंगी।
वेतन और प्रशासनिक खर्चों पर रोक
अनटाइड अनुदान का उपयोग नियमित वेतन या प्रशासनिक खर्चों में नहीं लिया जा सकेगा। हालांकि CAG से रजिस्टर्ड पेशेवर ऑडिटर या एकाउटेंट की सेवाएं लेने के लिए खर्च की अनुमति है।
केंद्र से निधि प्राप्त होने के 10 कार्य दिवसों के भीतर राजस्थान सरकार को पैसा पंचायतों के खातों में ट्रांसफर करनी होगी। 10 दिन से ज्यादा देरी होने पर राज्य सरकार को बाजार दर के अनुसार ब्याज सहित राशि देनी होगी।
डिजिटल एकीकरण और पात्रता शर्तें
आगामी किस्तों को प्राप्त करने के लिए राजस्थान को अनिवार्य शर्तों का पालन करना होगा:
लेखा एवं ऑडिट का प्रकाशन: ई-ग्राम स्वराज और ऑडिट आनलाईन पोर्टल पर पिछले वर्ष के खर्चों का हिसाब देनो होगा। इससे पहले के साल के ऑडिटेड खाते ऑनलाइन उपलब्ध होने चाहिए।
सामर्थ्य पोर्टल ऑनबोर्डिंग: पंचायतों के स्वयं के राजस्व स्रोतों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग के लिए वित्त वर्ष 2026-27 तक समर्थ पंचायत पोर्टल के साथ प्रणाली का पूर्ण एकीकरण अनिवार्य है।
बकाया राशि का शून्य होना
वित्त आयोग 2016 के अनुसार पहली किस्त जारी होने से पहले राज्य सरकार को यह प्रमाणित करना होगा कि 14वें वित्त आयोग की कोई भी बकाया राशि लंबित नहीं है।
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