राजस्थान में 12 हजार से ज्यादा कर्मचारी APO, वित्त विभाग ने जारी की नई गाइडलाइन
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान ब्यूरोक्रेसी में बदलाव, APO को लेकर वित्त विभाग की नई गाइडलाइन जारी।
- अब 30 दिन से अधिक कोई भी अफसर या कर्मचारी नहीं रहेगा एपीओ।
- प्रदेश में 8 आईएएस और 2 आईपीएस सहित 35 बड़े अफसर बिना काम बैठे।
- शिक्षकों और मेडिकल स्टाफ समेत राज्य के 12 हजार से अधिक कार्मिक एपीओ।
- दंडात्मक या अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में एपीओ करने पर लगी रोक।
राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी का एक अजीब विरोधाभास सामने आया है। एक तरफ सरकार के पास इतने काम हैं कि हर तबादला सूची में 10 से 25 अफसरों को अतिरिक्त चार्ज देना पड़ रहा है।
दूसरी तरफ 8 IAS सहित 35 अफसर और 12 हजार से अधिक सामान्य कर्मचारी, शिक्षक और मेडिकल स्टाफ APO यानी बिना काम के बैठे हैं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वित्त विभाग ने 72 विभागों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि अब 30 दिन से अधिक कोई भी अफसर या कर्मचारी APO नहीं रहेगा।
22 IFS को आज तक नहीं मिला काम
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि IFS (Indian Forest Service) के 22 अफसर ऐसे हैं जिन्हें सरकारी सेवा में चयन के बाद से आज तक कोई काम नहीं मिला।
इनके अलावा 2 IPS, 1 IFS और 2 RAS अधिकारी तथा अन्य सचिवालय सेवाओं के अफसर भी APO चल रहे हैं।
दिल्ली से लौटे वरिष्ठ IAS 5 दिन से बैठे
पिछले सप्ताह ही केंद्र में प्रतिनियुक्ति यानी डेपुटेशन से दिल्ली से एक वरिष्ठ IAS राजस्थान लौटे। कार्मिक विभाग में उपस्थिति दर्ज कराने के बाद उन्हें APO कर दिया गया। 1997 बैच के IAS रोहित कुमार को 5 दिन बीत जाने के बाद भी कोई काम नहीं सौंपा गया है।
इसके अलावा 2013 बैच के खजान सिंह, 2019 बैच के ललित गोयल, 2022 बैच के प्रीतम कुमार, सक्षम गोयल, शुभम अशोक और प्रतिभा दहिया तथा 2023 बैच की अदिति वार्ष्णेय भी APO हैं।
IPS और IFS अफसर भी APO में
2004 बैच के IPS किशन सहाय मीणा और 2023 बैच के IPS माधव उपाध्याय भी APO चल रहे हैं। इन पर आरोप हैं और नियमों के तहत APO किया गया है। 2015 बैच के IFS गौरव गर्ग भी APO हैं। RAS अफसरों में 2013 बैच के आकाश रंजन और 2019 बैच के नीरज मिश्रा भी APO किए गए हैं।
हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद जागी सरकार
वित्त विभाग ने 72 विभागों को जारी नई गाइडलाइन में कहा कि पूर्व में जारी APO निर्देशों की कई विभागों ने पालना नहीं की। इस कारण हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी के साथ आदेश दिए।
सरकार ने अब स्पष्ट किया है कि भविष्य में कोई विभाग दंडात्मक या अनुशासनात्मक कार्रवाई के रूप में APO का उपयोग नहीं करेगा। APO का उपयोग केवल प्रशासनिक आवश्यकता और जनहित में ही किया जाएगा।
30 दिन की सीमा अनिवार्य
नई गाइडलाइन के अनुसार अब कोई भी अफसर या कर्मचारी 30 दिन से अधिक APO नहीं रहेगा। APO केवल उन्हीं मामलों में होगा जब कर्मचारी अवकाश, प्रतिनियुक्ति, विदेश यात्रा या प्रशिक्षण से लौटे हों।
सचिवालय सेवा में सहायक अनुभाग अधिकारियों और लिपिक ग्रेड प्रथम सहित 26 APO कर्मियों को नव चयनित RAS अधिकारियों के दस्तावेज सत्यापन में लगाया था, लेकिन इनमें से सिर्फ दो को ही पोस्टिंग दी गई।
FAQ
- APO क्या होता है और इसकी समस्या क्यों है?
APO यानी Awaiting Posting Order, जब किसी अफसर या कर्मचारी को एक पद से हटाया जाता है लेकिन नई पोस्टिंग नहीं दी जाती तो वे APO हो जाते हैं। राजस्थान में 12 हजार से अधिक कर्मचारी और 35 अफसर इसी स्थिति में हैं जिससे सरकारी कामकाज प्रभावित होता है। - राजस्थान वित्त विभाग की नई गाइडलाइन में APO को लेकर क्या कहा गया है?
वित्त विभाग ने 72 विभागों को निर्देश दिए हैं कि अब कोई भी कर्मचारी 30 दिन से अधिक APO नहीं रहेगा। APO को दंडात्मक कार्रवाई के रूप में उपयोग नहीं किया जाएगा। यह सुविधा केवल प्रशासनिक जरूरत और जनहित में ही मिलेगी। - हाई कोर्ट ने APO मामले में क्या कहा?
हाई कोर्ट ने पाया कि कई विभागों ने APO के पहले जारी निर्देशों की पालना नहीं की और अफसरों को दंड के रूप में APO किया जा रहा था। इस पर सख्त टिप्पणी के साथ आदेश दिए, जिसके बाद वित्त विभाग ने नई गाइडलाइन जारी की।
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