परिसीमन में बढ़ सकती हैं 70 विधानसभा सीटें, जनगणना के बाद होना है परिसीमन
News In Short
- जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन में बढ़ सकती हैं राजस्थान विधानसभा की सीटें।
- स्पीकर ने कहा, 280 विधायकों के बैठने की क्षमता वाला नया हॉल बनाने की तैयारी।
- परिसीमन संविधान की प्रक्रिया, आबादी के समान अनुपात को करती है सुनिश्चित।
- राजस्थान विधानसभा की आजादी से अब तक 160 से बढ़कर 200 हुई हैं सीटें।
- आखिरी बार वर्ष 1977 में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 200 की गई थी।
News In Detail
जागेश्वर प्रसाद@जयपुर
राजस्थान में आने वाले समय में विधानसभा सीटों की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी का अनुमान है कि आगामी जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन से राज्य में करीब 70 नई सीटें जुड़ सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो 200 सीटों वाली विधानसभा की कुल संख्या बढ़कर लगभग 270 तक पहुंच सकती है। संविधान में 84वें संशोधन के बाद परिसीमन 2026 के बाद जनगणना के आधार पर किया जाना है।
नया हॉल बनाने की तैयारी
देवनानी ने कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते विधानसभा में 280 विधायकों के बैठने की क्षमता का नया हॉल बनाने की तैयारी है। इसका ढांचा पहले से तैयार है, जिससे भविष्य में विधायकों की संख्या बढ़ने पर किसी प्रकार की दिक्कत न हो।
अभी 200 विधायकों के बैठने की व्यवस्था
मौजूदा विधानसभा भवन में फिलहाल 200 विधायकों के बैठने की व्यवस्था है। परिसीमन के बाद अगर सीटें बढ़ती हैं तो वर्तमान सदन छोटा पड़ सकता है। ऐसे में विधानसभा में पहले से बने विधान परिषद के हॉल को भी तैयार कर भविष्य में इस्तेमाल करने की योजना बनाई जा रही है।
क्या है परिसीमन?
परिसीमन का मतलब है निर्वाचन क्षेत्रों (लोकसभा और विधानसभा सीटों) की सीमाओं और संख्या को फिर से तय करना। यह काम आमतौर पर जनगणना के बाद किया जाता है ताकि हर क्षेत्र में लगभग बराबर आबादी का प्रतिनिधित्व हो सके। देश में यह काम स्वतंत्र निकाय 'परिसीमन आयोग' (Delimitation Commission) द्वारा किया जाता है। अब तक देश में चार बार परिसीमन आयोग बना है।
क्यों किया जाता है परिसीमन?
परिसीमन का मुख्य उद्देश्य एक वोट, एक मूल्य के सिद्धांत को बनाए रखना है। समय के साथ जनसंख्या बढ़ती है और लोग एक जगह से दूसरी जगह पलायन करते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाता है कि हर निर्वाचन क्षेत्र में जनसंख्या का अनुपात लगभग समान रहे। जनसंख्या के आधार पर सीटों का न्यायसंगत विभाजन हो सके और अनुसूचित जाति (SC) तथा अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित सीटों की पहचान की जा सके।
अब तक 160 से 200 हुई है विधानसभा सीटें
दरअसल, राजस्थान में आखिरी बार वर्ष 1977 में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 200 की गई थी। उससे पहले 1952 में पहले विधानसभा चुनाव के समय 160 सीटें थीं। 1957 में यह संख्या बढ़कर 167 हुई और 1967 में 184 सीटें कर दी गईं। इसके बाद से अब तक सीटों की संख्या में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
परिसीमन से बदल जाएगा पॉलिटिकल मैप
राजनीतिक जानकारों के अनुसार राजस्थान परिसीमन के बाद प्रदेश का राजनीतिक नक्शा भी बदल सकता है। नई सीटों के बनने से कई नए नेताओं को चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा। वहीं, कुछ सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो सकती हैं, जिससे कई मौजूदा विधानसभा क्षेत्रों की संरचना भी बदल सकती है। परिसीमन आयोग की रिपोर्ट के बाद ही सीटों की अंतिम संख्या और उनके क्षेत्र तय होंगे।
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