8 जिलों की कमान अब महिला कलेक्टरों के हाथ, जानिए इनका क्या रह सकता है एजेंडा?

Ashish Bhardwaj | Apr 02, 2026, 16:14 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान में 8 जिलों की कमान महिला कलेक्टरों के हाथों में आ गई है। 65 आईएएस अधिकारियों की आई तबादला सूची के बाद यह बदलाव देखने को मिल रहा है।

News In Short

  • राजस्थान में 41 में से 8 जिलों की कमान अब महिला कलेक्टरों के हाथों में।
  • 65 आईएएस अधिकारियों की आई तबादला सूची के बाद यह बदलाव दिखा।
  • 2013 से 2018 बैच के आईएएस अधिकारियों को कलेक्टर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी।
  • सबसे अधिक 2014 बैच के 9 आईएएस अधिकारियों के पास कलेक्टर की कमान।
  • कुल 41 कलेक्टरों में से 35 सीधे तौर पर आईएएस बने अधिकारी।

News In Detail

Jaipur: राजस्थान की नौकरशाही में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश के 41 जिलों में से 8 महत्वपूर्ण जिलों की बागडोर अब महिला आईएएस अधिकारियों के हाथों में है। मार्च महीने के आखिरी दिन 65 आईएएस अधिकारियों की आई तबादला सूची में कलेक्टर के रूप में महिला अधिकारियों पर भी भरोसा जताया गया है। विशेष बात यह है कि इन नियुक्तियों में युवा और अनुभवी दोनों ही बैच के अधिकारियों का संतुलन दिख रहा है।



​प्रशासनिक अनुभव का नया तालमेल

प्रदेश में तबादला सूची आने के बाद मौजूदा प्रशासनिक परिदृश्य पर नजर डालें तो 2013 से 2018 बैच के आईएएस अधिकारियों को कलेक्टर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। राज्य में कुल कलेक्टरों में से 35 सीधे तौर पर आईएएस बने अधिकारी हैं, जबकि 6 अधिकारियों को पदोन्नति के जरिए यह जिम्मेदारी मिली है। इनमें 2014 बैच के अधिकारियों का सबसे ज्यादा दबदबा है, जिनके 9 अधिकारी विभिन्न जिलों में कलेक्टर हैं। इसके बाद 2016 बैच के 8 अधिकारी कमान संभाल रहे हैं। इसके अलावा 2013, 2015, 2017 और 2018 बैच के 6-6 अधिकारी कलेक्टर हैं।



​मिलिए राजस्थान की 8 महिला कलेक्टरों से

​अनुपमा जोरवाल (जैसलमेर)

2011 बैच की आईएएस अनुपमा जोरवाल अब जैसलमेर जैसे सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती जिले की कमान संभालेंगी। वे अपनी सख्त कार्यशैली और फील्ड विजिट के माध्यम से सरकारी योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। मरुस्थलीय क्षेत्र में पानी और पर्यटन विकास उनकी कार्ययोजना के मुख्य केंद्र बिंदु हैं।





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चिन्मयी गोपाल (बाड़मेर)

2014 बैच की आईएएस चिन्मयी गोपाल बाड़मेर में कलेक्टर के रूप में ऊर्जा और तेल रिफाइनरी जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स की निगरानी करेंगी। उनका फोकस सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास और महिला शिक्षा को बढ़ावा देने पर है। वे स्थानीय जनसुनवाई के माध्यम से आमजन की समस्याओं का त्वरित निस्तारण करने के लिए पहचानी जाती हैं।





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​शुभम चौधरी (प्रतापगढ़)

2014 बैच की आईएएस शुभम चौधरी को आदिवासी बहुल प्रतापगढ़ जिले की कमान दी गई है। वे इस जिले में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर सकती हैं। पिछड़े क्षेत्रों में कुपोषण के खिलाफ अभियान और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है। वे अपनी संवेदनशीलता और पारदर्शी प्रशासन के लिए जिले के लोगों के बीच लोकप्रिय हैं।





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टीना डाबी (टोंक)

​यूपीएससी परीक्षा की टॉपर रहीं टीना डाबी को टोंक जिले की जिम्मेदारी दी गई है। ​सोशल मीडिया पर सक्रिय टीना डाबी टोंक में स्वच्छता अभियान और नवाचारों के जरिए प्रशासनिक कार्यों को गति दे सकती हैं। 2016 बैच की आईएएस अधिकारी डाबी जिले में कौशल विकास और शिक्षा के स्तर को सुधारने पर जोर दे रही हैं।





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मंजू (चित्तौड़गढ़)

2016 बैच की आईएएस डॉ. मंजू को श्रीगंगानगर से चित्तौड़गढ़ जैसे ऐतिहासिक और औद्योगिक रूप से भेजा गया है। ​उनका मुख्य उद्देश्य जिले के पर्यटन स्थलों के संरक्षण के साथ-साथ औद्योगिक प्रदूषण पर नियंत्रण पाना है। ​वे प्रशासनिक प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने और सरकारी दफ्तरों में कार्यसंस्कृति सुधारने पर ध्यान दे रही हैं।





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सौम्या झा (दौसा)

​2017 बैच की आईएएस डॉ. सौम्या झा दौसा जिले में कानून व्यवस्था और विकास कार्यों के बीच संतुलन बनाए रखने का बखूबी काम कर सकती हैं। वे ​दौसा में निर्माणाधीन हाईवे प्रोजेक्ट्स और स्थानीय रोजगार के मुद्दों पर नजर रख सकती हैं। ​वे नियमित रूप से गांवों का दौरा कर ग्रामीणों की समस्याओं को सीधे सुनने के लिए जानी जाती हैं।





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​अपर्णा गुप्ता (कोटपूतली-बहरोड़)

नवनिर्मित जिले कोटपूतली-बहरोड़ की कमान 2018 बैच की आईएएस अपर्णा गुप्ता को दी गई है। औद्योगिक बेल्ट होने के कारण वे श्रमिकों के कल्याण और औद्योगिक सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू करवा सकती हैं। एक नए जिले के रूप में यहाँ बुनियादी सुविधाओं को विकसित करना उनकी सबसे बड़ी चुनौती और प्राथमिकता है।





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​आईएएस अर्तिका शुक्ला (अलवर)

डॉक्टर से आईएएस बनी अर्तिका शुक्ला अलवर जैसे बड़े और एनसीआर क्षेत्र से जुड़े जिले का नेतृत्व कर रही हैं। ​स्वास्थ्य क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता का लाभ देते हुए वे जिले के सरकारी अस्पतालों की सेवाओं को आधुनिक बनाने में जुटी हैं। ​अपराध नियंत्रण और औद्योगिक शांति बनाए रखना उनकी कार्यसूची में सबसे ऊपर है।





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