प्रसूताओं को ABHA कार्ड होगा अनिवार्य, डॉक्टरों के हाथ में रहेगा पूरा रिकॉर्ड
समझें क्या है पूरा मामला
- राज्य में प्रसूताओं की मौत के बाद ABHA कार्ड अनिवार्य करने की तैयारी।
- 14 अंकों की डिजिटल आईडी से गर्भवती का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन होगा।
- आपात स्थिति में डॉक्टरों को तुरंत मिलेगी मरीज की हिस्ट्री।
- राजस्थान में 7.1 करोड़ ABHA अकाउंट, देश में दूसरा स्थान।
- मंत्री खींवसर बोले- डॉक्टरों के पास होगी पूरी केस स्टडी।
कोटा, बीकानेर और जोधपुर में प्रसूताओं की मौत और तबीयत बिगड़ने के मामलों के बाद राजस्थान सरकार सतर्क हो गई है। सरकार अब हर गर्भवती महिला के लिए आभा (ABHA – Ayushman Bharat Health Account) कार्ड अनिवार्य करने की तैयारी कर रही है।
इससे गर्भावस्था से लेकर डिलीवरी तक का पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा। किसी भी आपात स्थिति में डॉक्टरों को मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री तुरंत मिल सकेगी। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान समय रहते होगी और इलाज बेहतर होगा।
मौतों के बाद जागी सरकार
कोटा के जेके लोन अस्पताल समेत बीकानेर और जोधपुर में प्रसूताओं की मौत के मामले सामने आए थे। इन घटनाओं ने पूरे प्रदेश में हंगामा मचाया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं की सुरक्षा के लिए डिजिटल कदम उठाने का फैसला किया।
चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि पहली बार इतने बड़े स्तर पर डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड तैयार करने की दिशा में काम हो रहा है।
क्या है ABHA कार्ड?
आभा कार्ड एक डिजिटल हेल्थ आईडी है। इसके तहत हर मरीज को 14 अंकों का एक यूनिक हेल्थ नंबर मिलता है। इस नंबर से मरीज की सभी स्वास्थ्य जानकारी डिजिटल रूप से जुड़ी रहती है।
इसमें जांच रिपोर्ट, ब्लड ग्रुप, हीमोग्लोबिन, शुगर लेवल, ब्लड प्रेशर, पुरानी बीमारी और ऑपरेशन की जानकारी शामिल होती है।
रेफरल में सबसे ज्यादा फायदा
प्रसव से पहले अक्सर गर्भवती को अचानक दूसरे अस्पताल रेफर करना पड़ता है। तब सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है कि डॉक्टरों के पास मरीज का कोई पुराना रिकॉर्ड नहीं होता।
ABHA कार्ड होने पर 14 अंकों का नंबर डालते ही पूरी हिस्ट्री सामने आ जाएगी। इससे आपात स्थिति में इलाज के फैसले जल्दी और सटीक लिए जा सकेंगे।
एक क्लिक पर क्या-क्या मिलेगा?
गर्भावस्था से डिलीवरी तक की सभी जांच रिपोर्ट सुरक्षित रहेंगी। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान आसान होगी। डॉक्टरों को पिछली बीमारी और इलाज की जानकारी मिलेगी। अलग-अलग अस्पतालों में इलाज के दौरान बार-बार रिकॉर्ड बनाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
ABHA और EHR कैसे जुड़ते हैं?
जब मरीज अपना ABHA नंबर देकर किसी ऐसे अस्पताल में इलाज कराता है जो एबीडीएम (ABDM – Ayushman Bharat Digital Mission) से जुड़ा हो, तो मरीज की सहमति से उसकी सारी जानकारी ईएचआर (EHR – Electronic Health Record) से जुड़ जाती है।
इसमें डॉक्टर का पर्चा, लैब रिपोर्ट, डिस्चार्ज समरी और दवाओं का विवरण शामिल होता है। अगली बार किसी भी अस्पताल में ABHA नंबर बताने और अनुमति देने पर डॉक्टर पूरा रिकॉर्ड देख सकते हैं।
कैसे बनवाएं ABHA कार्ड?
ABHA कार्ड बनाना बहुत आसान है। आधिकारिक वेबसाइट या एप पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होता है। मोबाइल नंबर या आधार से पहचान पूरी की जाती है। इसके बाद 14 अंकों का नंबर जारी हो जाता है। सरकारी और निजी अस्पतालों तथा स्वास्थ्य केंद्रों पर भी यह कार्ड बनवाया जा सकता है।
राजस्थान में अब तक 7.1 करोड़ ABHA अकाउंट
राजस्थान में अब तक 7.1 करोड़ से अधिक ABHA अकाउंट बनाए जा चुके हैं। प्रदेश की 89.7 फीसदी आबादी के अकाउंट बन चुके हैं। यह देश के बड़े राज्यों में एक बेहतर प्रदर्शन है।
उत्तर प्रदेश 15.3 करोड़ अकाउंट के साथ सबसे आगे है। महाराष्ट्र में भी 7.1 करोड़, बिहार में 6.3 करोड़ और पश्चिम बंगाल में करीब 5.9 करोड़ अकाउंट बन चुके हैं।
मंत्री बोले - डॉक्टर के हाथ में होगी पूरी केस स्टडी
चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि अगर सभी मरीजों को ABHA कार्ड से जोड़ा जाता है तो किसी भी गंभीर रेफरल केस में डॉक्टर मरीज की पूरी हिस्ट्री देख सकेंगे। उनके अनुसार किसी भी मरीज की पूरी केस स्टडी डॉक्टर के पास उपलब्ध होगी, जिससे इलाज की प्रक्रिया और मजबूत होगी।
सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ ABHA नंबर बनाना नहीं, बल्कि रिकॉर्ड को नियमित अपडेट रखना है। ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट और तकनीकी सुविधाएं मजबूत करनी होंगी।
सरकारी और निजी सभी अस्पतालों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ना होगा। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण देना होगा। मरीजों के डेटा की गोपनीयता और साइबर सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी होगी।
FAQ
- ABHA कार्ड क्या है और गर्भवती महिलाओं के लिए यह क्यों जरूरी है?
ABHA कार्ड एक 14 अंकों का डिजिटल हेल्थ आईडी नंबर है जिसमें मरीज का पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहता है। गर्भवती महिलाओं के लिए यह इसलिए जरूरी है क्योंकि रेफरल या आपात स्थिति में डॉक्टरों को तुरंत पूरी मेडिकल हिस्ट्री मिल सकती है। इससे समय पर सही इलाज हो सकता है और जान बचाई जा सकती है। - ABHA कार्ड कैसे बनवाएं?
ABHA कार्ड आधिकारिक वेबसाइट या एप पर जाकर बनाया जा सकता है। आधार या मोबाइल नंबर से पहचान सत्यापन के बाद 14 अंकों का यूनिक नंबर मिलता है। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर भी यह सुविधा मिलती है। - राजस्थान में अब तक कितने ABHA अकाउंट बने हैं?
राजस्थान में अब तक 7.1 करोड़ से अधिक ABHA अकाउंट बनाए जा चुके हैं जो राज्य की करीब 89.7 फीसदी आबादी के बराबर है। यह देश के बड़े राज्यों में बेहतर प्रदर्शन है। उत्तर प्रदेश 15.3 करोड़ अकाउंट के साथ देशभर में सबसे आगे है।
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