राजस्थान: भ्रष्टाचार के 768 केस में कार्रवाई कब?, पूर्व ACS सुबोध अग्रवाल का मामला भी अटका

Mukesh Sharma | Sept 11, 2026, 17:23 IST
राजस्थान में 768 भ्रष्टाचार केस मंजूरी के इंतजार में
राजस्थान में भ्रष्टाचार के 768 मामलों में अभियोजन मंजूरी अटकी है। इनमें सुबोध अग्रवाल का जल जीवन मिशन केस और आरएएस पंकज ओझा की धीमी जांच भी शामिल है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राज्य सरकार के विभागों में अटकी एसीबी की अभियोजन स्वीकृति।
  • निकायों का हाल बेहाल, स्वायत्त शासन, राजस्व और पंचायती राज विभाग में सबसे ज्यादा केस लंबित।
  • जल जीवन मिशन में पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल को DOPT मंजूरी की आस।
  • ऑडियो क्लिप वायरल होने के सालभर बाद भी आरएएस पंकज ओझा पर कार्रवाई सुस्त।

जयपुर। राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को लेकर सरकार भले ही जीरो टॉलरेंस का दावा कर रही हो, लेकिन एंटी करप्शन ब्यूरो यानी ACB के 768 मामले सरकारी मंजूरी के इंतजार में अटके हैं। इन मामलों में मुकदमा चलाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों से अभियोजन की मंजूरी अब तक नहीं मिली है। मंजूरी नहीं मिलने से कई मामलों में एसीबी आगे की कार्रवाई नहीं कर पा रही।



इनमें हाई प्रोफाइल जल जीवन मिशन घोटाला भी शामिल है। इस मामले में गिरफ्तार होकर जेल में बंद पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग में अटकी हुई है। एसीबी जल्द मंजूरी लेने की कोशिश कर रही।



अभियोजन मंजूरी के सबसे ज्यादा मामले शहरी निकायों से जुड़े

एसीबी के सूत्रों के मुताबिक, अभियोजन मंजूरी के सबसे ज्यादा मामले शहरी निकायों से जुड़े हैं। इनमें नगर निगम, नगर पालिका, नगर परिषद, यूआईटी और विकास प्राधिकरण शामिल हैं।



इसके बाद राजस्व विभाग के 89, पंचायती राज के 71, सहकारिता के 48, ऊर्जा विभाग के 41, पुलिस के 39 और ग्रामीण विकास विभाग के 37 मामले मंजूरी के इंतजार में हैं।



इसी तरह शिक्षा विभाग के 16, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के 15, खान विभाग के 14, वन विभाग के 11 और पीएचईडी के 10 मामलों में भी अभियोजन की मंजूरी लंबित हैं। इन मामलों में तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी, एएसआई, एसआई, कांस्टेबल और लिपिक जैसे कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के मामले बड़ी संख्या में शामिल हैं।



कार्मिक विभाग से जुड़े अफसरों के 49 मामले पेंडिंग

राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए नियमानुसार कार्मिक विभाग से मंजूरी लेनी होती है। एसीबी के अनुसार कार्मिक विभाग में भी 49 मामले अभियोजन स्वीकृति के इंतजार में हैं। हालांकि सरकार ने हाल में 40 मामलों में अभियोजन की मंजूरी दी है। इनमें छह गंभीर मामले भी शामिल हैं, जिनमें पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर अवैध लाभ लेने के आरोप हैं।



इन मामलों में सवाई मानसिंह अस्पताल के वरिष्ठ आचार्य, पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक, जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता, वित्तीय सलाहकार, सहायक अभियंता और विकास अधिकारी से जुड़े मामले शामिल हैं।



पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल का मामला बाकी

सरकार ने बहुचर्चित जल जीवन मिशन घोटाले में सभी आरोपियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति तो दे दी है, लेकिन पूर्व एसीएस सुबोध अग्रवाल के खिलाफ केंद्रीय कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग की मंजूरी अभी बाकी है। यानी एक ही मामले में बाकी आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो चुका है, लेकिन एक वरिष्ठ अधिकारी के मामले में केंद्रीय मंजूरी का इंतजार है।



आरएएस पंकज ओझा की जांच भी धीमी

दूसरी ओर, नकली और घटिया घी सप्लायरों से रिश्वत लेने के आरोपों से जुड़े आरएएस अधिकारी पंकज ओझा के मामले में भी एसीबी की जांच धीमी है। पिछले साल खाद्य विभाग में तैनात रहे पंकज ओझा की एक कथित ऑडियो क्लिप सामने आई थी। इसमें एक व्यक्ति को कथित तौर पर यह कहते सुना गया था कि उसने ओझा को पूरी रकम दे दी है और अब वह कोई कार्रवाई नहीं करेगा। बातचीत में हरियाणा फ्रेश ब्रांड के एक सप्लायर की शिकायत और उसके स्टॉक के खिलाफ कार्रवाई की बात भी सामने आई थी।



इस मामले में मंत्री के निर्देश पर एसीबी ने परिवाद दर्ज कर जांच शुरू की थी। लेकिन एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी जांच में किसी बड़ी प्रगति की जानकारी सामने नहीं आई है।



ऐसे में एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार पर सख्ती की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ अभियोजन मंजूरी और लंबी चल रही जांच के कारण कई मामलों में कार्रवाई की रफ्तार सवालों के घेरे में है।



ये भी पढ़े :-



पंजाब चुनाव से पहले क्या CM का चेहरा आगे रखेगी कांग्रेस? सचिन पायलट ने बताया प्लान



हनुमानगढ़ में मतदान केंद्र पर प्रत्याशियों में हाथापाई, हमले का लगाया आरोप



भजनलाल के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले को आचार संहिता का नोटिस, भ्रामक प्रचार का है आरोप



राजस्थान नगरीय निकाय चुनाव: 3 बजे तक 57.38 फीसदी वोट



Tags:
  • राजस्थान
  • भ्रष्टाचार
  • एसीबी
  • जल जीवन मिशन