24 दिन चला बजट सत्र, 8919 सवाल पूछे गए, 97 फीसदी के आए जवाब
News In Short
- राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र 24 दिन चला।
- बजट सत्र राजनीतिक गर्माहट के लिए भी जाना जाएगा।
- 97 प्रतिशत सवालों के जवाब मिलने का किया दावा।
- 184 घंटे की चर्चा में सरकार ने पारित कराए 10 बिल।
- विवादित डिस्टबर्ड एरिया प्रापर्टी ट्रांसफर बिल हुआ पारित।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान विधानसभा का बजट सत्र इस बार 24 दिन तक चला। 184 घंटे तक चर्चा के बाद यह सत्र मंगलवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। यह 16वीं विधानसभा का पांचवा सत्र था।
बजट सत्र में पंचायतों और नगरीय निकायों में दो से अधिक संतान के कारण चुनाव लड़ने पर लगी पाबंदी हटाने वाले विधेयकों का पारित होना उल्लेखनीय रहा। इसके लिए सरकार ने राजस्थान पंचायती राज कानून और राजस्थान नगर पालिका कानून में संशोधन विधेयक पारित करवाए। सत्र समाप्ति पर समीक्षा में बताया है कि पिछले चार सत्र सहित वर्तमान सत्र के कुल 97 फीसदी सवालों के जवाब आ चुके हैं।
सदन में विभिन्न विषयों पर हुई सार्थक चर्चा
बजट सत्र में पक्ष विपक्ष में आरोप-प्रत्यारोप और हंगामे के बावजूद विभिन्न विषयों और मुद्दों पर निरंतर चर्चा होते रहना बड़ी उपलब्धि रही। 24 दिन में 184 घंटे चली चर्चा में विधायकों ने कुल 8,919 सवाल लगाए। इनमें 4,311 तारांकित और 4,603 अतारांकित सवाल थे। इन सवालों में 5 अल्प सूचना के प्रश्न भी शामिल थे। सवालों के अलावा प्रस्ताव और संसदीय प्रक्रियाओं के जरिए भी मुद्दे सदन तक पहुंचे।
सत्र में 10 अहम विधेयक पारित
बजट सत्र का सर्वाधिक उल्लेखनीय काम पंचायती राज और नगर पालिका संशोधन विधेयक और विवादित डिस्टबर्ड एरिया प्रापर्टी ट्रांसफर बिल पारित करवाना रहा। दरअसल, सभी पार्टियों के नेताओं और कार्यकर्ताओं में लंबे समय से दो से ज्यादा संतान वालों पर चुनाव लड़ने पर लगी पाबंदी हटाने की चर्चा हो रही थी। अधिकांश का कहना था कि जब दो से ज्यादा संतान वाले विधायक व सांसद बन सकते हैं तो पंंच, सरपंच और पार्षद क्यों नहीं? अधिकांश राजनीतिक कार्यकर्ता इसे भेदभाव मानकर खत्म करने के पक्ष में थे। भजनलाल सरकार ने राजनीतिक फायदे का गुणा-भाग लगाकर इस पाबंदी को खत्म करने का फैसला किया। विधानसभा ने बहुमत से इस पाबंदी को खत्म कर दिया।
डिस्टबर्ड एरिया प्रापर्टी ट्रांसफर बिल पर विवाद
बजट सत्र में भाजपा सरकार ने अपने मूल राजनीतिक ऐजेंडे के तहत डिस्टबर्ड एरिया प्रॉपर्टी ट्रांसफर बिल भी पारित करवा लिया। इस कानून के लागू होने के बाद सांप्रदायिक रुप से संवेदनशील इलाकों में संपत्ति की खरीद-फरोख्त पर सरकार का नियंत्रण रहेगा।
डिस्टर्ब एरिया एक्ट का मुख्य उद्देश्य सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में संपत्ति की बिक्री को विनियमित करना है। इस कानून के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव दोनों हैं। इस कानून के समर्थकों के अनुसार इससे सांप्रदायिक तनाव या डर से औने-पौने दामों में संपत्ति नहीं बिकेगी। कलक्टर की अनुमति से विक्रेता को बाजार के अनुसार पूरी कीमत मिल सकेगी।
सरकार का दावा है कि इस विधेयक के कानून बनने के बाद प्रदेश में अचानक होने वाले जनसांख्यिकीय बदलाव नियंत्रित होंगे और भविष्य में नई सांप्रदायिक झड़पों की संभावना कम हो जाएगी। अशांत क्षेत्रों में मकान मालिक किरायेदारों को जबरन नहीं निकाल सकेंगे।
कानून बनने पर संस्थागत घेराबंदी की आशंका
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आलोचकों के अनुसार इस कानून से संस्थागत घेराबंदी होगी, क्योंकि यह कानून रिहायशी अलगाव को बढ़ावा देता है। इससे अल्पसंख्यकों के लिए मिश्रित आबादी वाले इलाकों में संपत्ति खरीदना बेहद मुश्किल हो जाता है।अशांत क्षेत्र का ठप्पा लगने से उस इलाके में निवेश कम हो जाता है और नौकरशाही की लंबी प्रक्रिया के कारण जमीन की कीमतों में गिरावट आ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 19(1)(e) के तहत कहीं भी बसने का अधिकार और अनुच्छेद 15 के तहत भेदभाव नहीं होने के विपरीत है। बिक्री के लिए 'अनापत्ति प्रमाणपत्र' लेने की प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की शिकायतें आएंगी। किसी मोहल्ले को सालों तक 'अशांत' घोषित रखना उस क्षेत्र की सामाजिक छवि को खराब करता है और समुदायों के बीच की खाई को गहरा करता है।
सरकार ने जयपुर में खेल शिक्षा की दिशा में बड़ा बदलाव लाने वाले महाराणा प्रताप खेल विश्वविद्यालय बिल, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने वाले राजस्थान जन विश्वास संशोधन विधेयक और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के नियमों में बदलाव करने वाले शॉप्स एंड कमर्शियल एस्टैब्लिशमेंट बिल पारित किए हैं।
बजट और अनुदान मांगों पर मैराथन बहस
वर्ष 2026-27 के बजट पर चार दिन तक सामान्य चर्चा व 16 विभागों की अनुदान मांगों पर 62 घंटे 47 मिनट तक बहस हुई। विपक्ष ने इस दौरान 3,935 कटौती प्रस्ताव पेश कर सरकार की नीतियों को चुनौती दी और जनहित के मुद्दों पर घेराबंदी की।
जवाबदेही में राजस्थान अव्वल, 97% सवालों के उत्तर
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने दावा किया कि बजट सत्र के साथ ही पहल के सत्रों के आंकड़े भी उल्लेखनीय रहे हैं। 16वीं विधानसभा के पिछले चार सत्रों में कुल 22,735 प्रश्न पूछे गए थे। इनमें से 22,074 प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हो चुके हैं। केवल 661 प्रश्नों के उत्तर बकाया हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर लगभग 97 प्रतिशत प्रश्नों के उत्तर दिए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा दर्शाता है कि विधानसभा में पूछे गए अधिकांश प्रश्नों का जवाब सरकार की ओर से उपलब्ध कराया गया। इससे सदन की कार्यवाही में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
बहस, नोकझोंक और हाथापाई की नौबत
बजट सत्र के दौरान कई मौकों पर सदन में पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। कई मुद्दों पर दोनों पक्ष आमने-सामने आए और बहस का माहौल गरमा गया। कुछ मौकों पर स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि हाथापाई तक की नौबत भी आ गई।
इसके बावजूद सदन की कार्यवाही लगातार चलती रही और महत्वपूर्ण विधायी कार्य पूरे किए गए। 16वीं राजस्थान विधानसभा का यह बजट सत्र राजनीतिक बहस, विधायी कार्य और सवाल-जवाब के लिहाज से काफी सक्रिय और महत्वपूर्ण रहा।
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