छात्राओं को साइकिल के बदले मिलेंगे ई-वाउचर, नहीं करना पड़ेगा लंबा इंतजार
समझें क्या है पूरा मामला
- शिक्षा विभाग ने 9वीं की छात्राओं को साइकिल के बदले ई वाउचर देने का प्रस्ताव सरकार को भेजा।
- छात्रों को करीब 4 हजार का वाउचर मिलने से वे अपनी पसंद की साइकिल खुद खरीद सकेंगी।
- नई व्यवस्था से 3.50 लाख बालिकाओं को सत्र 2026-27 में लाभ मिलने की उम्मीद है।
- अब तक सरकारी खरीद प्रक्रिया के कारण साइकिल मिलने में कई महीनों की देरी होती थी।
- स्कूटी योजना में भी बदलाव के तहत अब सीधे 70 हजार रुपए छात्राओं के खाते में भेजे जाएंगे।
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में 9वीं कक्षा की बालिकाओं को साइकिल देने की योजना नए रूप में आने वाली है। अब शिक्षा विभाग साइकिल खरीदकर देने के बजाय ई वाउचर देने की तैयारी कर रहा है। यह वाउचर करीब 4 हजार रुपए का हो सकता है। यह प्रस्ताव सरकार के पास भेजा जा चुका है। मंजूरी मिलते ही सत्र 2026-27 में करीब 3.50 लाख छात्राओं को इसका फायदा मिलेगा।
साइकिल योजना में क्या है बदलाव
अब तक शिक्षा विभाग खुद साइकिल खरीदकर स्कूलों में बांटता था। इसके लिए टेंडर निकालना, खरीद करना, भंडारण और फिर वितरण करना पड़ता था। यह पूरी प्रक्रिया बहुत लंबी थी। इसमें महीनों लग जाते थे। नई व्यवस्था में विभाग यह सब नहीं करेगा। बालिकाओं को सीधे ई वाउचर दिया जाएगा। वे खुद अपनी पसंद की साइकिल खरीद सकेंगी।
साइकिल मिलने में लगता था लंबा वक्त
पिछले सत्र 2025-26 में स्कूल 1 जुलाई से शुरू हो गए थे। लेकिन साइकिल की खरीद प्रक्रिया में विभाग को छह महीने से ज्यादा समय लग गया।
नतीजा यह रहा कि छात्राओं को साइकिल दिसंबर-जनवरी में मिली। यानी आधा सत्र बीत जाने के बाद। कई बार तो हालत यह थी कि 9वीं में दाखिल छात्रा 10वीं में पहुंच जाती थी और साइकिल तब मिलती थी। योजना का मकसद था बालिकाओं को स्कूल आने-जाने में मदद करना। देरी से यह मकसद पूरा नहीं हो रहा था।
रंग विवाद भी होगा खत्म
साइकिल योजना में रंग को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस होती रही है। कांग्रेस सरकार में काली साइकिल बांटी गई। भाजपा सरकार में भगवा रंग की साइकिल दी गई।
इस रंग विवाद ने बार-बार योजना को चर्चा का केंद्र बनाया। लेकिन असल मुद्दा छूटता रहा। ई वाउचर से यह विवाद खत्म हो सकता है। जब बालिकाएं खुद साइकिल खरीदेंगी तो रंग और मॉडल का चुनाव भी उनका होगा। योजना का ध्यान अब सुविधा और समय पर रहेगा, रंग पर नहीं।
स्कूटी योजना में भी यही बदलाव
उच्च शिक्षा विभाग ने भी इसी तर्ज पर बदलाव किया है। कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना और देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना में अब स्कूटी नहीं दी जाएगी। इन योजनाओं में अब छात्राओं के बैंक खाते में सीधे 70 हजार रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे। इससे सत्र 2024-25 की 26 हजार और सत्र 2025-26 की 25 हजार से ज्यादा छात्राओं को फायदा होगा। यानी कुल मिलाकर 51 हजार से अधिक छात्राएं लाभान्वित होंगी।
क्यों जरूरी था यह बदलाव
सरकारी खरीद प्रक्रिया में टेंडर से लेकर डिलीवरी तक का समय बहुत लंबा होता है। इस दौरान भंडारण की समस्या अलग रहती है।
वाउचर या सीधे रकम ट्रांसफर करने से यह पूरी झंझट खत्म हो जाती है। विभाग का समय और संसाधन दोनों बचते हैं।
सबसे बड़ा फायदा छात्राओं को होगा। उन्हें सत्र शुरू होते ही साइकिल मिल सकेगी। स्कूल आने-जाने में दिक्कत नहीं होगी।
FAQ
- बालिका साइकिल योजना में ई-वाउचर क्या होता है?
ई-वाउचर एक डिजिटल कूपन होता है जिससे तय राशि की खरीदारी की जा सकती है। राजस्थान सरकार की नई व्यवस्था में 9वीं की छात्राओं को करीब 4 हजार रुपए का ई-वाउचर दिया जाएगा। इससे वे अपनी पसंद की साइकिल खुद खरीद सकेंगी। - साइकिल मिलने में इतनी देरी क्यों होती है?
विभाग को पहले टेंडर निकालना, साइकिल खरीदना, उन्हें गोदाम में रखना और फिर स्कूलों तक पहुंचाना पड़ता था। यह पूरी प्रक्रिया छह महीने से ज्यादा समय लेती थी। इसीलिए जुलाई में भर्ती होने वाली छात्राओं को दिसंबर-जनवरी में साइकिल मिल पाती थी। - किस योजना के तहत छात्राओं को साइकिल और स्कूटी दी जाती है?
कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना और देवनारायण छात्रा स्कूटी योजना के तहत छात्रों को स्कूटी दी जाती है। इस योजना में अब शिक्षा विभाग कुछ बदलाव करने की योजना बना रही है।
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