पीएमओ डॉ. मेघवाल का इस्तीफा, विधायक ने अस्पताल में आकर लगाई थी फटकार
News In Short
- राजस्थान में बारां के पीएमओ डॉ. नरेंद्र कुमार मेघवाल ने दिया इस्तीफा।
- विधायक राधेश्याम बैरवा की फटकार से आहत थे पीएमओ मेघवाल।
- पीएमओ ने कहा कि वह गालियां सुनने के लिए पद पर नहीं आए थे।
- विधायक ने सफाई, अस्पताल में सफाई के लिए कहना दबाव कैसे हुआ।
- पीएमओ के इस्तीफे से जनप्रतिनिधियों और लोक सेवकों के बीच फिर उभरी टकराहट।
News In Detail
राजस्थान के बारां जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। बारां जिला अस्पताल के प्रमुख चिकित्सा अधिकारी (पीएमओ) डॉ. नरेंद्र कुमार मेघवाल ने विधायक राधेश्याम बैरवा की फटकार से आहत होकर पद से इस्तीफा दे दिया है। यह घटना सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों और लोक सेवकों के बीच टकराहट का बड़ा उदाहरण बनकर उभरी है।
क्या है पूरा मामला?
घटना 9 अप्रैल की है। अंता-अटरू क्षेत्र के विधायक राधेश्याम बैरवा जिला अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान विधायक ने अस्पताल की व्यवस्थाओं विशेषकर सफाई और ओपीडी की लंबी कतारों को लेकर नाराजगी जाहिर की। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक इस दौरान विधायक बैरवा ने डॉ. नरेंद्र कुमार मेघवाल को सार्वजनिक रूप से खरी-खोटी सुनाई।
डॉ. मेघवाल ने नवंबर 2024 में ही पीएमओ का पदभार ग्रहण किया था। वे विधायक के इस रवैये से इतने आहत हुए कि उन्होंने तुरंत अपना इस्तीफा सौंप दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे सार्वजनिक सेवा के उद्देश्य से पद पर हैं, न कि अपमान सहने के लिए।
गालियां सुनने के लिए पद नहीं संभाला
अपने इस्तीफे के साथ डॉ. नरेंद्र कुमार मेघवाल ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि मैंने लोगों की सेवा करने के उद्देश्य से यह जिम्मेदारी संभाली थी। मेरा उद्देश्य मरीजों को बेहतर सुविधाएं देना है। लेकिन जिस तरह से विधायक महोदय ने व्यवहार किया, वह बर्दाश्त से बाहर है। मैं गालियां सुनने के लिए इस पद पर नहीं बैठा हूं। बताया जा रहा है कि विधायक बैरवा करीब 15 दिन पहले भी अस्पताल आए थे और तब भी उन्होंने ओपीडी की लाइनों को लेकर काफी नाराजगी जताई थी।
विधायक बोले, सफाई के लिए कहना दबाव कैसे?
दूसरी ओर, विधायक राधेश्याम बैरवा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से नकारते हुए इसे अपनी जिम्मेदारी बताया है। उनका कहना है कि वे केवल जनता के हितों की रक्षा कर रहे थे। विधायक ने कहा कि अस्पताल में सफाई की व्यवस्था पुख्ता करने के लिए कहना मेरा कर्तव्य है। यदि मरीजों को असुविधा हो रही है और मैं उसके खिलाफ बोलता हूँ, तो यह मेरा काम है। यदि किसी अधिकारी को व्यवस्था सुधारने की बात अपमान लगती है, तो इसमें मेरा क्या दोष?
इस्तीफे से कर्मचारियों में रोष
बारां जिला अस्पताल में हुई इस घटना के बाद क्षेत्र के अन्य डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों में भी रोष देखा जा रहा है। चिकित्सा कर्मियों ने कहा है कि यदि डॉ. मेघवाल का इस्तीफा वापस नहीं होता या इस मामले में कोई बीच का रास्ता नहीं निकलता, तो जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका विपरीत असर पड़ सकता है। फिलहाल, प्रशासन इस मामले को शांत करने की कोशिशों में जुटा है।
व्यवस्था बनाम स्वाभिमान की जंग
यह मामला राजस्थान की राजनीति और प्रशासन के बीच बड़े विमर्श का विषय बन गया है। एक तरफ विधायक का तर्क है कि वे जनता के प्रति जवाबदेह हैं और व्यवस्थाओं में सुधार चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर का तर्क है कि सुधार के नाम पर अधिकारियों का मानसिक उत्पीड़न और अपमानजनक भाषा का प्रयोग अस्वीकार्य है।
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