राजस्थान में ब्लड बैंक नियमों में बड़ा बदलाव, कैंप वालों की भी जिम्मेदारी तय
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान में ब्लड डोनेशन पर नया नियम लागू।
- कैंप का 50% ब्लड सरकारी बैंकों को मिलेगा।
- प्रसूताओं को फ्री ब्लड देने के बाद फैसला।
- बिना आधा ब्लड दिए कैंप को मंजूरी नहीं।
- सरकारी अस्पतालों में ब्लड कमी दूर करने की कोशिश।
राजस्थान सरकार ने ब्लड डोनेशन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। अब कैंप से जमा ब्लड का 50 फीसदी सरकारी ब्लड बैंकों में जाएगा। यह फैसला प्रसूताओं को फ्री ब्लड देने की नीति के बाद आया है। पहले प्रसूताओं को बिना रिप्लेसमेंट ब्लड देने का फैसला हुआ था। इससे ब्लड बैंकों में कमी की आशंका जताई जा रही थी।
अब बिना आधा ब्लड सरकार को दिए किसी भी डोनेशन कैंप को मंजूरी नहीं मिलेगी। एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर के डॉ. डी.आर. आर्य ने आमजन से अपील भी की है।
प्रसूताओं की योजना से बदला समीकरण
राजस्थान सरकार ने पहले प्रसूताओं के लिए बड़ा फैसला लिया था। सरकारी ब्लड बैंकों से अब उन्हें फ्री ब्लड मिलेगा। इसके लिए किसी रिप्लेसमेंट की जरूरत भी नहीं होगी। यह फैसला मातृ स्वास्थ्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
लेकिन इस फैसले के बाद एक नई चुनौती सामने आई। बिना रिप्लेसमेंट ब्लड देने से बैंकों पर दबाव बढ़ने लगा। ब्लड की कमी होने की आशंका पहले ही जताई जाने लगी थी। इसी वजह से सरकार को नया नियम लाना पड़ा।
एसएमएस मेडिकल कॉलेज में कितनी जरूरत
एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुड़े सरकारी अस्पतालों में ब्लड बैंक चलते हैं। इन बैंकों को हर साल करीब 1.5 लाख यूनिट ब्लड चाहिए। यह आंकड़ा बताता है कि मांग कितनी बड़ी है।
वहीं डोनेशन कैंप की संख्या भी लगातार कम होती जा रही है। कम कैंप लगने से डोनेट होने वाला ब्लड भी घट रहा है। इस वजह से ब्लड बैंकों में पहले से ही कमी बनी रहती है। प्रसूताओं को फ्री ब्लड देने के फैसले ने इस कमी को और बढ़ा दिया।
जनाना और महिला चिकित्सालय जैसे अस्पतालों पर सीधा असर पड़ा। इन अस्पतालों के ब्लड बैंकों में कमी होना लगभग तय माना जा रहा था। इसी स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने नया आदेश जारी किया।
अब कैंप के लिए नई शर्त
सरकार ने अब डोनेशन कैंप के लिए साफ शर्त रख दी है। सामाजिक कार्यक्रमों में लगने वाले कैंप पर भी यह नियम लागू होगा। राजनेताओं के जन्मदिन या जयंती पर लगने वाले कैंप भी इसमें शामिल हैं।
ऐसे किसी भी कैंप को अब तभी मंजूरी मिलेगी, जब डोनेट हुए ब्लड का आधा हिस्सा सरकारी अस्पतालों को मिलेगा। यानी संस्था अपनी मर्जी से पूरा ब्लड अपने पास नहीं रख सकेगी। इस नियम से सरकारी ब्लड बैंकों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञ की अपील
एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर के ब्लड बैंक और इम्यूनोहेमेटोलॉजी एंड ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. डी.आर. आर्य ने भी कदम उठाया है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए आमजन से अपील की है।
उन्होंने ज्यादा से ज्यादा लोगों से रक्तदान करने को कहा है। उनका मानना है कि आम लोगों की भागीदारी से ही यह कमी पूरी हो सकती है। आने वाले समय में यह अपील और तेज होने की संभावना है।
FAQ
- राजस्थान में नया ब्लड डोनेशन नियम क्या है?
अब डोनेशन कैंप से जमा ब्लड का 50 फीसदी सरकारी ब्लड बैंकों में जाना जरूरी होगा। बिना यह शर्त पूरी किए कैंप को मंजूरी नहीं मिलेगी। - नया ब्लड डोनेशन नियम क्यों लागू किया गया?
प्रसूताओं को बिना रिप्लेसमेंट फ्री ब्लड देने के फैसले के बाद ब्लड की कमी की आशंका बढ़ गई थी। इसी कमी को पूरा करने के लिए यह नियम लाया गया। - एसएमएस मेडिकल कॉलेज को हर साल कितना ब्लड चाहिए?
एसएमएस मेडिकल कॉलेज से जुड़े सरकारी अस्पतालों को हर साल करीब 1.5 लाख यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है। कम डोनेशन कैंप के कारण यह मांग पूरी करना मुश्किल हो रहा है।
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