राजस्थान ब्राह्मण महासभा विवाद, कोर्ट ने दखल व व्यवधान नहीं देने को किया पाबंद

Mukesh Sharma | Aug 10, 2026, 22:42 IST
राजस्थान ब्राह्मण महासभा विवाद, कोर्ट ने दखल व व्यवधान नहीं देने को किया पाबंद
जयपुर की एसीएमएम कोर्ट ने राजस्थान ब्राह्मण महासभा विवाद में सुनवाई करते हुए सुभाष पाराशर व अन्य पर अंतरिम रोक लगाई है। अदालत ने पाराशर व अन्य को संस्था के सुचारू संचालन व कार्यों में व्यवधान न डालने का निर्देश दिया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • विवाद की वजह, समानांतर गतिविधियां चलाने और कार्यालय पर कब्जे के प्रयास को लेकर याचिका दायर की गई।
  • वादी का आरोप, विपक्षी पक्ष अवैध रूप से चंदा एकत्र कर संस्था के कार्यों में लगातार बाधा उत्पन्न कर रहा था।
  • विपक्षी पक्ष का तर्क, चुनाव प्रक्रिया को अवैध बताते हुए वादी पक्ष पर झूठे शपथ पत्र का आरोप लगाया गया।
  • अदालत का फैसला, कोर्ट ने संस्था कार्यों में व्यवधान न डालने के आदेश दिए।

राजस्थान ब्राह्मण महासभा के कार्यकारिणी विवाद और समानांतर गतिविधियों के संचालन को लेकर दायर दीवानी याचिका पर सुनवाई करते हुए एसीएमएम (क्रम 1), जयपुर महानगर द्वितीय की पीठासीन अधिकारी कृति शेखावत ने सुभाष पाराशर व अन्य को संस्था के कार्यों में दखल व व्यवधान नहीं करने को पाबंद किया है।



यह है मामला

वादी राजस्थान ब्राह्मण महासभा का कहना है कि राजस्थान ब्राह्मण महासभा सोसाइटी रजिस्ट्रेशन अधिनियम के तहत एक पंजीकृत संस्था है। संस्था अपने विधान के अनुसार समाज के उत्थान, शैक्षणिक एवं सामाजिक गतिविधियों का संचालन करती है।



संस्था में विधिवत चुनाव प्रक्रिया के पश्चात निर्वाचित कार्यकारिणी द्वारा कार्य का संचालन सुचारू रूप से किया जा रहा था।



लेकिन सुभाष पराशर एवं अन्य आये दिन संस्था की कार्यकारिणी के सदस्यों से झगड़ा-फ़साद कर कार्यों में व्यवधान उत्पन्न करते हैं। विपक्षीगण ने स्वयं को संस्था का अध्यक्ष घोषित कर कार्यालय परिसर में कब्जा करने का प्रयास किया और बाहर मेज-कुर्सी लगाकर बैठकें आयोजित करना शुरू कर दिया।



इसके अतिरिक्त बिना किसी अधिकारिता के संस्था के नाम पर अनधिकृत चंदा एकत्र कर रहे हैं। समानांतर कार्यकारिणी गठित कर संस्था की संपत्ति,लोगो (Logo) और फोटो का गलत प्रयोग कर रहे हैं।



SSO ID में हेरफेर का प्रयास

विपक्षीगण ने रजिस्ट्रार संस्थाएं, जयपुर को पत्र लिखकर संस्था की ऑफिशियल SSO ID बदलने का आदेश जारी करवा लिया था (दिनांक 05.04.2023)। हालांकि, इस आदेश के खिलाफ हाई कोर्ट से रोक लगी है।



विपक्षी पक्ष का तर्क

राजस्थान ब्राह्मण महासभा का गठन 1974-75 में हुआ था। वर्ष 2022 में तत्कालीन अध्यक्ष की मृत्यु के पश्चात शैलेंद्र जोशी ने कार्यवाहक अध्यक्ष के रूप में अवैध रूप से चुनाव कराए गए। शैलेंद्र जोशी पर झूठा शपथ पत्र पेश करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ फौजदारी मामला लंबित होने की बात कही गई।



वैध चुनाव प्रक्रिया से केसरीचन्द शर्मा को अध्यक्ष चुना गया था। जबकि वादी पक्ष अवैध रूप से कार्य कर रहा है। इसलिए अंतरिम निषेधाज्ञा प्रार्थना पत्र खारिज किया जाए।



अदालत का फैसला एवं आदेश

अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद प्रकरण के गुण-अवगुण पर कोई टिप्पणी किए बिना वादी के पक्ष में अंतरिम अस्थायी निषेधाज्ञा जारी की है।



कोर्ट ने विपक्षीगण सुभाष पाराशर आदि को पाबंद किया है कि वे राजस्थान ब्राह्मण महासभा संस्था के सुचारू संचालन एवं कार्यों में कोई बाधा उत्पन्न न करें। मामले में अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी।



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