RSSB ने की CET 2026 की तैयारी शुरू, नेगेटिव मार्किंग और नए नियम लागू
News In Short
- RSSB (आरएसएसबी) ने की CET 2026 की तैयारी शुरू।
- इस बार परीक्षा में होगी नेगेटिव मार्किंग।
- स्नातक परीक्षा नवंबर और सीनियर सेकंडरी दिसंबर 2026 में।
- CET पास करने वाले 19-23 बड़ी भर्ती में आवेदन कर पाएंगे।
- CET सर्टिफिकेट की वैधता अब 3 साल की होगी।
News In Detail
राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (Rajasthan Staff Selection Board - RSSB) ने समान पात्रता परीक्षा (Common Eligibility Test - CET) 2026 की तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस बार परीक्षा में नियम और पैटर्न में बड़े बदलाव किए गए हैं। CET स्नातक स्तर की परीक्षा नवंबर 2026 में और सीनियर सेकंडरी स्तर की परीक्षा दिसंबर 2026 में आयोजित होगी।
नेगेटिव मार्किंग होगी लागू
बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज ने बताया कि इस बार CET का स्तर पहले से अधिक कठिन रखा जाएगा। इसके लिए नेगेटिव मार्किंग लागू की जाएगी। इसका उद्देश्य केवल योग्य उम्मीदवारों को ही परीक्षा में उत्तीर्ण करना है।
भर्ती के अवसर
CET पास करने वाले युवाओं के लिए राज्य की लगभग 19 से 23 बड़ी भर्तियों का रास्ता खुल जाएगा। इनमें पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी, कनिष्ठ लेखाकार, एलडीसी, प्लाटून कमांडर, छात्रावास अधीक्षक और पुलिस कॉन्स्टेबल जैसी भर्तियां शामिल हैं।
CET सर्टिफिकेट की वैधता बढ़ी
पहले CET सर्टिफिकेट केवल 1 साल के लिए वैध था। अब इसे बढ़ाकर 3 साल कर दिया गया है। इससे 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों को फायदा होगा। पात्रता के लिए न्यूनतम 40% अंक लाना अनिवार्य रहेगा। आरक्षित वर्ग को इसमें 5% की छूट दी गई है।
आवेदन प्रक्रिया
CET स्नातक स्तर के लिए ऑनलाइन आवेदन जून 2026 में शुरू होंगे और लगभग एक महीने तक जारी रहेंगे। सीनियर सेकंडरी स्तर के लिए आवेदन जुलाई 2026 में शुरू हो सकते हैं। परीक्षा दिसंबर 2026 में प्रस्तावित है।
CET 2024 की वैधता समाप्त
CET 2024 की वैधता फरवरी 2026 में खत्म हो चुकी है। इससे स्नातक स्तर के 8.78 लाख और सीनियर सेकंडरी स्तर के 9.17 लाख अभ्यर्थियों की पात्रता समाप्त हो गई थी।
इससे कई बड़ी भर्ती प्रक्रियाएं CET पात्रता के बिना अटकी हुई थीं। इनमें पटवारी, VDO, एलडीसी, महिला पर्यवेक्षक, उपजेलर, छात्रावास अधीक्षक ग्रेड-द्वितीय और पुलिस कांस्टेबल शामिल हैं।
नेगेटिव मार्किंग की आवश्यकता
बोर्ड अध्यक्ष ने बताया कि CET-2026 में लगभग 3-4 लाख योग्य उम्मीदवारों को ही परीक्षा में उत्तीर्ण करना लक्ष्य है। इसलिए नेगेटिव मार्किंग लागू की जा रही है।
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