राजस्थान निकाय चुनाव: गोवा तक पहुंची पार्षदों की बाड़ाबंदी, आने-जाने के लिए हेलिकॉप्टर

Ashish Bhardwaj | Sept 15, 2026, 10:47 IST
राजस्थान निकाय चुनाव
राजस्थान निकाय चुनाव के बाद पार्षदों की बाड़ाबंदी शुरू हो गई है। बाड़ेबंदी में के लिए पार्षदों को हेलिकॉप्टर से बाहर ले जाया जा रहा है। कुछ पार्षदों को गोवा भी ले जाया गया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजों के बाद सियासी हलचल तेज है।
  • कई निकायों में बहुमत का आंकड़ा साफ नहीं हुआ है।
  • निर्दलीय पार्षद अब सत्ता गठन में अहम भूमिका निभाएंगे।
  • बीजेपी और कांग्रेस दोनों निर्दलीयों को साधने में जुटी हैं।
  • 21 सितंबर को अध्यक्ष पदों के चुनाव होने हैं।

राजस्थान नगर निकाय चुनाव परिणाम सामने आ चूका है। इस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस बहुमत से दूर रह गई हैं। ऐसे में बोर्ड बनाने के लिए दोनों प्रमुख दल निर्दलीय पार्षदों से संपर्क कर रहे हैं। कई जगह निर्दलीय प्रत्याशी ही तय करेंगे कि नगर निकाय की कमान किस पार्टी के हाथ जाएगी।



गोवा तक पहुंची बाड़ाबंदी

बाड़ाबंदी को लेकर राजनीतिक दल अब बड़े स्तर पर तैयारी कर रहे हैं। कुछ निकायों के पार्षदों को हेलिकॉप्टर के जरिए राजस्थान से बाहर ले जाने की तैयारी है। कुछ पार्षदों को गोवा के रिसॉर्ट में ठहराने की भी खबर आयी है। इसके लिए रिसॉर्ट बुकिंग और यात्रा व्यवस्था की जा रही है।



महिला पार्षदों के साथ उनके परिजनों और बच्चों के रहने की व्यवस्था भी की जा रही है। इन सभी को 21 सितंबर तक सुरक्षित रखा जाएगा।



क्यों की जा रही है बाड़ाबंदी

राजनीतिक दलों को डर है कि अध्यक्ष और सभापति चुनाव में क्रॉस वोटिंग हो सकती है। इसी वजह से पार्षदों को सुरक्षित रखने के लिए बाड़ाबंदी की जा रही है।



18 हजार से ज्यादा की बाड़ाबंदी

निकाय चुनाव के बाद प्रदेशभर में बीजेपी, कांग्रेस और अन्य दलों की बाड़ाबंदी जारी है। ये संख्या लगभग 18 हजार के आसपास हो सकती है। परिणाम आने के बाद चुनाव हारने वाले कई प्रत्याशी अपने घर लौट गए हैं। वहीं जीतने वाले पार्षदों को पार्टी संगठन की निगरानी में रखा जा रहा है। कई जगह पार्षदों के मोबाइल फोन भी संगठन स्तर पर जमा किए गए हैं। इसका उद्देश्य उन्हें दूसरे दलों के संपर्क से दूर रखना बताया जा रहा है।



21 सितंबर को होगा फैसला

राजस्थान में 21 सितंबर को नगर निगमों में मेयर और नगर परिषदों में सभापति का चुनाव होगा। वहीं नगर पालिकाओं में चेयरमैन चुने जाएंगे। इसी दिन साफ होगा कि किस दल ने बहुमत का गणित अपने पक्ष में किया है। निर्दलीय पार्षदों के वोट इस चुनाव में सबसे अहम साबित हो सकते हैं। राजनीतिक जानकारों के अनुसार जिन दलों के पास निर्दलीयों का समर्थन होगा, उनके लिए बोर्ड बनाना आसान हो जाएगा।



आरोपों के बीच सियासी सौदेबाजी

पूर्वी राजस्थान की एक नगर पालिका में बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों की जरूरत बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर कुछ दावे सामने आए हैं कि निर्दलीयों से बड़ी रकम की मांग की गई। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों की ओर से भी कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। फिलहाल बीजेपी और कांग्रेस दोनों निर्दलीयों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही हैं।



निकायों में बदले समीकरण

इस बार के निकाय चुनावों में कई जगह स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों का असर देखने को मिला है। निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कई वार्डों में मजबूत प्रदर्शन किया है। अब अध्यक्ष चुनाव में यही निर्दलीय पार्षद किंगमेकर की भूमिका निभा सकते हैं। आने वाले दिनों में राजनीतिक जोड़-तोड़ और तेज होने की संभावना है।



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