एक पुलिस अफसर ने 40 जगह से लगवाई सिफारिश, भरी मीटिंग में सीएम को यह किस्सा क्यों सुनाना पड़ा?

Ashish Bhardwaj | Apr 11, 2026, 12:26 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के सीएम भजनलाल शर्मा ने पुलिस में ट्रांसफरपोस्टिंग में जुगाड़ की संस्कृति पर जोरदार किस्सा सुनाया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि अगर जुगाड़ लगाएंगे तो कानून व्यवस्था भगवान भरोसे रहेगी।

News In Short

  • सीएम भजनलाल ने पुलिस के काम करने के ढर्रे पर सवाल उठाए।
  • भजनलाल बोले, सिफारिश नहीं, काम के आधार पर होगी पोस्टिंग।
  • उन्होंने ट्रांसफर-पोस्टिंग में जुगाड़ लगाएंगे तो व्यवस्था भगवान भरोसे।​
  • सीएम ने की अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था की समीक्षा।
  • मुख्यमंत्री ने कहा कि, अब पुलिस की रेंज स्तर पर होगी जवाबदेही।

News In Detail

Jaipur: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पुलिस अधिकारियों की उचित स्तरीय बैठक में पुलिस के काम करने के ढर्रे पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि हाल ही में एक पुलिस अधिकारी ने अपनी मनपसंद पोस्टिंग के लिए एक-दो नहीं, बल्कि 40 अलग-अलग जगहों से सिफारिशें लगवाईं।



​सीएम ने सख्त लहजे में सवाल किया, जिस अधिकारी ने एक कुर्सी पाने के लिए 40 लोगों से फोन करवाया हो, वह कुर्सी पर बैठने के बाद किसका काम करेगा? जनता का या उन 40 सिफारिश करने वालों का?



जुगाड़ लगाएंगे तो व्यवस्था भगवान भरोसे​

यह बैठक शुक्रवार को अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था की समीक्षा के लिए बुलाई गई थी। सीएम ने साफ कहा कि अगर अधिकारी अपनी ऊर्जा काम के बजाय नेटवर्किंग और जुगाड़ में लगाएंगे, तो प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे ही रहेगी। उन्होंने अपराध की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई।



रेंज स्तर पर होगी जवाबदेही

भजनलाल ने कहा कि प्रदेश में अपराध को लेकर वे लगातार फीडबैक ले रहे हैं, लेकिन अधिकारियों की तरफ से अपेक्षित रिस्पॉन्स नहीं मिल रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर रेंज स्तर के अधिकारियों को निशाने पर लेते हुए कहा कि उन्हें अपने क्षेत्र के हर छोटे-बड़े घटनाक्रम की जानकारी होनी चाहिए।



​सीएम ने कहा, जब मुझे (मुख्यमंत्री को) यह पता चल सकता है कि किस इलाके में क्या हो रहा है तो क्षेत्र के आईजी को इसकी खबर क्यों नहीं होती? क्या वे अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं?



​तस्करी और बजरी माफिया पर एक्शन की तैयारी

​बैठक का एक बड़ा हिस्सा तस्करी और अवैध खनन (बजरी) पर केंद्रित रहा। मुख्यमंत्री ने इस बात पर हैरानी और नाराजगी जताई कि पुलिस को तस्करों के रूट तक पता हैं, फिर भी उन पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं होती?



उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल पर कहा कि अक्सर तस्कर पुलिस की पहुंच से बाहर रहते हैं क्योंकि वे पुराने रास्तों के बजाय नए रास्तों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन पुलिस का मुखबिर तंत्र सो रहा है।



​उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि ​बजरी माफिया के मामलों में राजस्थान पुलिस का नाम किसी भी सूरत में सामने नहीं आना चाहिए। ​तस्करी रोकने के लिए जिलों के अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। ​बॉर्डर इलाकों में एसओजी की चौकियां खोली जाएंगी और सीसीटीवी कैमरों का जाल बिछाया जाएगा।



​ निर्दोष न फंसे, दोषी न बचे

समीक्षा के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि कई मामलों में आपसी रंजिश के चलते झूठे मुकदमे दर्ज कराए जाते हैं। मुख्यमंत्री ने डीजीपी को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों की गहन जांच की जाए और गलत मामला दर्ज कराने वालों के खिलाफ सख्त इस्तगासा पेश किया जाए। साथ ही, पॉक्सो एक्ट के मामलों में ई-साक्ष्य को प्राथमिकता देने की बात कही ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके।



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