खुद को सीएम का साला बताने वाले प्रमोद शर्मा पर कसा शिकंजा, भजनलाल की जीरो टॉलरेंस नीति का दिखा असर
News In Short
- सीएम भजनलाल शर्मा की जीरो टोलरेंस नीति का बड़ा असर दिखा।
- खुद को सीएम का साला बताने वाले प्रमोद शर्मा पर शिकंजा कसा।
- पुलिस का नोटिस मिलते ही प्रमोद शर्मा मोबाइल बंद कर भागा।
- प्रमोद शर्मा के खिलाफ एक साल पुराने जमीन कब्जे के मामले में चल रही हैं जांच।
- घनश्याम शर्मा ने अपनी भूमि पर अवैध कब्जे की 9 लोगों पर दर्ज कराई थी रिपोर्ट।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में सुशासन और जीरो टॉलरेंस के दावों के बीच एक बड़ा मामला सामने आया है। जयपुर के मानसरोवर इलाके में जमीनों पर अवैध कब्जे में सक्रिय प्रमोद शर्मा पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है। दिलचस्प और चर्चा का विषय यह है कि आरोपी प्रमोद शर्मा शहर के रसूखदार गलियारों में खुद को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का साला बताकर धौंस जमाता था, लेकिन मुख्यमंत्री की भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ सख्त नीति के आगे उसका यह रिश्तेदारी वाला कार्ड पूरी तरह फेल हो गया है।
नोटिस मिलते ही मोबाइल बंद कर भागा आरोपी
मानसरोवर थाना पुलिस ने प्रमोद शर्मा को जमीन कब्जा प्रकरण में पूछताछ के लिए नोटिस जारी कर 17 अप्रैल 2026 को थाने बुलाया था। पुलिस की सक्रियता को भांपते हुए प्रमोद ने न केवल अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया, बल्कि वह अपने वर्तमान ठिकानों से भी गायब हो गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार प्रमोद शर्मा के खिलाफ एक साल पुराने मामले में जांच चल रही थी, जिसमें अब पुलिस ने सख्त रुख अपनाते हुए उसे गिरफ्तार करने की तैयारी शुरू कर दी है।
जन्मदिन की भव्य तैयारी धरी रह गई
प्रमोद शर्मा इस गुरुवार को अपना जन्मदिन बेहद भव्य तरीके से मनाने की योजना बना रहा था। उसने सोशल मीडिया पर अपनी रसूखदारी दिखाने के लिए बड़े आयोजन की घोषणा की थी। आयोजन स्थल पर टेंट और सजावट के व्यापक इंतजाम किए गए थे, लेकिन जैसे ही उसे पता चला कि पुलिस की टीम उसे दबोचने के लिए दबिश दे रही है, उसने आनन-फानन में कार्यक्रम स्थगित करने का संदेश प्रसारित किया और फरार हो गया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर टेंट और अन्य साजो-सामान हटवा दिए हैं।
सीएम का रिश्तेदार होने का दांव नहीं आया काम
पूरे जयपुर में प्रमोद शर्मा की पहचान एक ऐसे व्यक्ति के रूप में थी जो प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों पर मुख्यमंत्री का करीबी होने का प्रभाव डालता था। वह खुद को मुख्यमंत्री का साला बताकर कई विवादित जमीनों के सौदों में हस्तक्षेप करता था और अफसरों की दलाली में लिप्त रहता था।
हालांकि, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट कर दिया था कि अपराध के मामले में कोई भी अपना नहीं होगा। प्रमोद शर्मा को लगा था कि उसका कथित रसूख उसे कानूनी कार्रवाई से बचा लेगा, लेकिन पुलिस द्वारा दी गई दबिश ने यह साफ कर दिया है कि मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस नीति में रसूखदारों के लिए कोई जगह नहीं है। यह घटना बताती है कि चाहे कोई खुद को कितना भी प्रभावशाली क्यों न बताए, कानून से ऊपर कोई नहीं है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला जुलाई 2025 का है, जब जयपुर निवासी घनश्याम शर्मा ने ग्राम बदरवास स्थित अपनी भूमि पर अवैध कब्जे की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में प्रमोद शर्मा सहित 9 लोगों को नामजद किया गया था। पुलिस ने उपर से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस मामले में तेजी दिखाई है। पुलिस की टीमों ने अब प्रमोद शर्मा के संभावित ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है।
अफसरों के बीच दलाली और जमीन कब्जाने का खेल
प्रमोद शर्मा पर आरोप है कि वह लंबे समय से सरकारी तंत्र में अपनी पहुंच का फायदा उठाकर विवादित जमीनों पर कब्जा करने का सिंडिकेट चला रहा था। वह अधिकारियों को मुख्यमंत्री के नाम का डर दिखाकर या करीबी होने का लालच देकर अनुचित कार्य करवाने के लिए जाना जाता था। अब पुलिस उन सभी संपर्कों की भी जांच कर रही है, जिन्होंने प्रमोद को संरक्षण दे रखा था।
जल्द होगा सलाखों के पीछे
मानसरोवर पुलिस के अनुसार आरोपी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। उसके फरार होने के बाद पुलिस ने सर्विलांस और मुखबिर तंत्र को सक्रिय कर दिया है। पुलिस का कहना है कि आरोपी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
यह प्रकरण राज्य में एक नई नजीर पेश कर रहा है कि सत्ता के करीब होने का दावा करने वाले लोग अब अपनी मनमानी नहीं कर सकेंगे। मुख्यमंत्री का सख्त रुख उन लोगों के लिए कड़ा सबक है जो रसूख की आड़ में कानून की धज्जियां उड़ाने की कोशिश करते हैं।
रिश्वतखोरी में हो चुके हैं गिरफ्तार
करीब छह साल पहले एसीबी ने 5 लाख की रिश्वत लेते हुए प्रमोद शर्मा को गिरफ्तार किया था। वह तत्कालीन भरतपुर डीआईजी लक्ष्मण गौड़ के नाम पर रिश्वत ले रहा था। इसकी शिकायत भरतपुर के उद्योग नगर थानाप्रभारी चन्द्रप्रकाश चौधरी ने एसीबी मुख्यालय से की थी, जिसमें बताया गया कि प्रमोद शर्मा डीआईजी से एसीआर सही करवाने की एवज में 10 लाख रूपये की रिश्वत मांग रहा था। बताया जाता है कि भाजपा के सत्ता में आने पर लक्ष्मण गौड़ बहाल हो गए।
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