सीएमओ में अधिकारियों के कामकाज की नई जमावट, संभागों और विभागों की दी जिम्मेदारी
News In Short
- प्रशासनिक सर्जरी के बाद सीएमओ के भीतर कामकाज की नई जमावट।
- सीएमओ में नियुक्त हुए अधिकारियों को संभागों और विभागों की जिम्मेदारी बांटी।
- डॉ. जितेंद्र कुमारी सोनी को सीएमओ में मजबूत स्तंभ के रूप में पेश किया है।
- अधिकारियों के विभागों के आवंटन में एसीएस अखिल अरोड़ा की पसंद चली।
- नई जमावट भजनलाल सरकार के आगामी रोडमैप का संकेत है।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान की भजनलाल सरकार ने बड़ी प्रशासनिक सर्जरी के बाद अब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के भीतर कामकाज की नई जमावट पूरी कर ली है। हाल ही में हुए 65 से अधिक आईएएस अधिकारियों के तबादलों के बाद सीएमओ का चेहरा पूरी तरह बदल चुका है। अब सीएमओ में तैनात हुए अधिकारियों को न केवल कुर्सियां मिल गई हैं, बल्कि उनके बीच विभागों का विधिवत बंटवारा भी कर दिया गया है।
इस नई व्यवस्था में स्पष्ट रूप से सीएमओ में एसीएस अखिल अरोड़ा की पसंद और प्रशासनिक पकड़ की झलक साफ दिखाई दे रही है। जारी किए गए नए आदेशों के अनुसार सीएमओ के अधिकारियों को अलग-अलग संभागों और विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विभागों का वितरण: किसे क्या मिला?
कार्य-विभाजन सूची के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय में आठ प्रमुख अधिकारियों को राज्य के महत्वपूर्ण महकमों और संभागों की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है।
आईएएस जितेंद्र कुमार सोनी (SCM)
इन्हें जयपुर संभाग की जिम्मेदारी के साथ-साथ लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (PHED), जल संसाधन, ऊर्जा, परिवहन, जनसंपर्क, जीएडी, डीओपी, कैबिनेट, मोटर गैराज, सिविल एविएशन, जैसे विभाग दिए गए हैं। डॉ. सोनी को सीएमओ में एक मजबूत स्तंभ के रूप में देखा जा रहा है।
आईएएस सिद्धार्थ सिहाग (SS)
भरतपुर संभाग के साथ ही उद्योग, एमएसएमई, गृह, विधि एवं न्याय, जेल और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए हैं। गृह और पुलिस जैसे संवेदनशील विभागों का इनके पास होना प्रशासनिक गलियारों में इनकी अहमियत को दर्शाता है।
आईएएस मुकुल शर्मा (SS)
कोटा और बीकानेर संभाग की निगरानी के साथ ही मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों (CM Programme) का प्रबंधन देखेंगे। सार्वजनिक जनसुनवाई और सीएमआर (CMR) के कार्यों का समन्वय भी इन्हीं के जिम्मे होगा।
आईएएस जगवीर सिंह (JS)
जोधपुर संभाग के साथ-साथ इन्हें आपदा प्रबंधन, कृषि, सहकारिता और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति जैसे जनहित से जुड़े विभाग दिए गए हैं।
आईएएस उत्सव कौशल (JS)
उदयपुर और अजमेर संभाग के साथ यूडीएच, पर्यटन, देवस्थान और पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास की जिम्मेदारी।
आईएएस अमिता शर्मा (JS)
वित्त, कराधान, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) और खेल विभाग की देखरेख।
आईएएस अंजू राजपाल (JS)
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, शिक्षा (प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च) और श्रम विभाग की जिम्मेदारी।
आईएएस जय प्रकाश नारायण (DS)
महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय और राजस्व विभाग।
अखिल अरोड़ा की पसंद और नई रणनीति
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस पूरी जमावट के पीछे एसीएस अखिल अरोड़ा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अधिकारियों के चयन से लेकर उनके विभागों के आवंटन तक में उनकी पसंद और कार्यकुशलता के मापदंडों का ध्यान रखा गया है।
65 अफसरों के हालिया तबादलों के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय को एक नई ऊर्जा देने की कोशिश की गई है। इस नई टीम के जरिए सरकार का लक्ष्य योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और जनता की शिकायतों का त्वरित निस्तारण करना है।
'लिंक ऑफिसर' प्रणाली से सुगम होगा कामकाज
इस आदेश की सबसे खास बात लिंक ऑफिसर की व्यवस्था है। सीएमओ ने सुनिश्चित किया है कि किसी भी अधिकारी की अनुपस्थिति में कामकाज प्रभावित न हो। उदाहरण के तौर पर यदि डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी अवकाश या फील्ड टूर पर रहते हैं तो उनका कार्य सिद्धार्थ सिहाग देखेंगे। इसी तरह अमिता शर्मा और अंजू राजपाल एक-दूसरे की लिंक ऑफिसर नियुक्त की गई हैं। यह व्यवस्था फाइलों को अटकाने के बजाय स्पीड गवर्नेंस पर ध्यान देने के लिए की गई है।
सरकार के रोडमैप का संकेत
सीएमओ में हुई यह नई जमावट भजनलाल सरकार के आगामी रोडमैप का संकेत है। वरिष्ठ अधिकारियों की अनुभवी टीम और अखिल अरोड़ा के रणनीतिक कौशल के साथ अब उम्मीद की जा रही है कि राजस्थान सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं और प्रशासनिक सुधारों को नई गति मिलेगी। सचिवालय से लेकर संभाग स्तर तक अब सीएमओ की सीधी नजर और पकड़ और भी मजबूत हो गई है।
ये भी पढे़:-
हर बार जरूरी थोड़ी है कि सीएम बना जाए, वसुंधरा राजे को लेकर मदन राठौड़ का आया बड़ा बयान
मोदी की गारंटी या चुनावी छलावा, गहलोत ने इंतजार शास्त्र के अंतिम चैप्टर से साधा निशाना
कटारिया के खिलाफ असंतोष बढ़ा, फिर लगे गंभीर आरोप, विधायकों के फंड से अपनों का कराया हवाई सफर
पहली बार नैचुरल ब्रीडिंग से जन्मे 3 चूजे, डेजर्ट नेशनल पार्क में गोडावण का कुनबा बढ़कर हुआ 79