प्रताप नगर कोचिंग हब में शिफ्ट होने को तैयार संस्थान, पर सुप्रीम कोर्ट में रखीं शर्तें
समझें क्या है पूरा मामला
- सुप्रीम कोर्ट में अर्जी,महासंघ ने मुख्य मामले में पक्षकार बनने की मांग की।
- शर्तों पर आपत्ति, अत्यधिक दरों और नीलामी प्रक्रिया को बताया अव्यवहारिक।
- लीज मॉडल की मांग,खरीदे बिना लंबे समय के लिए किफायती किराये की व्यवस्था हो।
- 10-बी समिति का रुख,गोपालपुरा में कोचिंग अवैध,हब में तुरंत शिफ्ट करने की गुहार।
राजस्थान के करीब 500 से ज्यादा कोचिंग इंस्टीट्यूट की प्रतिनिधित्व करने वाले ऑल कोचिंग इंस्टीट्यूट महासंघ ने सुप्रीम कोर्ट में प्रताप नगर स्थित कोचिंग हब में शिफ्ट होने की इच्छा व्यक्त की है। इस संबंध में महासंघ ने सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मामले में पक्षकार बनने के लिए अर्जी दायर की है।
वित्तीय और व्यावहारिक समस्या दूर हों तो जाएं
महासंघ का कहना है कि वे शिफ्ट होने को तैयार हैं,लेकिन उनके सामने वित्तीय और व्यावहारिक समस्याएं हैं।
अत्यधिक दरें और कम पुनर्भुगतान अवधि: एसोसिएशन ने भूमि की अत्यधिक कीमतों (लगभग 7,000 रुपए प्रति वर्ग मीटर से शुरू) और निष्पक्ष लॉटरी प्रणाली के बजाय नीलामी प्रक्रिया अपनाने का विरोध किया है। इसके साथ ही 10 वर्ष की सीमित किस्त अवधि को भी अव्यवहारिक बताया है।
छात्रों पर आर्थिक प्रभाव:
महासंघ का कहना है कि नीलामी प्रक्रिया से कोचिंग की लागत बढ़ेगी। इसका सीधा प्रभाव छात्रों की फीस पर पड़ेगा और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र गुणवत्तापूर्ण कोचिंग से वंचित हो सकते हैं।
कोचिंग हब का अन्य उपयोग:
अर्जी में यह भी आरोप लगाया गया है कि कोचिंग हब के लिए बने परिसरों को नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी और अन्य प्रशासनिक कार्यालयों को लीज पर दिया जा रहा है, जिससे मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
लीज बनाम बिक्री मॉडल:
महासंघ का कहना है कि करीब 97% कोचिंग वर्तमान में किराये के भवनों में चल रहे हैं। इसलिए महासंघ ने अनिवार्य खरीद के स्थान पर किफायती दीर्घकालिक लीज (किराये) का विकल्प देने की मांग की है।
यह है मामला
सुप्रीम कोर्ट मास्टर प्लान के विपरीत निर्माण के मामले में सुनवाई कर रहा है। इसी मामले में 10-बी विकास समिति ने भी पक्षकार बनकर जयपुर के गोपालपुरा बाईपास पर चल रहे कोचिंग इंस्टीट्यूट्स को प्रताप नगर स्थित कोचिंग हब में शिफ्ट करने के आदेश देने की गुहार की है। समिति का कहना है कि गोपालपुरा बाईपास रोड जेडीए के मास्टर प्लान के अनुसार कमर्शियल रोड है। यहां दुकानें या शोरुम आदि तो खोले जा सकते हैं लेकिन,कोचिंग इंस्टीट्यूट नहीं। क्यों कि कोचिंग इंस्टीट्यूट संस्थागत श्रेणी में आते हैं। यह मास्टर प्लान के विपरीत है।
कोचिंग इंस्टीट्यूटस के कारण आस-पास की कॉलोनियों में रहने वालों का जीना दूभर हो गया है। क्यों कि घर-घर में हॉस्टल,पीजी और लाईब्रेरी आदि खुल गए हैं। इनमें हजारों छात्र रह रहे हैं। इस कारण स्थानीय नागरिकों के लिए बनाई गई सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ रहा है और इलाके की शांति भंग हो गई है।
जेडीए आंख में धूल झोंक रहा है
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान 10-बी विकास समिति की ओर से सीनियर एडवोकेट व पूर्व अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल राजदीपक रस्तौगी ने कोर्ट को बताया कि अदालती आदेश के बावजूद जेडीए दिखावटी कार्रवाई कर रहा है। जेडीए ने कुछ कोचिंग सेंटर को अवैध मानकर सीज तो किया है,लेकिन इन्हें पूरी तरह से गोपालपुरा बाईपास से शिफ्ट नहीं किया जा रहा है।
आज भी कई बड़े कोचिंग सेंटर यहां चल रहे हैं। उन्होंने कोर्ट केा बताया कि दिल्ली में हॉस्टल गिरने जैसी घटना जयपुर में भी हो सकती है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके कोचिंग सेंटर को प्रताप नगर स्थित कोचिंग हब में शिफ्ट किया जाए। मामले में अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
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