क्या डोटासरा की नजर अब जूली के पद पर, कांग्रेस में पक रहे कुछ नए समीकरण
News In Short
- राजस्थान में कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा और टीकाराम जूली के बीच शीतयुद्ध।
- विधानसभा के बजट सत्र में डोटासरा ने की जूली को प्रभावहीन दिखाने की कोशिश।
- इस साल प्रदेश पद से हट सकते हैं गोविंदसिंह डोटासरा।
- क्या कांग्रेस नेता डोटासरा की चाहकांग्रेस अध्यक्षत नेता प्रतिपक्ष जूली के पद पर टिकी।
- कांग्रेस नेताओं में डोटासरा की भावी भूमिका को लेकर सुगबुगाहट।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने हाल ही में विधानसभा बजट सत्र में अति सक्रियता चर्चा में रही। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को प्रभावहीन करने की पूरी कोशिश की है।
जूली अपनी माताजी के निधन के कारण कई दिनों तक बजट सत्र में भाग नहीं ले पाए थे। उनकी अनुपस्थिति में कमान विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष रामकेश मीणा के पास होनी चाहिए थी, लेकिन जूली की अनुपस्थिति में डोटासरा ही नेता प्रतिपक्ष के अंदाज में भूमिका निभाते दिखे।
नेता प्रतिपक्ष बनना चाहते थे डोटासरा
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार गोविंद सिंह डोटासरा 2023 में ही नेता प्रतिपक्ष बनना चाहते थे। लेकिन, कई कारणों से बाजी टीकाराम जूली के हाथ लगी। मजेदार बात यह है कि राजस्थान में कांग्रेस के अधिकांश नेता और पार्टी आलाकमान दोनों के काम से खुश है। पार्टी के अधिकांश नेताओं का मानना है कि डोटासरा ने प्रदेश अध्यक्ष के रुप में और जूली ने नेता प्रतिपक्ष के रुप में अच्छा काम किया है।
डोटासरा का पद से हटना तय
डोटासरा का प्रदेश अध्यक्ष के रुप में काम करते हुए 6 साल होने जा रहे हैं। ऐसे में उनके स्थान पर किसी अन्य का प्रदेश अध्यक्ष बनना तय है। यह बात खुद डोटासरा भी जानते और समझते हैं। हालांकि इसमें फिलहाल कोई संदेह नहीं है कि पंचायतराज व निकाय चुनावों तक डोटासरा ही अध्यक्ष संभाले रहेंगे। अंतत: उनका हटना तय है।
दोनों ही नेता राहुल के पसंदीदा
पार्टी सूत्र कहते हैं कि कांग्रेस में करीब-करीब सभी महत्वपूर्ण फैसले राहुल गांधी की सहमति से होते हैं। डोटासरा और जूली दोनों ही राहुल की निगाह में चढ़े हुए हैं। कहा तो यह जाता है कि जूली तो सीधे राहुल गांधी के हस्तक्षेप से ही नेता प्रतिपक्ष बने हैं। जूली भारत जोड़ो यात्रा के समय से ही राहुल गांधी की निगाह में चढ़े हुए थे।
अनुसूचित जाति से होने के कारण भी उन्हें ज्यादा तवज्जो मिली है। हालांकि राहुल के नजदीकी माने जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की जूली को नेता प्रतिपक्ष बनाने में बड़ी भूमिका रही है। जितेंद्र सिंह अलवर से हैं और जूली भी यहीं से हैं। दोनों के बीच अच्छी सियासी ट्यूनिंग है।
डोटासरा की लोकप्रियता कायम
डोटासरा जाट समुदाय से हैं। वे खांटी जाट बेल्ट शेखावाटी इलाके के लक्ष्मणगढ़ से विधायक हैं। जाट समुदाय का यहां से निकला संदेश पूरे राजस्थान में जाता है। पार्टी सूत्रों का मानना है कि डोटासरा की लोकप्रियता भी कम नहीं है। ऐसे में पार्टी उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाकर घर बैठाकर जाट समुदाय को गलत संदेश भी नहीं देना चाहती है।
डोटासरा की सक्रियता के मायने
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि डोटासरा अपनी लोकप्रियता के फैक्ट को अच्छी तरह समझते हैं। इसलिए उन्होंने नेता प्रतिपक्ष बनने की कोशिश फिर तेज कर दी है। विधानसभा के बजट सत्र में यह बखूबी साबित भी हुआ है। उन्होनें सत्ता पक्ष पर हमला करने और उलझने में कोई कमी नहीं छोड़ी।
बजट बहस में मुख्यमंत्री के जवाब से पहले नेता प्रतिपक्ष के बोलने की परंपरा है। लेकिन डोटासरा ने कोई मुद्धा नहीं छोड़ा, जिस पर बोले नहीं हों। इससे नेता प्रतिपक्ष के पास बोलने के मुद्धे तो कम हुए ही, साथ ही उन्हें उतना समय भी नहीं मिला, जितना मिलना चाहिए था।
जातीय समीकरण पर नजर
2024 के लोकसभा चुनाव में जाट और अनुसूचित जाति समुदाय ने कांग्रेस के पक्ष में जमकर मतदान किया था। इस कारण ही पार्टी को राजस्थान में लोकसभा की 11 सीट मिली हैं। कांग्रेस आलाकमान भी इस बात को जानता है।
ऐसे में कांग्रेस के कुछ नेताओं को लगता है कि पार्टी अंतत: डोटासरा को नेता प्रतिपक्ष और जूली को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बना सकती है। पार्टी के एक धड़े का कहना है कि आगे सचिन पायलट का प्रदेश अध्यक्ष बनना तय है। पायलट वर्तमान में एआईसीसी के महासचिव हैं और छत्तीसगढ़ के प्रभारी हैं।
हालांकि, पायलट ने 2023 के बाद से ही अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि वह फिर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बनने को आतुर हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि गोविंद सिंह डोटासरा अपने मिशन में सफल हो पाते हैं या नहीं।
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