पायलट पर गहलोत के सुर नरम पड़े, क्या कांग्रेस में सचमुच सुलह हो गई?

Mukesh Sharma | Jun 11, 2026, 20:55 IST
Photograph: (the sootr)
​राजस्थान कांग्रेस में मानेसर कांड के बाद छिड़ी जंग अब नए दिलचस्प मोड़ पर है। पिछले हफ्ते तक अशोक गहलोत के बयान से गुटबाजी की चर्चा गर्म थी। अब सचिन पायलट पर बदले सुर ने सियासी गलियारों में नया संदेश दे दिया है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • कांग्रेस में छिड़ी जंग अब सुलह की तरफ बढ़ती दिख रही।
  • सुबह पायलट बोले, मैं भी गहलोत के लिए बेटा वैभव जैसा।
  • बाद में गहलोत ने कहा, इसमें सचिन ने क्या गलत बोला।
  • सचिन के बयान के बाद गहलोत ने एकजुटता का दिया संदेश।

Jaipur: राजस्थान कांग्रेस में छिड़ा गहलोत-पायलट विवाद अब सुलह की तरफ बढ़ता दिख रहा है। पिछले हफ्ते तक जहां अशोक गहलोत के बयान से खेमेबाजी को हवा मिल रही थी, वहीं अब सचिन पायलट और गहलोत ने सुलह का संदेश दे दिया है।



कांग्रेस नेता सचिन पायलट के गुरुवार को दिए बयान का पूर्व सीएम अशोक गहलोत पर बड़ा असर नजर आया। पायलट ने दौसा में कहा कि अशोक गहलोत का जितना स्नेह वैभव गहलोत के प्रति है, उतना ही मुझ पर भी है।



इस बयान के कुछ घंटों बाद गहलोत के सुर भी बदले हुए दिखाई दिए। उन्होंने मीडिया से कहा कि इसमें गलत क्या है, पायलट ने बिल्कुल सही बात कही है। उन्होंने यह भी साफ किया कि मानेसर प्रकरण का जिक्र किसी व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं था। गहलोत ने पार्टी नेताओं को एकजुट होकर कांग्रेस के लिए काम करने की सलाह दी।



सचिन बोले-मैं भी वैभव जैसा

साल 2020 के मानेसर घटनाक्रम का जिक्र कर पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने पिछले दिनों फिर पुराने सियासी घाव कुरेद दिए थे। इसके बाद लगा कि पार्टी फिर दो गुटों में बंट जाएगी। लेकिन दौसा में पिता राजेश पायलट की पुण्यतिथि पर सचिन पायलट ने एक ऐसा बयान दिया, जिसने पूरे राजनीतिक माहौल का रुख बदल दिया।



पायलट ने कहा कि अशोक गहलोत का जितना स्नेह वैभव गहलोत के प्रति है, उतना ही मेरे प्रति भी है। हम सब एकजुट हैं। ​इस लाइन ने उन अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश की, जो पिछले कई दिनों से कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई को लेकर लगाई जा रही थीं।



क्या था मानेसर कांड 2020?

मानेसर कांड (2020) राजस्थान की राजनीति में आया एक बहुत बड़ा सियासी संकट था, जब तत्कालीन उप-मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट अपने वफादार 18-19 विधायकों के साथ बगावत कर हरियाणा के मानेसर स्थित एक होटल में जाकर रुक गए थे।



यह घटना जुलाई 2020 में घटित हुई थी, जिसने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार को संकट में डाल दिया था।



राजेश पायलट की पुण्यतिथि से बदला माहौल

पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय राजेश पायलट की 26वीं पुण्यतिथि के अवसर पर दौसा के भंडाना स्थित राजेश पायलट स्मृति स्मारक पर एक भव्य सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया।



इस अवसर पर उनके पुत्र और कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट ने अपने पिता को पुष्प चक्र अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।



इस दौरान उनके साथ दोनों पुत्र आरान पायलट और विहान पायलट भी मौजूद रहे। इसी प्रार्थना सभा के बाद मीडिया से मुखातिब हुए सचिन पायलट ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ अपने रिश्तों पर बयान दिया।



​गहलोत का डैमेज कंट्रोल

​पायलट के इस बयान के कुछ देर बाद अशोक गहलोत का जवाब भी सामने आया। उन्होंने मीडिया से कहा कि इसमें गलत क्या है, पायलट ने बिल्कुल सही बात कही है। गहलोत ने साफ किया कि 2020 मानेसर प्रकरण का जिक्र किसी व्यक्ति विशेष पर हमला नहीं था।



गहलोत ने सचिन का जिक्र करते हुए ​कहा कि बचपन में हम उनके घरों में आते-जाते थे, उन्होंने कोई नई बात नहीं कही है। मैंने उस दिन जो बात कही थी वह दिल से कही थी, मेरा किसी पर आरोप नहीं था।



गहलोत पायलट विवाद पर गहलोत ने यह भी दी सफाई

​गहलोत ने कहा कि जो मानेसर घटनाक्रम हुआ था, उसे मैं एक बार देश के सामने रखना चाहता था क्योंकि मुझ पर आरोप लग रहे थे कि अशोक गहलोत सीएम बने रहने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष का पद ठुकरा कर आलाकमान के निर्देशों की अवहेलना कर रहे थे।



​गहलोत के अनुसार मेरे खिलाफ यह परसेप्शन बन गया था। मेरे मिलने वाले भी मुझसे यही बात करने लगे थे। इसीलिए बस उस दौर की परिस्थितियों को समझाने के लिए मैंने दिल से वह बात कही।



उन्होंने कहा कि तब मैंने तमाम नेताओं से एकजुट होकर काम करने की अपील की थी और युवाओं से कहा था कि लोकतंत्र बचाओ। सीनियर नेताओं पर इसकी बड़ी जिम्मेदारी है। मैंने जैसलमेर में ही कह दिया था-भूलो और माफ करो। यदि वह सब समझ जाते हैं तो आज यह स्थिति नहीं बनती।



क्या नरम तेवर डैमेज कंट्रोल की रणनीति

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि भाजपा लगातार कांग्रेस की गुटबाज़ी को मुद्दा बनाकर हावी होने की कोशिश में है। ऐसे में दोनों नेताओं के नरम पड़ते तेवर पार्टी के लिए डैमेज कंट्रोल की रणनीति हैं।



फिलहाल कांग्रेस में टकराव की जगह तालमेल की तस्वीर दिखाने की कोशिश हो रही है। लेकिन राजनीति में कब कौन-सा अध्याय फिर खुल जाए, इसका अंदाजा लगाना आसान नहीं है।



FAQ

  1. राजेश पायलट की पुण्यतिथि कब मनाई जाती है?
    पूर्व केंद्रीय मंत्री और दिग्गज किसान नेता राजेश पायलट की पुण्यतिथि हर साल 11 जून को मनाई जाती है। 11 जून 2000 को एक सड़क दुर्घटना में उनका निधन हुआ था

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