मुख्य सचिव ने सीनियर जर्नलिस्ट पर दर्ज कराई एफआइआर, अपनी तरह का ऐसा पहला मामला
Jaipur: राजस्थान के प्रशासनिक गलियारे से ऐसी खबर आई है जिसने देश में मीडिया और प्रशासनिक हल्कों में हलचल मचा दी है। राजस्थान के मुख्य सचिव वी श्रीनिवास ने जयपुर के सीनियर जर्नलिस्ट महेश झालानी के खिलाफ पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया है।
यह देश के प्रशासनिक इतिहास में संभवतः अपनी तरह का पहला मामला है, जब किसी राज्य के मुख्य सचिव ने खुद आगे बढ़कर किसी पत्रकार के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज कराई है। अमूमन ऐसे मामलों में सरकारें या जनसंपर्क विभाग खंडन जारी करते हैं।
इस मामले की पटकथा 26 अप्रैल को लिखी गई थी। इस दिन महेश झालानी ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक लंबा लेख पोस्ट किया। आरोप है कि इस लेख में मुख्य सचिव वी श्रीनिवास के लिए अपमानजनक, तीखी और मानहानिकारक बातें लिखी गई थीं।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन के राजस्थान दौरे में मुख्य सचिव के स्वागत पर भी पत्रकार झालानी ने आलोचनात्मक लेख लिखा था। अधिकारियों का कहना है कि पत्रकार झालानी मुख्य सचिव के खिलाफ लगातार लिख रहे थे। 26 अप्रैल को लिखा लेख मुख्य सचिव को अधिक अपमानजनक लगा।
एक अन्य पोस्ट में जताया खेद
इस पूरी कहानी में एक रोचक मोड़ तब आया, जब पत्रकार महेश झालानी ने न सिर्फ सोशल मीडिया पर एक अन्य पोस्ट लिखकर अपनी भाषा पर गहरा खेद व्यक्त किया, बल्कि वे सीधे मुख्य सचिव वी श्रीनिवास से व्यक्तिगत रूप से मिलने भी पहुंच गए।
झालानी का दावा है कि उन्होंने मुख्य सचिव से आमने-सामने बैठकर अपनी टिप्पणियों के लिए खेद व्यक्त कर दिया था। पत्रकार के मुताबिक अधिकारी ने उनकी इस माफी को बड़े बड़प्पन और उदारता के साथ स्वीकार भी कर लिया था।
कैसे तैयार हुई एफआईआर की स्क्रिप्ट?
मुख्य सचिव कार्यालय ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया और सीधे गृह विभाग को पत्र लिखा। इसमें निर्देश स्पष्ट थे कि पत्रकार महेश झालानी के फेसबुक पर लिखे लेख की समीक्षा की जाए और भारतीय न्याय संहिता (BNS) व सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
मुख्य सचिव कार्यालय से चिट्ठी आने के बाद गृह विभाग एक्शन में आ गया। गृह विभाग ने बिना वक्त गंवाए जयपुर के अशोक नगर थाने को तुरंत मामला दर्ज करने के आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए।
इस कार्रवाई को लेकर अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया वह लेख पूरी तरह भ्रामक, मनगढ़ंत और मानहानि से भरा था। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर इस तरह की बेलगाम और अमर्यादित कोशिशों को रोकने के लिए ऐसी सख्त कानूनी नजीर पेश करना बेहद जरूरी हो गया था।
इन कड़े निर्देशों का पालन करते हुए जयपुर दक्षिण पुलिस हरकत में आई। आठ मई को जयपुर के वीआईपी इलाके में स्थित अशोक नगर थाने में भारतीय न्याय संहिता और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा नंबर दर्ज कर लिया गया।
उस पोस्ट में ऐसा क्या था, जिससे हिल गया सिस्टम?
दरअसल, अपनी मूल पोस्ट में पत्रकार महेश झालानी ने मुख्य सचिव वी श्रीनिवास के कामकाज की शैली पर बेहद तीखे और सीधे हमले किए थे।
पत्रकार ने आरोप लगाया था कि जब से वी श्रीनिवास ने मुख्य सचिव का पद संभाला है, तब से राज्य का पूरा प्रशासनिक सिस्टम लकवाग्रस्त (पैरालाइज्ड) हो चुका है।
पोस्ट में दावा किया गया था कि मुख्य सचिव के पास जमीनी स्तर पर काम करने वाले फील्ड अनुभव की भारी कमी है, जिसके कारण उनका शासन पूरी तरह अप्रभावी साबित हो रहा है।
एक गंभीर आरोप यह भी था कि प्रशासनिक निर्णय और नीतियां बड़े पैमाने पर केवल कागजों और फाइलों तक ही सिमट कर रह गई हैं। धरातल पर आम जनता को इनका कोई फायदा नहीं दिख रहा है।
झालानी ने सीधे शब्दों में लिखा था कि मुख्य सचिव का पूरा ध्यान वास्तविक और ठोस काम करने के बजाय सोशल मीडिया और मीडिया में केवल अपनी व्यक्तिगत 'इमेज-बिल्डिंग' (छवि चमकाने) पर केंद्रित है।
आत्मनिरीक्षण या कानूनी विवशता?
इस लेख के बाद जब विवाद बढ़ा, तो पत्रकार झालानी के सुर बदल गए। उन्होंने एक अन्य पोस्ट में स्वीकार किया कि आलोचना करते वक्त उनके तेवर बेहद अनुचित थे, जो जिम्मेदार पत्रकारिता के नैतिक मूल्यों के पूरी तरह खिलाफ थे।
झालानी ने लिखा कि आत्मनिरीक्षण करने पर उन्हें इस बात का गहरा अहसास हुआ है कि उनकी टिप्पणियों से राज्य के एक अत्यंत वरिष्ठ अधिकारी की गरिमा और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। उन्होंने तर्क दिया कि लोकतंत्र में सरकार और अधिकारियों की आलोचना करना हर नागरिक और पत्रकार का अधिकार है, लेकिन इस अधिकार की आड़ में किसी की व्यक्तिगत गरिमा को तार-तार नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने अपनी इस माफी को किसी कानूनी डर या विवशता का परिणाम नहीं, बल्कि अपना एक नैतिक संकल्प बताया।
अब आगे क्या?
फिलहाल, जयपुर दक्षिण की पुलिस ने 8 मई को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कड़क धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66D के तहत केस डायरी तैयार कर ली है।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की कमान जांच अधिकारी मोतीलाल शर्मा को सौंपी गई है। वे अब इस पूरे डिजिटल साक्ष्य (फेसबुक पोस्ट) और दोनों पक्षों के बयानों की बारीकी से तफ्तीश कर रहे हैं।
इस मामले में 'द सूत्र' ने मुख्य सचिव वी श्रीनिवास से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क साधा। उनके व्हाट्सएप पर मैसेज भेजा गया। जैसे ही उनका पक्ष आएगा, इसे अपडेट कर दिया जाएगा।
क्या हैं BNS और IT एक्ट की धाराएं
पुलिस ने पत्रकार महेश झालानी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा पंजीकृत किया है:
धारा 336(4), BNS 2023: जालसाजी, भ्रामक दस्तावेज तैयार करने या झूठी पहचान/तथ्यों के जरिए किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने से संबंधित।
धारा 356(2) एवं 353(2), BNS: मानहानि (Defamation) और लोक सेवक की प्रतिष्ठा को जानबूझकर आघात पहुंचाने तथा आपराधिक कृत्य के लिए उकसाने से संबंधित प्रावधान।
धारा 352, BNS: शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करने या भड़काने वाले वक्तव्य जारी करने के संदर्भ में।
धारा 66D, IT एक्ट: कंप्यूटर संसाधन या किसी संचार उपकरण (जैसे मोबाइल/इंटरनेट) का उपयोग करके धोखाधड़ी या किसी अन्य की प्रतिष्ठा को आघात पहुंचाने के लिए दंड।
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