कर्मचारियों को मिला 2 प्रतिशत DA बढ़ोतरी का तोहफा, अब 60% मिलेगा महंगाई भत्ता
News In Short
- राजस्थान सरकार ने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में 2% की बढ़ोतरी की ।
- महंगाई भत्ता 58% से बढ़ाकर 60% किया गया, जो 1 जनवरी 2026 से लागू होगा।
- राज्य सरकार ने पंचायत और जिला परिषद कर्मचारियों को भी इस बढ़ोतरी का लाभ दिया।
- इस फैसले से राज्य के खजाने पर ₹1156 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
- बढ़ा हुआ भत्ता जून 2026 में कर्मचारियों को नकद भुगतान के रूप में मिलेगा।
News In Detail
राजस्थान की भजनलाल सरकार ने प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए मंहगाई भत्ता में बढ़ोतरी कीअच्छी खबर दी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को महंगाई भत्ते (DA - Dearness Allowance) और महंगाई राहत में 2 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से न केवल प्रदेश के करीब 12.46 लाख परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा, बल्कि अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
किसे, कितना और कब?
सातवें वेतनमान का लाभके तहत कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह आदेश 1 जनवरी 2026 से प्रभावी माना जाएगा।
| विवरण | आंकड़े |
| वर्तमान महंगाई भत्ता | 58% |
| नया संशोधित भत्ता | 60% |
| लाभान्वित कार्मिक | लगभग 7.02 लाख |
| लाभान्वित पेंशनर्स | लगभग 5.44 लाख |
| सालाना वित्तीय भार | ₹1156 करोड़ रुपये |
नकद भुगतान और एरियर का गणित
सरकार ने भुगतान की प्रक्रिया को भी स्पष्ट कर दिया है, जिससे कर्मचारियों को अपनी जमा राशि का पूरा हिसाब मिल सके:
नकद भुगतान: कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन जून 2026 में मिलने वाली मई माह की सैलरी के साथ नकद दिया जाएगा।
एरियर (GPF): 1 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक की चार महीने की बढ़ी हुई राशि कर्मचारियों के सामान्य प्रावधायी निधि (GPF) खाते में जमा की जाएगी। यानी यह पैसा आपके भविष्य के लिए 'सुरक्षित बचत' बन जाएगा, जबकि मई महीने से बढ़ा हुआ भत्ता आपकी जेब में 'नकद' आएगा।
पेंशनर्स को राहत: राज्य के पेंशनभोगियों को 1 जनवरी 2026 से ही बढ़ी हुई महंगाई राहत का नकद भुगतान किया जाएगा।
पंचायत और जिला परिषदों को भी लाभ
मुख्यमंत्री का यह निर्णय केवल मुख्यधारा के सरकारी विभागों तक सीमित नहीं है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि पंचायत समिति और जिला परिषद के अधीन काम करने वाले कर्मचारियों को भी इस 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी का पूरा लाभ मिलेगा।
आर्थिक भार
इस निर्णय से राज्य के खजाने पर प्रतिवर्ष 1156 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ आएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह निर्णय बढ़ती महंगाई के बीच कर्मचारियों के जीवन स्तर को बनाए रखने और उनके आर्थिक हितों की रक्षा के लिए लिया गया है।
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