राजस्थान शिक्षा विभाग में प्रमोशन अटका, 534 में से 131 DEO पद खाली; अधिकारियों पर अतिरिक्त काम का बोझ

Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 20, 2026, 10:44 IST
राजस्थान शिक्षा विभाग में प्रशासनिक संकट
राजस्थान शिक्षा विभाग में डीईओ के 534 में से 131 और उप निदेशक के 67 में से 32 पद खाली हैं। डीपीसी में देरी के कारण कई अधिकारियों को दो से तीन पदों का अतिरिक्त कार्यभार संभालना पड़ रहा है। शिक्षक संगठनों ने रिक्त पद भरने के लिए जल्द डीपीसी और रिव्यू-रिवीजन सूची जारी करने की मांग की है।

राजस्थान के शिक्षा विभाग में प्रशासनिक पदों पर विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) नहीं होने से कामकाज प्रभावित हो रहा है। कई जगह एक अधिकारी को दो से तीन पदों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है। इससे अधिकारियों पर काम का दबाव बढ़ रहा है और स्कूलों की नियमित मॉनिटरिंग पर भी असर पड़ने की आशंका है।



जिला शिक्षा अधिकारी के 131 पद खाली

विभाग में जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) के कुल 534 स्वीकृत पदों में से 131 खाली हैं। यानी करीब 24.31 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इसी तरह उप निदेशक यानी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी के 67 पदों में से 32 खाली हैं। इन पदों पर नियमित पदोन्नति नहीं होने से प्रशासनिक जिम्मेदारियां दूसरे अधिकारियों को सौंपी जा रही हैं।



संयुक्त निदेशक के 50 प्रतिशत पद रिक्त

शिक्षा विभाग में संयुक्त निदेशक के 18 स्वीकृत पदों में से 9 खाली हैं। इस कैडर में 50 प्रतिशत पद रिक्त हैं। वहीं अतिरिक्त निदेशक के 3 पदों में से एक खाली है। उच्च स्तर के पदों पर भी रिक्तियां होने से प्रशासनिक नियंत्रण और विभागीय कामकाज के संचालन में चुनौतियां बढ़ रही हैं।



अजमेर से नागौर तक अधिकारियों के पास अतिरिक्त जिम्मेदारी

अतिरिक्त कार्यभार की स्थिति कई जिलों में देखी जा रही है। अजमेर में मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी पीसी अजमेरा के पास संयुक्त निदेशक का अतिरिक्त काम है। ब्यावर में डीईओ माध्यमिक शंकर लाल सीडीईओ की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। टोंक में डीईओ माध्यमिक राजेश कुमार के पास डीईओ प्रारंभिक और सीडीईओ का अतिरिक्त कार्यभार है।



पाली और नागौर में भी एक अधिकारी के पास दो जिम्मेदारियां

पाली में डीडी एमजी स्कूल अजय कुमार के पास संयुक्त निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार है। वहीं नागौर में डाइट प्रिंसिपल को मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी का काम भी संभालना पड़ रहा है। ऐसे में अधिकारियों को अपने मूल कार्यालय के साथ अतिरिक्त जिम्मेदारी वाले कार्यालयों का काम भी देखना पड़ता है। इससे नियमित काम और निगरानी के लिए समय निकालना मुश्किल हो सकता है।



पदोन्नति का इंतजार करते-करते रिटायर हो सकते हैं अधिकारी

डीपीसी में देरी का असर अधिकारियों के करियर पर भी पड़ सकता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस सत्र की डीपीसी में 1 अप्रैल 2026 को कार्यरत अधिकारियों को शामिल किए जाने की स्थिति बन रही है। ऐसे में इस तारीख के बाद सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारियों को चालू सत्र की पदोन्नति प्रक्रिया में शामिल नहीं किए जाने की आशंका है। इससे कई अधिकारी पदोन्नति के अवसर से वंचित रह सकते हैं।



रिव्यू और रिवीजन सूची जारी करने की मांग

राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने मांग की है कि सरकार डीओपी के वर्ष 2008 के सर्कुलर के नियम 7.1 के अनुसार रिव्यू और रिवीजन सूची भी जारी करे। उनका कहना है कि इससे पात्र अधिकारियों का चयन कर रिक्त पदों को भरने का रास्ता खुल सकता है। संगठन के मुख्य महामंत्री महेंद्र पाण्डे ने भी खाली पदों को भरने के लिए जल्द डीपीसी कराने की मांग की है।



अतिरिक्त दबाव से मॉनिटरिंग और फैसलों पर पड़ रहा असर

सेवानिवृत्त डीईओ राजेंद्र शर्मा के अनुसार, जिला शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी जिले और अधीनस्थ कार्यालयों के कामकाज की निगरानी करना है। उप निदेशक को डीईओ और अधीनस्थ कार्यालयों की मॉनिटरिंग करनी होती है, जबकि उच्च पदों पर नीतिगत और प्रशासनिक काम संभाले जाते हैं। पद खाली रहने और अतिरिक्त कार्यभार बढ़ने से नियमित मॉनिटरिंग तथा विभागीय निर्णयों के लिए पर्याप्त समय निकालना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में रिक्त पदों पर डीपीसी कराना प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी माना जा रहा है।



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