ट्रेजरी से पास हुए बिल, लेकिन खातों में नहीं आए पैसे, कर्मचारी परेशान

Jageshwar prasad | Jul 19, 2026, 15:15 IST
बिल पास फिर भी सात लाख कर्मचारियों को नहीं मिला पैसा
राजस्थान में सात लाख कर्मचारियों के समर्पित अवकाश का भुगतान तीन महीने से अटका है। ट्रेजरी से बिल पास फिर भी पैसा नहीं आया, कुल नुकसान 90 करोड़।

समझें क्या है पूरा मामला

  • बिल पास फिर भी सात लाख कर्मचारियों को नहीं मिला पैसा।
  • तीन महीने से अटका है 90 करोड़ का अवकाश भुगतान।
  • वेतन वृद्धि से पहले आवेदन करने वालों को हुआ नुकसान।
  • हर कर्मचारी को औसतन 1,280 रुपए का सीधा घाटा।
  • कर्मचारी संघ बोला, सरकार कर रही परिलाभों पर हमला।

राजस्थान सरकार की ओर से कर्मचारियों के समर्पित अवकाश के भुगतान में लेटलतीफी हो रही है। प्रदेश के करीब सात लाख कर्मचारियों के बिल कोष कार्यालय से पारित हो चुके हैं। इसके बावजूद तीन महीने से यह राशि खातों में नहीं पहुंची है।



कर्मचारी संगठनों का दावा है कि इससे कुल 89.60 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। हर कर्मचारी को औसतन 1,280 रुपए का सीधा आर्थिक घाटा उठाना पड़ा है।



कैसे शुरू हुई यह देरी?

अधिकांश कर्मचारियों ने अप्रैल 2026 में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए समर्पित अवकाश के नकद भुगतान का आवेदन दिया था। संबंधित विभागों ने बिल तैयार कर कोष कार्यालय भेजे। वहां बिल पास भी हो गए, लेकिन राशि अब तक कर्मचारियों के बैंक खातों में नहीं पहुंची है।



इसी बीच 1 जुलाई से वार्षिक वेतन वृद्धि लागू हो गई। यदि भुगतान समय पर हो जाता या आवेदन जुलाई में किया जाता, तो कर्मचारियों को बढ़े हुए मूल वेतन के आधार पर अधिक राशि मिलती। देरी के कारण अब कर्मचारियों को पुराने कम वेतन के हिसाब से ही भुगतान का इंतजार करना पड़ रहा है।



तीन वेतन स्तर पर कितना हुआ नुकसान

आंकड़ों के अनुसार 40,000 रुपए मूल वेतन वाले कर्मचारी का 1 अप्रैल 2026 को कुल वेतन 64,000 रुपए बनता था। इसमें 60 प्रतिशत महंगाई भत्ते के साथ 15 दिन के समर्पित अवकाश की राशि 32,000 रुपए होती।



लेकिन 1 जुलाई 2026 को मूल वेतन बढ़कर 41,200 रुपए हो गया। इसके बाद अवकाश राशि भी बढ़कर 32,960 रुपए हो गई। यानी इस वेतन स्तर पर कर्मचारी को 960 रुपए का सीधा नुकसान हुआ। यही पैटर्न अन्य वेतन स्तरों पर भी लागू है।



50,000 रुपए मूल वेतन वाले कर्मचारी को यह नुकसान 1,200 रुपए का हुआ है। वहीं 70,000 रुपए मूल वेतन वाले कर्मचारी को सबसे ज्यादा 1,680 रुपए का नुकसान झेलना पड़ा है। इन तीनों उदाहरणों के औसत से ही 1,280 रुपए प्रति कर्मचारी नुकसान का आंकड़ा निकाला गया है।



सात लाख कर्मचारियों पर कुल असर

कर्मचारी संगठनों के अनुसार यह औसत नुकसान सात लाख कर्मचारियों पर लागू होता है। इसी आधार पर कुल नुकसान करीब 89.60 करोड़ रुपए आंका गया है। यह राशि राज्य के कर्मचारियों के लिए बड़ा वित्तीय झटका मानी जा रही है।



कर्मचारी संगठन ने क्या कहा?

राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के अध्यक्ष महावीर शर्मा ने इस देरी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि सरकार कर्मचारियों के परिलाभों पर हमला कर रही है। उनके अनुसार अवकाश भुगतान में हो रही यह देरी इसका सीधा उदाहरण है।



आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल कर्मचारी लगातार भुगतान जल्द जारी करने की मांग कर रहे हैं। बिल पहले से पारित हैं, इसलिए तकनीकी रूप से भुगतान में देरी की वजह स्पष्ट नहीं है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि जितनी जल्द राशि जारी होगी, उतना ही नुकसान कम होगा।



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