बाघ-बघेरे और अन्य वन्यजीवों की गणना के समय में बड़ा बदलाव, प्रचंड गर्मी के कारण अब शाम से शुरू होगा वॉटर होल सर्वे
News In Short
- राजस्थान में बाघ-बघेरे और अन्य वन्यजीवों की गणना एक मई को।
- इस साल प्रचंड गर्मी के कारण वन्यजीवों की गणना का समय बदला।
- अब वन्यजीव गणना एक मई को शाम पांच बजे से प्रारंभ होगी।
- राजस्थान में यह गणना वाटरहोल सर्वे पर आधारित होगी।
- गणना का विशेष फोकस तीन टाइगर रिजर्व पर रहेगा।
News In Detail
Jaipur: राजस्थान के जंगलों में बाघ-बघेरे और अन्य वन्यजीवों की गणना शुक्रवार एक मई 2026 को होगी। इस बार भीषण गर्मी के कारण गणना के समय में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (CWLW) कार्यालय की ओर से जारी आदेश के अनुसार अब यह गणना सुबह के बजाय शाम के समय से शुरू होगी।
आदेश में कहा हैे कि यह निर्णय प्रदेश के विभिन्न बाघ अभयारण्यों और संरक्षित क्षेत्रों में बेहतर निगरानी और सटीक आंकड़ों के संकलन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
समय में क्या हुआ बदलाव?
पूर्व में जारी निर्देशों के अनुसार वन्यजीवों की गणना 01 मई 2026 को सुबह 8:00 बजे से शुरू होकर 02 मई 2026 सुबह 8:00 बजे तक निर्धारित थी। लेकिन, प्रचंड गर्मी के कारण अब यह गणना 01 मई को सायं 5:00 बजे से शुरू होगी। वन्यजीवों की गणना 02 मई को सायं 5:00 बजे तक चलेगी।
वॉटर होल पद्धति: क्यों है यह खास?
राजस्थान में वन्यजीवों की गणना पारंपरिक वॉटर होल पद्धति (मचान विधि) से की जाती है। यह गणना वैशाख माह की पूर्णिमा (बुद्ध पूर्णिमा) को की जाती है, क्योंकि इस समय भीषण गर्मी के कारण जंगल के प्राकृतिक जलस्रोत सूख जाते हैं। वन्यजीव अपनी प्यास बुझाने के लिए कृत्रिम या गिने-चुने जलस्रोतों (वॉटर होल्स) पर जरूर आते हैं।
चांदनी रात होने के कारण वनकर्मी और वन्यजीव प्रेमी मचानों पर बैठकर पानी पीने आने वाले बाघ, बघेरा (तेंदुआ), भालू, चीतल, सांभर और अन्य वन्यजीवों को आसानी से देख पाते हैं और उनकी गिनती करते हैं।
इन क्षेत्रों पर रहेगी पैनी नजर
इस गणना का मुख्य केंद्र राज्य के तीन प्रमुख टाइगर रिजर्व रहेंगे:
- रणथंभौर टाइगर रिजर्व (सवाई माधोपुर): यहां बाघों की बढ़ती संख्या को देखते हुए गणना बेहद महत्वपूर्ण है।
- सरिस्का टाइगर रिजर्व (अलवर): यहाँ बाघों के कुनबे और अन्य मांसाहारी जीवों की स्थिति का आकलन होगा।
- मुकुंदरा टाइगर रिजर्व (कोटा): हाड़ौती क्षेत्र के इस संरक्षित क्षेत्र में भी विशेष सतर्कता बरती जाएगी।
- इसके अलावा प्रदेश के सभी क्षेत्रीय और वन्यजीव उप वन संरक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में गणना की तैयारी पूरी कर लें।
सुरक्षा और स्वयंसेवकों की भूमिका
वन्यजीव गणना के दौरान जंगल में मानवीय हस्तक्षेप को कम करने के लिए पर्यटन गतिविधियों पर आंशिक रोक रहती है। वन विभाग के कर्मचारियों के साथ-साथ कई प्रकृति प्रेमी और स्वयंसेवक भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बनते हैं। समय में बदलाव होने से अब गणना दल को शाम की शिफ्ट से अपनी ड्यूटी संभालनी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय में इस बदलाव से गणना की सटीकता बढ़ेगी, क्योंकि शाम से लेकर अगली शाम तक का समय वन्यजीवों की सक्रियता के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण होता है।
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