राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बेटियों का दबदबा, बेटों से करीब 5 लाख ज्यादा नामांकन

Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 22, 2026, 10:45 IST
राजस्थान में बालिका शिक्षा की बड़ी तस्वीर
राजस्थान के सरकारी स्कूलों में 38,74,349 छात्राएं और 33,74,394 छात्र नामांकित हैं। छात्राओं की संख्या छात्रों से 4,99,955 अधिक है, जबकि दसवीं कक्षा में सबसे बड़ा अंतर दर्ज किया गया है। जयपुर में भी सरकारी स्कूलों में लड़कियों का नामांकन लड़कों से 27,879 ज्यादा है।कक्षा बढ़ने के साथ कई स्तरों पर यह अंतर साफ दिखाई देता है।

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बेटियों की संख्या बेटों के मुकाबले करीब 5 लाख ज्यादा है। शिक्षा विभाग के ताजा नामांकन आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कुल 72,48,752 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इनमें 38,74,349 छात्राएं और 33,74,394 छात्र शामिल हैं। यानी छात्राओं की संख्या छात्रों से 4,99,955 अधिक है। खास बात यह है कि नर्सरी को छोड़कर लगभग सभी कक्षाओं में छात्राओं का नामांकन छात्रों से ज्यादा है। कक्षा बढ़ने के साथ कई स्तरों पर यह अंतर साफ दिखाई देता है।



बालिका शिक्षा की योजनाओं से मिल रहा प्रोत्साहन

राजस्थान में छात्राओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें गार्गी पुरस्कार, बालिका प्रोत्साहन पुरस्कार, मुख्यमंत्री हमारी बेटियां और पद्माक्षी पुरस्कार जैसी योजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा लाडो प्रोत्साहन योजना, साइकिल योजना और स्कूटी योजना के जरिए भी छात्राओं को प्रोत्साहित किया जाता है। इन योजनाओं का उद्देश्य बालिकाओं को शिक्षा जारी रखने के लिए सहायता देना और उनकी पढ़ाई में आने वाली बाधाओं को कम करना है। हालांकि, नामांकन में बढ़ोतरी के पीछे अलग-अलग सामाजिक और शैक्षणिक कारण भी हो सकते हैं।



सरकारी स्कूलों में बेटियों की संख्या करीब 5 लाख ज्यादा

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्राओं का नामांकन छात्रों से काफी आगे है। कुल नामांकन में लड़कियों की हिस्सेदारी अधिक है और यह अंतर किसी एक जिले तक सीमित नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान के किसी भी जिले में लड़कों का कुल नामांकन लड़कियों से अधिक नहीं है। यह स्थिति सरकारी स्कूलों में बालिका शिक्षा की भागीदारी को दर्शाती है।



पहली कक्षा से ही बढ़ने लगता है अंतर

नामांकन के आंकड़ों में एलकेजी और यूकेजी से ही छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक दिखाई देती है। पहली कक्षा में 3,10,632 छात्राएं और 2,93,563 छात्र दर्ज हैं, यानी लड़कियां 17,069 ज्यादा हैं। दूसरी कक्षा में यह अंतर बढ़कर 27,040 और चौथी कक्षा में 27,500 हो जाता है। पांचवीं कक्षा में छात्राओं की संख्या छात्रों से 39,807 अधिक है। इन आंकड़ों से पता चलता है कि शुरुआती कक्षाओं में भी सरकारी स्कूलों में लड़कियों की भागीदारी मजबूत है।



दसवीं कक्षा में सबसे ज्यादा अंतर

कक्षा दसवीं में छात्राओं और छात्रों के नामांकन के बीच सबसे बड़ा अंतर दर्ज किया गया है। इस कक्षा में 3,20,391 छात्राएं और 2,53,896 छात्र पढ़ रहे हैं। यानी छात्राओं की संख्या 66,495 अधिक है। कक्षा बारहवीं में भी छात्राओं की संख्या छात्रों से 58,145 ज्यादा है, जबकि आठवीं कक्षा में यह अंतर 56,846 है। ये आंकड़े उच्च कक्षाओं में भी छात्राओं के मजबूत नामांकन को दिखाते हैं।



जयपुर में बेटियों का नामांकन 27 हजार से ज्यादा

जयपुर जिले के सरकारी स्कूलों में भी छात्राओं की संख्या छात्रों से अधिक है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जिले में 1,71,498 लड़कियां और 1,43,619 लड़के पढ़ाई कर रहे हैं। दोनों के बीच 27,879 विद्यार्थियों का अंतर है। यह आंकड़ा बताता है कि राजधानी के सरकारी स्कूलों में भी बालिका नामांकन छात्रों के मुकाबले आगे है। शिक्षा विभाग के सामने अब इस भागीदारी को बनाए रखने के साथ छात्राओं की नियमित उपस्थिति और पढ़ाई जारी रखने पर ध्यान देने की चुनौती भी रहेगी।



नर्सरी में लड़कों की संख्या ज्यादा

जहां अन्य कक्षाओं में छात्राओं का नामांकन अधिक है, वहीं नर्सरी में स्थिति अलग है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नर्सरी में 7,150 छात्र और 6,985 छात्राएं दर्ज हैं। इस तरह यहां लड़कों की संख्या 165 अधिक है। इसके बाद की कक्षाओं में छात्राओं का नामांकन आगे निकल जाता है। कुल मिलाकर, सरकारी स्कूलों के आंकड़ों में बेटियों की भागीदारी मजबूत दिखाई देती है, लेकिन नामांकन के साथ उनकी शिक्षा की गुणवत्ता और स्कूल में निरंतरता पर भी ध्यान देना जरूरी है।



आगे क्या?

राजस्थान में छात्राओं के नामांकन के इन आंकड़ों के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितनी बालिकाएं नियमित रूप से स्कूल आ रही हैं और कितनी छात्राएं माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी कर रही हैं। सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद छात्राओं तक पहुंचाना और पढ़ाई बीच में छोड़ने की समस्या को कम करना भी अहम रहेगा। आने वाले शैक्षणिक आंकड़ों से पता चलेगा कि बालिका शिक्षा में यह बढ़त किस तरह आगे बढ़ती है।



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