राजस्थान: सरकारी स्कूलों में मीडिया बैन पर टीकाराम जूली का सरकार पर बड़ा हमला
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान के सरकारी स्कूलों में मीडिया के बैन का मामला।
- विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इसे गैर-कानूनी और सरकार का डर बताया।
- प्रदेश के हजारों जर्जर स्कूलों व खराब कैमरों को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
- शिक्षा,साफ पानी,कमरे और शिक्षकों जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग का समर्थन।
- आचार संहिता से ठीक पहले फंड जारी करने को हार के डर से की गई लीपापोती करार दिया।
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य के सरकारी स्कूलों में मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का विरोध किया। उन्होंने कहा है कि यह सरकार डर चुकी। जेन जी के बाद अब जेन अल्फा का नंबर आ गया। जेन अल्फा ने 4-5 स्कूलों में विरोध किया है, उसी से सरकार इतना डर गई कि मोबाइल पर प्रतिबंध लगा दिया।
मीडिया अंदर नहीं जा पाएगी। सबसे बड़ा डर इन लोगों के मन में मीडिया का है कि मीडिया अंदर जाएगी तो उनकी कमियों को दिखा देगी।
हाई कोर्ट से भी लग चुकी राजस्थान सरकार को फटकार
टीकाराम जूली ने कहा कि हाई कोर्ट ने भी इनको (सरकार) फटकार लगाई है। इन्होंने वहां पर सॉरी फील किया है। हाई कोर्ट ने कहा कि सरकार की इतनी भी स्थिति में नहीं है, जो स्कूलों के कमरों को ठीक करवा सको। ऐसे में राजस्थान का क्या करोगे ?
राजस्थान के 85000 स्कूलों के कैमरे खराब पड़े हैं। 3768 के आसपास स्कूल जर्जर घोषित हो चुके हैं, एक भी बनाया नहीं। यह तो डर है इस सरकार का और यह तानाशाही है। जूली ने सरकारी स्कूलों में मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने के आदेश का विरोध किया है।
जेन-अल्फा से डरकर बैकफुट पर सरकार
नेता प्रतिपक्ष जूली ने कहा कि बच्चों ने आवाज उठाना शुरू की, उस आवाज को सरकार दबाना चाहती। उन्होंने बच्चों का आह्रान किया कि बच्चे भी इस चीज का विरोध करें क्योंकि स्कूल के अंदर जो इनकी कमियां हैं, वे तो उजागर होनी ही चाहिए।
मीडिया पर रोक लगाकर क्या दिखाना चाहती सरकार
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सवाल पूछा कि वह प्रेस पर रोक लगाकर क्या दिखाना चाहते हैं? आज अचानक ही उनको छात्रों के हित नजर आने लग गए कि छात्रों के हित जो उजागर हो जाएंगे, जबकि यह बहुत जरूरी है और मीडिया नहीं जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डर चुके हैं, उनको इन बच्चों से इतना डर सता रहा है। बच्चे सिर्फ एक एजुकेशन ही तो मांग रहे हैं, पढ़ने के लिए कक्षा-कक्ष हो, पीने के लिए साफ पानी हो, बैठने की व्यवस्था हो, पढ़ाने के लिए टीचर हो। इसके लिए और मांगा क्या है उनसे ? और वह भी नहीं दे पा रहे हैं। यह आदेश सरकार की विफलता और डर को उजगार करता है।
भाजपा को निकाय चुनाव में हार का डर सता रहा: जूली
राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी की हालत खराब है। अब ये लोग उसको मैनेज करने में लगे हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार को ही एक आदेश आया है, अब सरकार ने 10 करोड़ रुपए नगर निगम और 3 करोड़ नगर परिषद में और 1 करोड़ रुपए नगर पालिका में देने की बात कही है कि अब आप इससे साफ-सफाई कर लो।
जूली ने सवाल उठाया कि सरकार को अब कैसे याद आ गई ? सरकार पालिकाओं को पैसे देने की याद भी तब आई है जबकि चुनावी कार्यक्रम घोषित होने वाला है। चुनावी आचार संहिता लगने के बाद यह पैसा तो खर्च भी नहीं हो पाएगा।
जूली ने बताया कि अखिल भारतीय कांग्रेस के महासचिव व राजस्थान प्रभावी रंधावा दो दिन के दौरे पर आए हैं। आने वाले दो दिनों में पूरे प्रदेश के सभी जिलों के जो मुख्य लोग व पदाधिकारियों से चर्चा करेंगे।
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