विवादों के बाद सरकार ने वापस लिया सार्थक नाम अभियान, पान मसाला ब्रांड वाले नामों पर भड़के थे अभिभावक
News In Short
- राजस्थान सरकार ने सार्थक नाम अभियान को लिया वापस, सूत्र।
- अभिभावकों की आपत्ति के बाद सरकार ने यह फैसला लिया।
- 'रजनीगंधा' और 'राजश्री' जैसे नामों पर अभिभावक भड़के थे।
- सूची में एक ही नाम को अलग-अलग स्पेलिंग के साथ कई बार लिखा गया था।
- कांग्रेस ने इसे असंवेदनशील और बच्चों के आत्मसम्मान का अपमान कहा था।
News In Detail
Jaipur: बच्चों को उपहास से बचाने और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के इरादे से शुरू किया गया राजस्थान सरकार का 'सार्थक नाम अभियान' विवादों की भेंट चढ़ गया है। सोशल मीडिया पर हुई आलोचना और विपक्षी दल के तीखे हमलों के बाद सरकार ने कक्षा 1 से 9 तक के छात्रों के "निरर्थक" नामों को बदलने वाले अपने निर्देशों को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है।
क्या था सार्थक नाम अभियान?
13 अप्रैल को शिक्षा विभाग की संयुक्त सचिव मुन्नी मीणा द्वारा आदेश जारी किया गया था। जारी आदेश में कहा गया था कि व्यक्ति का नाम उसके व्यक्तित्व और सामाजिक छवि का आइना होता है। सरकार का तर्क था कि कई छात्रों के नाम जटिल या नकारात्मक अर्थ वाले होते हैं, जिससे स्कूल में उनका मजाक उड़ता है और उनमें संकोच पैदा होता है। इसे दूर करने के लिए 'सार्थक नाम अभियान' के जरिए स्वैच्छिक रूप से नाम बदलने की योजना बनाई गई थी।
सुझाए गए अजीबोगरीब नाम
सरकार ने छात्रों के लिए 1,409 और छात्राओं के लिए 1,541 "बेहतर" नामों की एक सूची साझा की थी। लेकिन जैसे ही यह सूची सार्वजनिक हुई, विवाद खड़ा हो गया। लड़कियों के लिए सुझाए गए नामों में 'रजनीगंधा' और 'राजश्री' जैसे नाम शामिल थे। अभिभावकों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ये नाम प्रसिद्ध पान मसाला ब्रांडों से जुड़े हैं, जो अभियान के मूल उद्देश्य को ही खत्म कर देते हैं।
लड़कों के लिए अहंकार, बेचारादास, उग्र सिंह और थाना सिंह जैसे नाम सुझाए गए, जबकि लड़कियों के लिए भयंकर, लज्जा और भिक्षा जैसे शब्द प्रस्तावित थे। लोगों का सवाल था कि इन नामों से छात्रों का आत्मविश्वास कैसे बढ़ेगा। आलोचकों का कहना था कि सूची में अधिकतर हिंदू नाम थे, जिससे राजस्थान की विविध संस्कृति का सही प्रतिनिधित्व नहीं हो पाया।
स्पेलिंग की गलतियां और डुप्लिकेशन
सूची तैयार करने में भारी लापरवाही भी सामने आई। एक ही नाम को अलग-अलग स्पेलिंग के साथ कई बार लिखा गया था। उदाहरण के तौर पर बालवीर को बालबीर, बलबीर और बलवीर के रूप में दोहराया गया। कृष्णदत्त और मनोरंजन जैसे नामों की भी बार-बार पुनरावृत्ति देखी गई।
राजनीतिक वार-पलटवार
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर निशाना साधते हुए इसे असंवेदनशील और बच्चों के आत्मसम्मान के साथ क्रूर मजाक करार दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के बजाय सरकार बच्चों के नामों के साथ प्रयोग कर रही है।
बैकफुट पर सरकार
हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया था कि यह अभियान पूरी तरह स्वैच्छिक है और बिना माता-पिता की लिखित सहमति के कोई नाम नहीं बदला जाएगा, लेकिन बढ़ते विरोध को देखते हुए विभाग ने कदम पीछे खींच लिए हैं। सूत्रों के अनुसार, अब पुराने निर्देश प्रभावी नहीं रहेंगे और किसी भी छात्र का नाम बदलने के लिए विशेष अभियान नहीं चलाया जाएगा।
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