जयपुर पर 'डेंजर लिस्ट' का खतरा: छिन सकता है वर्ल्ड हेरिटेज का दर्जा; यूनेस्को ने दिसंबर 2026 तक मांगी सुधार की फाइनल रिपोर्ट
thesootr Desk | Apr 18, 2026, 15:36 IST
Photograph: (the sootr)
यूनेस्को ने जयपुर को 2026 तक सुधार रिपोर्ट देने को कहा है, अन्यथा इसे 'डेंजर लिस्ट' में डाला जा सकता है। अनियंत्रित निर्माण, अतिक्रमण और लंबित सुधारों के कारण जयपुर का वर्ल्ड हेरिटेज दर्जा खतरे में है।
News In Short
- जयपुर का वर्ल्ड हेरिटेज दर्जा खतरे में, यूनेस्को ने 2026 तक सुधार रिपोर्ट मांगी।
- यूनेस्को ने सात सुधारों पर प्रगति न होने पर जयपुर से मांगी है रिपोर्ट।
- जयपुर की वॉल्ड सिटी में अनियंत्रित निर्माण और अतिक्रमण है बड़ी समस्या।
- रिपोर्ट संतोषजनक न होने पर जयपुर को डाला जा सकता है 'डेंजर लिस्ट' में।
- वॉल्ड सिटी के लिए विशेष क्षेत्र विरासत विकास योजना 31 मार्च, 2026 तक होगी लागू।
News In Detail
जयपुर को 6 जुलाई 2019 को इसकी योजनाबद्ध बसावट, अनूठी वास्तुकला और सांस्कृतिक पहचान के लिए विश्व धरोहर का दर्जा मिला था। लेकिन अब, अनियंत्रित निर्माण, बढ़ते अतिक्रमण और प्रशासनिक उपेक्षा ने इस विरासत पर गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
यूनेस्को की चिंताएं और सात टाले गए वादे
स्पेशल एरिया हेरिटेज प्लान (SAHDP): वॉल्ड सिटी के लिए एक विशेष विरासत विकास योजना बनाना सबसे अहम शर्त थी, जो अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है।
विरासत इमारतों की सूची: ऐतिहासिक और विरासत वाली इमारतों की एक विस्तृत सूची अभी तक तैयार नहीं की जा सकी है।
आर्किटेक्चरल गाइडलाइंस: नए निर्माण के लिए स्पष्ट वास्तुशिल्प दिशा-निर्देश अब तक लागू नहीं किए जा सके हैं।
प्रबंधन प्रणाली: एक मजबूत प्रबंधन तंत्र के विकास का काम अधूरा है।
हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट: किसी भी नए प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले उसका विरासत पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन (HIA) करना अनिवार्य है, लेकिन यह प्रक्रिया अभी कमजोर है।
निगरानी प्रणाली और जन-जागरूकता: विरासत पर नज़र रखने की प्रणाली और आम लोगों में जागरूकता जैसे बुनियादी पहलू भी अब तक बेहद कमजोर हैं।
अतिक्रमण और अनियंत्रित निर्माण
हाल ही में, राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए जे.के. लोन अस्पताल में 500 बिस्तरों वाले एक आईपीडी टॉवर के निर्माण को रोक दिया है, क्योंकि यह परियोजना यूनेस्को की विश्व धरोहर के बफर जोन के अंतर्गत आती थी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे फैसले अभी भी अपवाद हैं, जबकि नियमों के उल्लंघन के कई मामले अनदेखे रह जाते हैं।
डेंजर लिस्ट और पिछले उदाहरण
भारत में अब तक किसी शहर या स्मारक से वर्ल्ड हेरिटेज दर्जा नहीं छीना गया है, लेकिन दुनिया में इसके तीन उदाहरण मौजूद हैं:
सेंट्रल ओमान - अरेबियन ओरिक्स सैंक्चुरी (2007): संरक्षित क्षेत्र को 90% तक घटाने से यहाँ अवैध शिकार बढ़ गया, जिसके बाद यूनेस्को ने इसे सूची से हटा दिया।
जर्मनी - ड्रेस्देन एल्ब वैली (2009): ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण इस घाटी के बीचोंबीच एक चार-लेन का पुल बनाने के कारण इसे सूची से बाहर कर दिया गया।
यूके - लिवरपूल मैरिटाइम सिटी (2021): लिवरपूल वाटर्स प्रोजेक्ट के तहत अत्यधिक निर्माण के कारण शहर की 'प्रामाणिकता और अखंडता' को नुकसान पहुंचा, जिसके चलते 2021 में यह दर्जा छिन गया।
सरकार की कोशिशें
सरकार ने कुछ अन्य महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिनमें त्रिपोलिया गेट क्षेत्र में पैदल यात्रियों के लिए एक नया विकास क्षेत्र बनाने की योजना शामिल है। इसके अलावा, वॉल्ड सिटी में मेट्रो के विस्तार पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है, ताकि इस ऐतिहासिक क्षेत्र की संरचना पर कोई असर न पड़े। इसके साथ ही, एसएमएस हॉस्पिटल की ऊंचाई बढ़ाने पर भी रोक लगाई गई है, ताकि विजुअल इंटीग्रिटी को बनाए रखा जा सके और शहर के दृश्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
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