वर्ल्ड हेरिटेज डे पर जानें मांडू-ओरछा जैसे रत्नों के बाद भी राजस्थान से क्यों पिछड़ा मध्यप्रदेश
Kaushiki | Apr 18, 2026, 10:31 IST
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वर्ल्ड हेरिटेज डे पर जानें क्यों मध्यप्रदेश अपनी शानदार विरासत के बावजूद पर्यटन में राजस्थान से पीछे है। इंफ्रास्ट्रक्चर और ब्रांडिंग की कमियां बनी बड़ी बाधा। आइए जानें...
WORLD HERITAGE DAY: दुनियाभर में 18 अप्रैल को वर्ल्ड हेरिटेज डे मनाया जाता है। इसका मकसद हमारी पुरानी विरासतों और कल्चर को बचाना है। जब बात विरासत की हो, तो मध्यप्रदेश का नाम सबसे ऊपर आता है।
मध्यप्रदेश को विरासतों का दिल भी कहा जाता है। वहीं, आज वर्ल्ड हेरिटेज डे पर एक बड़ा सवाल खड़ा है। इतनी शानदार विरासत होने के बाद भी मध्यप्रदेश पर्यटन में पीछे क्यों है? हमारा पड़ोसी राज्य राजस्थान हमसे काफी आगे निकल चुका है।
राजस्थान में हर साल करीब 19 लाख विदेशी पर्यटक आते हैं। उन्होंने अपनी विरासत को एक बड़े उद्योग में बदल दिया है। जबकि एमपी की कई साइट्स आज भी पर्यटकों का इंतजार कर रहे हैं। आइए इसे डिटेल में जानें...
![मध्य प्रदेश के महलों की दीवानी हुई दुनिया, मांडू बनेगा वर्ल्ड हेरिटेज, UNESCO लिस्ट में ये पैलेस शामिल - Mandu Included UNESCO List]()
पर्यटन के आंकड़े देखते ही तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाती है। राजस्थान में हर साल करीब 19 लाख विदेशी पर्यटक आते हैं। इसके मुकाबले मध्यप्रदेश में ये संख्या सिर्फ 1.2 लाख ही है।
घरेलू पर्यटकों के मामले में भी राजस्थान 20 करोड़ का आंकड़ा छू रहा है। मध्यप्रदेश अभी 12 करोड़ घरेलू पर्यटकों तक ही सीमित रह गया है। राजस्थान पर्यटन से सालाना करीब आठ हजार करोड़ रुपए की कमाई करता है।
वहीं मध्यप्रदेश का रेवेन्यू अभी केवल तीन हजार करोड़ रुपए के आसपास है। सबसे बड़ा अंतर हेरिटेज होटलों की संख्या में साफ दिखाई देता है। राजस्थान में 185 हेरिटेज होटल हैं, जबकि एमपी में सिर्फ 22 हैं।
![Orchha will become the fourth world heritage site]()
राजस्थान ने बहुत पहले ही पर्यटन की ताकत को पहचान लिया था। उन्होंने नाइट टूरिज्म और फेस्टिवल टूरिज्म को जमकर प्रमोट किया है। वहां की सरकार ने निजी निवेश के लिए बेहतरीन नीतियां बनाई हैं।
पुरानी हवेलियों को शानदार होटलों में बदलकर रोजगार पैदा किया गया। यूनेस्को की लिस्ट में राजस्थान की चार साइट्स शामिल हो चुकी हैं। मध्यप्रदेश के पास अभी केवल तीन यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स हैं।
ओरछा, मांडू और ग्वालियर जैसी जगहें अभी भी संभावित सूची में हैं। ग्वालियर और चंदेरी जैसे शहरों का स्टेटस सालों से लंबित पड़ा है। सही मार्केटिंग न होना मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर उभरी है।
![मध्य प्रदेश के महलों की दीवानी हुई दुनिया, मांडू बनेगा वर्ल्ड हेरिटेज, UNESCO लिस्ट में ये पैलेस शामिल - Mandu Included UNESCO List]()
मध्यप्रदेश (एमपी टूरिज्म)के पास खजुराहो और सांची जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्मारक हैं। लेकिन यहां के सर्किट में कनेक्टिविटी की भारी कमी देखी गई है। ओरछा जैसे खूबसूरत शहर में ठहरने और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है।
मांडू में रात के समय पर्यटकों के लिए गतिविधियां बहुत कम हैं। ग्वालियर की ऐतिहासिक ब्रांडिंग राजस्थान के जयपुर जैसी मजबूत नहीं हो पाई। चंदेरी अपनी साड़ियों के लिए मशहूर है, पर पर्यटन सर्किट से बाहर है।
भोपाल की कई ऐतिहासिक साइट्स आज भी सही से विकसित नहीं हैं। जबलपुर के भेड़ाघाट जैसे क्षेत्रों की ग्लोबल मार्केटिंग बहुत ही कमजोर है। उज्जैन की पहचान सिर्फ धार्मिक पर्यटन तक ही सिमट कर रह गई है।
![List of UNESCO World Heritage Sites in India - Connect Civils]()
पूरी दुनिया में भारत अपनी प्राचीन सभ्यता के लिए जाना जाता है। यूनेस्को की सूची में भारत के पास कुल 42 वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स हैं। भारत इस मामले में दुनिया में छठे स्थान पर काबिज है। मध्यप्रदेश इस गौरवशाली इतिहास का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है।
हमें प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को और ज्यादा बढ़ाना होगा। टूरिज्म को उद्योग का दर्जा देकर निवेश को आसान बनाना जरूरी है। डिजिटल मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर सरकार को करोड़ों खर्च करने होंगे। तभी मध्यप्रदेश का दिल दुनिया के नक्शे पर चमक पाएगा।
![World Heritage Day know about Historical Buildings of Rajasthan | राजस्थान के गौरवशाली अतीत के गवाह हैं ये स्थान, World Heritage Day पर जानें इनके नाम | Hindi News,]()
वर्ल्ड हेरिटेज डे को मनाने का सुझाव साल 1982 में ICOMOS (International Council on Monuments and Sites) संस्था ने दिया था। इसके बाद 1983 में UNESCO ने इसे पूरी तरह मंजूरी दे दी। तब से हर साल 18 अप्रैल को यह खास दिन मनाया जाता है।
इसका असली नाम इंटरनेशनल डे फॉर मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स है। दुनियाभर में फैली ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासतों को बचाना इसका मुख्य लक्ष्य है। पुरानी इमारतें और खंडहर सिर्फ पत्थर नहीं, बल्कि हमारा इतिहास होते हैं।
समय के साथ ये धरोहरें खराब न हों, इसलिए लोगों को जागरूक किया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि इन विरासतों को अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। हर साल इसकी एक खास थीम होती है, जो संरक्षण पर जोर देती है।
![विश्व धरोहर दिवस:पौराणिक और सांस्कृतिक विरासतों का केंद्र 'देश का दिल' मध्य प्रदेश - World Heritage Day: Madhya Pradesh, The Center Of Mythological And Cultural Heritage, The Heart Of ...]()
मध्यप्रदेश वर्ल्ड हेरिटेज साईटअपनी सादगी और प्राचीन नक्काशी के लिए जाना जाता है:
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राजस्थानवर्ल्ड हेरिटेज साईटअपनी भव्यता और राजसी ठाठ-बाट के लिए मशहूर है:
एमपी में बनेगा 625 किमी लंबा टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर, आपस में जुड़ेंगे टूरिस्ट प्लेस
25 महिला बाइकर्स ने शुरू की 1400 किमी की एमपी टूरिज्म यात्रा, सीएम मोहन यादव ने दिखाई हरी झंडी
एमपी में बनेगा बुंदेलखंड टूरिज्म कॉरिडोर, दतला पहाड़ से पन्ना टाइगर रिजर्व तक घूम सकेंगे
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मध्यप्रदेश को विरासतों का दिल भी कहा जाता है। वहीं, आज वर्ल्ड हेरिटेज डे पर एक बड़ा सवाल खड़ा है। इतनी शानदार विरासत होने के बाद भी मध्यप्रदेश पर्यटन में पीछे क्यों है? हमारा पड़ोसी राज्य राजस्थान हमसे काफी आगे निकल चुका है।
राजस्थान में हर साल करीब 19 लाख विदेशी पर्यटक आते हैं। उन्होंने अपनी विरासत को एक बड़े उद्योग में बदल दिया है। जबकि एमपी की कई साइट्स आज भी पर्यटकों का इंतजार कर रहे हैं। आइए इसे डिटेल में जानें...
मध्य प्रदेश के महलों की दीवानी हुई दुनिया, मांडू बनेगा वर्ल्ड हेरिटेज, UNESCO लिस्ट में ये पैलेस शामिल - Mandu Included UNESCO List
राजस्थान बनाम मध्यप्रदेश
घरेलू पर्यटकों के मामले में भी राजस्थान 20 करोड़ का आंकड़ा छू रहा है। मध्यप्रदेश अभी 12 करोड़ घरेलू पर्यटकों तक ही सीमित रह गया है। राजस्थान पर्यटन से सालाना करीब आठ हजार करोड़ रुपए की कमाई करता है।
वहीं मध्यप्रदेश का रेवेन्यू अभी केवल तीन हजार करोड़ रुपए के आसपास है। सबसे बड़ा अंतर हेरिटेज होटलों की संख्या में साफ दिखाई देता है। राजस्थान में 185 हेरिटेज होटल हैं, जबकि एमपी में सिर्फ 22 हैं।
Orchha will become the fourth world heritage site
यूं ही नहीं राजस्थान बना पर्यटन का सिरमौर
पुरानी हवेलियों को शानदार होटलों में बदलकर रोजगार पैदा किया गया। यूनेस्को की लिस्ट में राजस्थान की चार साइट्स शामिल हो चुकी हैं। मध्यप्रदेश के पास अभी केवल तीन यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स हैं।
ओरछा, मांडू और ग्वालियर जैसी जगहें अभी भी संभावित सूची में हैं। ग्वालियर और चंदेरी जैसे शहरों का स्टेटस सालों से लंबित पड़ा है। सही मार्केटिंग न होना मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी कमजोरी बनकर उभरी है।
मध्य प्रदेश के महलों की दीवानी हुई दुनिया, मांडू बनेगा वर्ल्ड हेरिटेज, UNESCO लिस्ट में ये पैलेस शामिल - Mandu Included UNESCO List
एमपी की वो कमियां जो बनती हैं रुकावट
मांडू में रात के समय पर्यटकों के लिए गतिविधियां बहुत कम हैं। ग्वालियर की ऐतिहासिक ब्रांडिंग राजस्थान के जयपुर जैसी मजबूत नहीं हो पाई। चंदेरी अपनी साड़ियों के लिए मशहूर है, पर पर्यटन सर्किट से बाहर है।
भोपाल की कई ऐतिहासिक साइट्स आज भी सही से विकसित नहीं हैं। जबलपुर के भेड़ाघाट जैसे क्षेत्रों की ग्लोबल मार्केटिंग बहुत ही कमजोर है। उज्जैन की पहचान सिर्फ धार्मिक पर्यटन तक ही सिमट कर रह गई है।
List of UNESCO World Heritage Sites in India - Connect Civils
भारत की स्थिति
हमें प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी को और ज्यादा बढ़ाना होगा। टूरिज्म को उद्योग का दर्जा देकर निवेश को आसान बनाना जरूरी है। डिजिटल मार्केटिंग और ब्रांडिंग पर सरकार को करोड़ों खर्च करने होंगे। तभी मध्यप्रदेश का दिल दुनिया के नक्शे पर चमक पाएगा।
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वर्ल्ड हेरिटेज डे की शुरुआत
इसका असली नाम इंटरनेशनल डे फॉर मॉन्यूमेंट्स एंड साइट्स है। दुनियाभर में फैली ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासतों को बचाना इसका मुख्य लक्ष्य है। पुरानी इमारतें और खंडहर सिर्फ पत्थर नहीं, बल्कि हमारा इतिहास होते हैं।
समय के साथ ये धरोहरें खराब न हों, इसलिए लोगों को जागरूक किया जाता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि इन विरासतों को अगली पीढ़ी के लिए सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। हर साल इसकी एक खास थीम होती है, जो संरक्षण पर जोर देती है।
विश्व धरोहर दिवस:पौराणिक और सांस्कृतिक विरासतों का केंद्र 'देश का दिल' मध्य प्रदेश - World Heritage Day: Madhya Pradesh, The Center Of Mythological And Cultural Heritage, The Heart Of ...
मध्यप्रदेश की प्रमुख जगहें
- खजुराहो: पत्थर पर उकेरी गई सुंदर मूर्तियां और मंदिर।
- सांची: बौद्ध धर्म के प्राचीन स्तूप।
- भीमबेटका: आदिमानव की बनाई गुफा पेंटिंग्स।
- ग्वालियर: विशाल किला और तानसेन का मकबरा।
- ओरछा: राजा राम मंदिर और बेतवा किनारे बने महल।
- मांडू: जहाज महल और रानी रूपमती का मंडप।
- उज्जैन: महाकाल मंदिर और प्राचीन घाट।
- पचमढ़ी: जटाशंकर और पांडव गुफाएं (प्राकृतिक हेरिटेज)।
- जबलपुर: भेड़ाघाट (धुआंधार जलप्रपात) और मदन महल किला।
- महेश्वर: नर्मदा किनारे बने सुंदर महल और घाट।
World Heritage Day know about Historical Buildings of Rajasthan | राजस्थान के गौरवशाली अतीत के गवाह हैं ये स्थान, World Heritage Day पर जानें इनके नाम | Hindi News,
राजस्थान की प्रमुख जगहें
- जयपुर: हवा महल, आमेर किला और सिटी पैलेस।
- जोधपुर: मेहरानगढ़ किला और नीली गलियां (Blue City)।
- उदयपुर: पिछोला झील के बीच बना लेक पैलेस और सिटी पैलेस।
- जैसलमेर: सोनार किला (रेगिस्तान का स्वर्ण किला) और नक्काशीदार हवेलियां।
- चित्तौड़गढ़: विजय स्तंभ और रानी पद्मिनी का महल।
- अजमेर/पुष्कर: ब्रह्मा मंदिर और दरगाह शरीफ।
- बीकानेर: जूनागढ़ किला और करणी माता मंदिर।
- माउंट आबू: दिलवाड़ा के जैन मंदिर (पहाड़ी इलाका)।
- कुंभलगढ़: दुनिया की दूसरी सबसे लंबी दीवार वाला किला।
- रणथंभौर: ऐतिहासिक किला और टाइगर सफारी।
एमपी में बनेगा 625 किमी लंबा टाइगर टूरिज्म कॉरिडोर, आपस में जुड़ेंगे टूरिस्ट प्लेस
25 महिला बाइकर्स ने शुरू की 1400 किमी की एमपी टूरिज्म यात्रा, सीएम मोहन यादव ने दिखाई हरी झंडी
एमपी में बनेगा बुंदेलखंड टूरिज्म कॉरिडोर, दतला पहाड़ से पन्ना टाइगर रिजर्व तक घूम सकेंगे
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