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News in short
- मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड बुंदेलखंड में नया टूरिज्म कॉरिडोर बना रहा है।
- खजुराहो के पास दतला पहाड़ को अंतरराष्ट्रीय वेलनेस और टूरिज्म हब बनाया जाएगा।
- यह कॉरिडोर पन्ना टाइगर रिजर्व, ओरछा और आसपास के धार्मिक स्थलों को जोड़ेगा।
- करीब 100 करोड़ की परियोजना में निजी निवेश से वेलनेस रिसॉर्ट और एक्टिविटी जोन बनेंगे।
- स्थानीय लोगों को रोजगार, होटल व्यवसाय और ग्रामीण आजीविका में बड़ा लाभ मिल सकता है।
News in Detail
खजुराहो को मिल रही नई पहचान
खजुराहो पहले ही विश्वस्तर पर अपने मंदिरों और इतिहास के लिए जाना जाता है। अब इसी पहचान के बीच छतरपुर जिले को एक और बड़ा तोहफा मिलने वाला है। राजनगर तहसील के चितरई गांव के पास दतला पहाड़ को टूरिज्म का नया चेहरा बनाया जाएगा।
दतला पहाड़ पर अंतरराष्ट्रीय वेलनेस प्रोजेक्ट
मध्य प्रदेश पर्यटन विकास बोर्ड (एमपी टूरिज्म बोर्ड) ने दतला पहाड़ को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मल्टी टूरिज्म और वेलनेस प्रोजेक्ट के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की है।
योजना के तहत यहां प्रकृति, रोमांच और वेलनेस को एक साथ जोड़ने की कोशिश होगी। लक्ष्य है कि खजुराहो आने वाला पर्यटक सिर्फ मंदिर न देखे, बल्कि यहां भी समय बिताए।
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70 हेक्टेयर में 100 करोड़ का निवेश
परियोजना के लिए खसरा नंबर 572-13 की लगभग 70 हेक्टेयर भूमि चिन्हित की गई है। यहां करीब सौ करोड़ रुपए की लागत से ढांचा तैयार किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए निजी निवेशकों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं।
पीपीपी मॉडल पर होगा डेवलपमेंट
यह प्रोजेक्ट पीपीपी मॉडल पर बनेगा। चयनित निजी कंपनी को 90 साल की लीज पर जमीन दी जाएगी। प्रोजेक्ट को पूरा करने की समय सीमा पांच साल तय की गई है।
क्या-क्या सुविधाएं बन सकती हैं यहां
दतला पहाड़ पर वेलनेस रिसॉर्ट, ईको फ्रेंडली कॉटेज और योग केंद्र विकसित किए जा सकते हैं। साथ ही एडवेंचर टूरिज्म के लिए ट्रेकिंग ट्रेल, नेचर वॉक और आउटडोर एक्टिविटी जोन भी होंगे। प्रकृति के बीच शांति, ध्यान और हेल्दी लाइफस्टाइल चाहने वालों के लिए यह जगह खास बन सकती है।
पर्यटकों का ठहराव समय बढ़ाने की कोशिश
अभी ज्यादातर पर्यटक खजुराहो में कम समय के लिए रुकते हैं। नई सुविधाओं के बाद पर्यटकों का ठहराव समय बढ़ने की उम्मीद है। इससे होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी और गाइड जैसी सर्विस को सीधा फायदा मिल सकता है।
बुंदेलखंड की अर्थव्यवस्था में नई जान
पर्यटन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह प्रोजेक्ट छतरपुर और आसपास के जिलों में पर्यटन गतिविधियों को नई गति देगा। स्थानीय हस्तशिल्प, ग्रामीण आजीविका और छोटे कारोबार को नया बाजार मिलेगा। बुंदेलखंड (बुंदेलखंड टूरिज्म कॉरिडोर) जैसे संवेदनशील क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर बड़ी राहत बन सकते हैं।
खजुराहो से सिर्फ 8 किलोमीटर की दूरी
दतला पहाड़, जिसे दांतला हिल्स या टीथ माउंटेन भी कहा जाता है, खजुराहो मंदिर समूह से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित है। क्वार्ट्ज पत्थरों से बनी यह संकरी पहाड़ी श्रृंखला घिसे हुए दांतों जैसी दिखाई देती है। यही अनोखा रूप इस जगह को बाकी पहाड़ियों से अलग बनाता है।
ट्रेकिंग, सनसेट और नेचर लवर्स की पसंद
दतला पहाड़ पहले से ही ट्रेकिंग और नेचर वॉक पसंद करने वालों के बीच लोकप्रिय है। यहां से दिखने वाला सूर्यास्त और शांत वातावरण लोगों को बार बार खींच लाता है। नई सुविधाओं के बाद यह जगह वीकेंड और छुट्टी मनाने वालों की खास पसंद बन सकती है।
धार्मिक महत्व भी है खास
दतला पहाड़ का धार्मिक पक्ष भी मजबूत है। पहाड़ी पर कई छोटे प्राचीन मंदिर और तीर्थ स्थल बने हुए हैं। चोटी पर स्थित सिद्ध बाबा मंदिर यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है।
दंतकथा से जुड़ा है नाम
स्थानीय मान्यता के मुताबिक इस पहाड़ का नाम दतला नामक एक राक्षस से जुड़ा है। कहा जाता है कि वह कभी इस क्षेत्र में रहता था और इसी के नाम पर पहाड़ का नाम पड़ा। कहानी ने इस पहाड़ को लोककथाओं और धार्मिक भावनाओं से जोड़ दिया है।
टाइगर रिजर्व और धार्मिक सर्किट से कनेक्टिविटी
दतला पहाड़ को पन्ना टाइगर रिजर्व (Panna Tiger Reserve) और आसपास के प्रमुख धार्मिक स्थलों से जोड़ने की योजना है। इससे जंगल सफारी, आध्यात्मिक यात्रा और हेरिटेज टूर एक ही रूट से हो सकेंगे। पर्यटक एक ही क्षेत्र में प्रकृति, वन्यजीव, इतिहास और धर्म का अनुभव ले पाएंगे।
रोजगार और लोकल बिजनेस पर असर
प्रोजेक्ट से होटल, होमस्टे, फूड ज्वाइंट और लोकल टैक्सी ऑपरेटर को नया काम मिलेगा। ग्रामीण महिलाएं स्व सहायता समूह के माध्यम से फूड, क्राफ्ट और लोकल प्रोडक्ट बेच सकेंगी। इससे गांवों की आय भी बढ़ेगी और पलायन पर रोक लग सकती है।
यंग टूरिस्ट और इंटरनेशनल विजिटर पर फोकस
मल्टी टूरिज्म और वेलनेस थीम खासकर युवा और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। खजुराहो आने वाले विदेशी जत्थों के लिए दतला पहाड़ एक अतिरिक्त आकर्षण बन सकता है। डिजिटल प्रमोशन और टूर पैकेज के साथ इसे ग्लोबल मैप पर लाने की तैयारी है। बुंदेलखंड को सौगात
सोशल, पर्यावरण और सांस्कृतिक संतुलन
ईको फ्रेंडली कॉटेज और सीमित निर्माण से पर्यावरण संतुलन बनाए रखने का प्रयास रहेगा। स्थानीय संस्कृति, लोककला और परंपरा को भी टूरिज्म प्रोडक्ट का हिस्सा बनाया जा सकता है। अगर प्लान सही रहा तो विकास और प्रकृति दोनों साथ चल सकेंगे।
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