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NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ को पर्यटन हब बनाने की तैयारी
- सरकार तैयार कर रही है नई पर्यटन नीति
- पीपीपी मॉडल पर विकसित और संचालित किए जाएंगे पर्यटन स्थल
- पहले भी निजी हाथों में दी जा चुकी हैं 15 मोटल
NEWS IN DETAIL
नई पर्यटन नीति हो रही तैयार :
राज्य सरकार नई पर्यटन नीति बनाने जा रही है। इसके तहत सभी तरह के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग नीति बनाई जाएगी। केरल की तरह यहां भी पीपीपी मोड यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर पर्यटन स्थल संचालित किए जाएंगे। सबसे अधिक इको टूरिज्म पर फोकस किया जाएगा।
सरकार राज्य के सरगुजा-बस्तर संभाग में इको टूरिज्म स्थलों का चयन करेगी। माओवाद से लगभग मुक्त हो चुके बस्तर में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए यहां होम-स्टे, होटल, इको-टूरिज्म, एडवेंचर स्पोर्ट्स और वेलनेस सेंटर जैसी परियोजनाओं पर ज्यादा सब्सिडी दी जाएगी। सामान्य क्षेत्रों में जहां इसके लिए कुल खर्च का 45 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी, वहीं आदिवासी क्षेत्र और माओवादी हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में 10 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी।
यहां पर सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या छत्तीसगढ़ के पर्यटन स्थल भी निजी हाथों में जा सकते हैं। पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल कहते हैं कि नई पर्यटन नीति तैयार की जा रही है। इसके तहत इको टूरिज्म स्थलों का चयन और इको टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रावधान किए जाएंगे।
टूरिज्म पॉलिसी पर इन पर जोर :
- निजी निवेश: निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए सब्सिडी दी जाएगी।
- होटल एवं रिसॉर्ट: पर्यटकों के ठहरने के लिए आधुनिक सुविधाएं दी जाएंगी।
- इको-टूरिज्म: पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन स्थलों का विकास किया जाएगा।
- डवेंचर स्पोर्ट्स: साहसिक खेलों के जरिए युवाओं को आकर्षित किया जाएगा।
- रोजगार: स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देना और बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करना।
- वेलनेस सेंटर: प्राकृतिक चिकित्सा और स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा दिया जाएगा।
- लेजर: भागदौड़ से दूर शांति और आराम के लिए छुट्टियां बिताना, जैसे गंगरेल बांध (धमतरी), लग्जरी रिसॉर्ट और नेचर कैंप।
इस तरह के पर्यटन स्थलों को मिलेगा बढ़ावा :
- धार्मिक: मंदिरों और आध्यात्मिक केंद्रों के दर्शन जैसे दंतेवाड़ा (दंतेश्वरी मंदिर), डोंगरगढ़ (बम्लेश्वरी देवी), राजिम कुंभ।
- इको: प्रकृति के बीच समय बिताना और वन्यजीवों को देखना जैसे चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान।
- एथनिक: आदिवासी जीवनशैली, पारंपरिक कला और भोजन का अनुभव जैसे बस्तर का माई मेला, हस्तशिल्प, चापड़ा चटनी।
- एडवेंचर: रोमांचक खेल और साहसिक गतिविधियां जैसे चित्रकोट में राफ्टिंग, सरगुजा में वाटर स्पोर्ट्स, मैनपाट में पैराग्लाइडिंग।
- हेरिटेज: प्राचीन किले, स्मारक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण जैसे सिरपुर के प्राचीन मंदिर, भोरमदेव, जगदलपुर का राजमहल।
ये है मोटल की स्थिति :
मितान मोटल,कोड़ातराई रायगढ़ - साल 2023 से लीज पर
मितान मोटल,चढ़िरमा सरगुजा - साल 2024 से लीज पर
मितान मोटल, सरगांव मुंगेली - साल 2024 से लीज पर
मितान मोटल कुड़ीपोटा,जांजगीर चांपा - साल 2023 से लीज पर
मितान मोटल,खपरी दुर्ग - साल 2023 से लीज पर
मितान मोटल,भाटागांव,धमतरी - साल 2023 से लीज पर
मितान मोटल, केंद्री, रायपुर - साल 2023 से लीज पर
मितान मोटल,तूमड़ीबोढ़ राजनांदगांव - साल 2023 से लीज पर
मितान मोटल,मानातूता रायपुर - साल 2023 से लीज पर
मितान मोटल,तीरथगढ़ बस्तर - साल 2023 से लीज पर
मितान मोटल,कोनकोना,कोरबा - साल 2023 से लीज पर
मितान मोटल,चिरगुढ़ा कोरिया - साल 2023 से लीज पर
मितान मोटल,कोंडागांव - साल 2024 से लीज पर
मितान मोटल,हारम,दंतेवाड़ा - साल 2023 से लीज पर
मितान मोटल,कवर्धा - लीज की प्रक्रियाधीन
Sootr Knowledge :
छत्तीसगढ़ में पर्यटन की बहुत संभावनाएं :
छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यहां पर 44 फीसदी क्षेत्र में जंगल है जो लोगों को शांति का अहसास कराता है। यहां तक कि छत्तीसगढ़ के एक गांव को यूनेस्को ने अपनी सूची में स्थान दिया है। यहां पर प्राकृतिक सौंदर्य के साथ साथ पौराणिक इतिहास भी है। यहां पर भगवान राम ने अपने वन गमन के दौरान सबसे ज्यादा समय गुजारा था।
यहां की संस्कृति हमेशा लोगों को आकर्षित करती रही है। यहां पर भगवान राम का ननिहाल भी है। इन सबसे विशेषताओं के बाद भी पर्यटन की दृष्टि से छत्तीसगढ़ को वो दर्जा नहीं मिल पाया है जिसका वो हकदार है। सरकार ने आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए पर्यटन का सहारा लिया है। छत्तीसगढ़ के पर्यटन को दुनिया के नक्शे पर लाने के लिए सरकार बहुत कोशिश कर रही है। सरकार को लगता है कि पर्यटन ही है जो उसकी आर्थिक स्थिति सुधार सकता है।
Importent Points :
.टूरिज्म की नई पॉलिसी में पीपीपी मॉडल पर जोर
. पीपीपी मॉडल पर विकसित और संचालित किए जाएंगे पर्यटन स्थल
. सरकार की माली हालत ठीक नहीं
. पयर्टन स्थल के 15 मोटल जा चुके हैं निजी हाथों में
. बस्तर के टूरिज्म पर अब खास फोकस
अब आगे क्या :
सरकार छत्तीसगढ़ को पर्यटन का मुख्य केंद्र बनाना चाहती है। छत्तीसगढ़ को देश ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय नक्शे पर उभारना चाहती है। सरकार नई टूरिज्म पॉलिसी इसीलिए तैयार कर रही है। पर्यटकों को लुभाने के लिए पयर्टन स्थलों पर बेहतर सुविधाएं हों इसीलिए नई नीति बनाई जा रही है। सरकार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है इसलिए इस नई नीति में प्रायवेट पब्लिक पार्टनशिप मॉडल को अपनाने पर विचार किया जा रहा है। नई नीति नए वित्तीय वर्ष में लागू होगी। इससे पहले सरकार नई उद्योग नीति बना चुकी है।
निष्कर्ष :
टूरिज्म बोर्ड खुद अपनी मोटल का संचालन नहीं कर पा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण उसके घाटे में होना है। छत्तीसगढ़ के पर्यटन को पंख देने के लिए सबसे पहले टूरिज्म बोर्ड को घाटे से उबारना होगा। निजी क्षेत्र की भागीदारी की बजाय यदि सरकार इन मोटल का संचालन करेगी तो उसे ज्यादा फायदा होगा। नई पॉलिसी में पीपीपी मॉडल से पर्यटन स्थल भी आगे चलकर निजी हाथों में जा सकते हैं।
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