भोपाल में 90 डिग्री ब्रिज के बाद दिखा एक और अजूबा, हाईटेंशन पोल के नीचे से निकली सड़क

भोपाल के करोंद इलाके में एक हाईटेंशन पोल के नीचे सड़क बनाई गई है। यह सड़क एफिल टॉवर जैसी दिखती है। इस सड़क के नीचे से कार और मोटरसाइकिल भी निकलते हैं। इस कारण से हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आने का खतरा बढ़ गया है।

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Aman Vaishnav
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News In Short

  • करोंद में हाईटेंशन पोल के नीचे सड़क बनाई गई है।

  • एफिल टॉवर जैसी दिखने वाली इस सड़क से बड़ा खतरा है।

  • पोल के नीचे से गाड़ियां और मोटरसाइकिल गुजरती हैं।

  • बारिश के दौरान करंट फैलने का डर बना रहता है।

  • बिजली कंपनी पोल को शिफ्ट करने की कोशिश कर रही है।

News In Detail

भोपाल से एक और अजीबो-गरीब मामला सामने आया है। पहले 90 डिग्री ऐशबाग ब्रिज और ठिगने मेट्रो स्टेशन के बाद अब हाईटेंशन लाइन के पोल के नीचे से सड़क निकाल दी गई। ये सड़क बिल्कुल एफिल टॉवर की तरह नजर आ रही है। इस सड़क का मामला अब बहुत सुर्खियों में है।

सड़क के नीचे हाईटेंशन पोल

करोंद की विनायक कॉलोनी में कई सालों से एक हाईटेंशन पोल खड़ा है जो एफिल टॉवर जैसा दिखता है। हैरानी की बात ये है कि इसके नीचे से सड़क भी बनाई गई है। लोग पैदल तो चलते ही हैं, साथ ही अपनी कार और मोटरसाइकिल से भी आते-जाते हैं। ऐसे में हाईटेंशन लाइन के संपर्क में आने का खतरा हमेशा बना रहता है।

आवादी बढ़ने से बढ़ा खतरा

स्थानीय निवासी महेंद्र सिंह राजपूत का कहना है कि ये पोल उनके वार्ड में ही है। पहले यहां आसपास कोई रहने वाला इलाका नहीं था। अब धीरे-धीरे लोग बसने लगे हैं। अब यहां अच्छी आबादी रहती है। इससे खतरा बढ़ गया है।

बारिश में करंट का डर

रहवासियों का कहना है कि टावर के नीचे से बड़ी गाड़ियां नहीं निकल पातीं। इसके अलावा बारिश के दौरान करंट फैलने का खतरा रहता है। सरकार को हाईटेंशन लाइन और टावर के बारे में ध्यान देना चाहिए। दोनों को कहीं और शिफ्ट किया जाना चाहिए।

वहीं बिजली कंपनी भी इस टावर को कहीं और शिफ्ट करने की कोशिश कर रही है। इस बारे में कई बार बातचीत हो चुकी है। अब तक ये टावर और हाईटेंशन लाइन नहीं हट पाए हैं। सोशल मीडिया पर इसका मुद्दा सामने आने के बाद यह टावर फिर से चर्चा में आ गया है।

जानें 90 डिग्री ब्रिज की कहानी...

भोपाल का 90 डिग्री ब्रिज एक बहुत ही विवादित रेलवे ओवरब्रिज है। ये ब्रिज शहर के ऐशबाग इलाके में स्थित है। यह पुल लगभग 18 करोड़ रुपए की लागत से बना है। इसका आकार लगभग 648 मीटर लंबा है। इस पुल को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसका खतरनाक 90 डिग्री का मोड़ है। इसे स्टैच्यू ऑफ कन्फ्यूजन और इंजीनियरिंग की बड़ी गलती माना जा रहा है। 

सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद डिजाइन में गड़बड़ियों के कारण 7-8 इंजीनियरों को निलंबित कर दिया गया था। जांच के बाद निर्माण कंपनी को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था।

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