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BHOPAL.मध्यप्रदेश पीडब्ल्यूडी के रिटायर्ड इंजीनियर इन चीफ जीपी मेहरा का नाम हाल ही में चर्चा में है। लोकायुक्त के छापों के बाद जो खुलासा हुआ, उसने महकमे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। सोहागपुर स्थित उनके कस्तूरी फार्म हाउस पर छापे के दौरान एक बड़ी अनियमितता सामने आई है।
जांच फार्म हाउस में सरकार के खर्च पर सड़क बनाने की जानकारी मिली है। इस मामले में तत्कालीन पीडब्ल्यूडी के ईई संजय रायकवार, एसडीओ दीपक पाठक और सब इंजीनियर आरपी शर्मा को सस्पेंड किया गया था।
नए चौंकाने वाले खुलासे
हालांकि, इस कार्रवाई के बावजूद फार्म हाउस में एक नई 164 मीटर लंबी डामर सड़क बनाई गई थी। यह सड़क पहले से बनी सीमेंटेड सड़क से जुड़ी थी, जो सरकारी सड़क से संबंधित थी।
यह सड़क फार्म हाउस की निजी जमीन पर बनाई गई है। सरकारी रिकॉर्ड में इसका कोई जिक्र नहीं है। न तो पीडब्ल्यूडी ने इसे अपने नाम किया और न ही यह राजस्व रिकॉर्ड में है।
सड़क निर्माण के लिए मंजूरी, लेकिन बदलाव हुआ
2022-23 के पीडब्ल्यूडी प्रस्ताव के तहत सड़क का निर्माण फार्म हाउस के बाहर बाउंड्रीवाल के पास होना था। इसके बावजूद, योजना बदलकर सड़क फार्म हाउस के अंदर ही बना दी गई थी।
इसके बाद अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी। अब उसी सड़क को और बढ़ाकर नई डामर सड़क बना दी गई है। इससे यह मामला और भी पेचीदा हो गया है।
बड़े सड़क प्रोजेक्ट से जुड़ा है मामला
यह मामला एक बड़े सड़क प्रोजेक्ट से जुड़ा हुआ है। पीडब्ल्यूडी ने न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के तहत सेमरी हरचंद से गजनई पुल तक 29.80 किमी सड़क निर्माण की योजना को मंजूरी दी थी। इसकी शुरुआती लागत 139.47 करोड़ रुपए थी।
बाद में, इस योजना में 1305 मीटर सड़कें जोड़ दी गईं थी। इससे कुल लागत 156.89 करोड़ रुपए हो गई थी। इन अतिरिक्त सड़कों में कस्तूरी फार्म हाउस तक पहुंचने वाली सड़क भी शामिल थी।
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विभाग की ओर से बयान
सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर और ईई (Executive Engineer) इस मामले में अपने-अपने तर्क दे रहे हैं। सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर योगेंद्र कुमार का कहना है कि यह सड़क पहले से स्वीकृत प्रोजेक्ट का अधूरा हिस्सा था।
अब उसे पूरा किया गया है। वहीं कार्यपालन यंत्री (Executive Engineer) अनुराग सिंह ने कहा कि फार्म हाउस के अंदर सड़क पीडब्ल्यूडी ने नहीं बनाई।
सड़क निर्माण नियम क्या कहता है?
सड़क निर्माण के नियम के अनुसार, किसी भी सड़क में रोड कहां से निकलेगी, उस जगह का एक नक्शा और बकाया जानकारी होती है। यदि सड़क किसी की निजी भूमि से गुजरती है, तो उसका भू अर्जन लिया जाता है। इन सब बातों के बाद ही सरकार से स्वीकृति मिलती है। वहीं, जीपी मेहरा के फार्महाउस तक बनी सड़क में बड़े अफसरों ने नियमों और नक्शों को क्यों नहीं देखा। यह एक बड़ा सवाल है।
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