हाईकोर्ट पार्किंग प्रोजेक्ट पर बड़ा खुलासा: देरी की जड़ फाइनेंस नहीं, बल्कि PWD-लॉ डिपार्टमेंट

जबलपुर हाईकोर्ट में 116 करोड़ रुपए की पार्किंग परियोजना पर खुलासा हुआ। 5 फरवरी की सुनवाई में देरी का दोष फाइनेंस डिपार्टमेंट पर डाला गया। असली वजह PWD और लॉ डिपार्टमेंट की लापरवाही रही।

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Neel Tiwari
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News in short

  • 116 करोड़ की पार्किंग-लॉयर्स चैंबर परियोजना अब तक कागजों में अटकी।
  • फाइनेंस डिपार्टमेंट को मांगे गए स्पष्टीकरण भेजे ही नहीं गए।
  • 5 फरवरी की सुनवाई में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने किया खुलासा।
  • 18 फरवरी के बजट से पहले प्रपोजल आने पर फंड में दिक्कत नहीं।
  • अगली सुनवाई 24 फरवरी 2026 को तय की गई है।

News in Detail

जबलपुर हाईकोर्ट के सामने 116 करोड़ रुपए की मल्टीलेवल पार्किंग और लॉयर्स चैंबर परियोजना पर बड़ा खुलासा हुआ। 5 फरवरी की सुनवाई में पता चला कि देरी का दोष फाइनेंस डिपार्टमेंट पर डाला जा रहा था। असली वजह PWD और लॉ डिपार्टमेंट की लापरवाही रही। हाईकोर्ट ने जल्द कार्रवाई और रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।

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क्या है पूरा मामला

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के सामने मल्टीलेवल पार्किंग और लॉयर्स चैंबर परियोजना का भूमिपूजन 4 मई को हुआ था। छह महीने बाद भी निर्माण शुरू नहीं हुआ। इस पर जनहित याचिका दायर की गई। यह याचिका मध्य प्रदेश हाई कोर्ट बार एसोसिएशन और अध्यक्ष डीके जैन ने दायर की। अधिवक्ता सुरेंद्र वर्मा की याचिका की सुनवाई भी इसी मामले में हो रही है। 27 नवंबर की सुनवाई में चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ ने फाइनेंस डिपार्टमेंट पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने पूछा था, छह महीने में फाइल क्यों नहीं बढ़ी?

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फाइनेंस पर आरोप, लेकिन हकीकत कुछ और

अब तक सरकार ने कोर्ट को बताया था कि फाइनेंस डिपार्टमेंट ने प्रोजेक्ट में स्पष्टीकरण मांगा था। इससे यह लगा कि प्रोजेक्ट फाइनेंस डिपार्टमेंट में अटका हुआ है। 5 फरवरी की सुनवाई में फाइनेंस डिपार्टमेंट के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनीष रस्तोगी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश होकर बताया। उन्होंने कहा कि दिसंबर में पिछली मीटिंग हुई थी। इसमें फाइनेंस डिपार्टमेंट ने कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा था, जो अब तक भेजा नहीं गया।

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PWD और लॉ डिपार्टमेंट की भूमिका पर सवाल

एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने कोर्ट को बताया कि इस प्रोजेक्ट की प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट (PWD) है। प्रोजेक्ट अथॉरिटी लॉ डिपार्टमेंट है। स्पष्टीकरण भेजने की जिम्मेदारी इन दोनों विभागों की थी। महीनों बाद भी फाइनेंस डिपार्टमेंट को स्पष्टीकरण के साथ पूरा प्रपोजल नहीं भेजा गया।

हाईकोर्ट की हैरानी और सख्त रुख

हाईकोर्ट ने इस पर हैरानी जताई कि देरी का कारण फाइनेंस डिपार्टमेंट को बताया गया। असल में जरूरी स्पष्टीकरण उन्हें नहीं भेजे गए। कोर्ट ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही माना। कोर्ट ने कहा कि जनता और वकीलों को इसकी कीमत नहीं चुकानी चाहिए।

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फंड पर नहीं होगी अड़चन

एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनीष रस्तोगी ने कोर्ट को बताया कि 18 फरवरी को मध्य प्रदेश का बजट पेश होगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रपोजल फाइनेंस डिपार्टमेंट को मिल जाता है, तो बजट आवंटन में कोई समस्या नहीं होगी। मनीष रस्तोगी ने मौखिक तौर पर यह भी आश्वासन दिया कि प्रोजेक्ट पर कोई आपत्ति नहीं है, केवल स्पष्टीकरण की औपचारिकता बाकी है।

अब जल्द भेजा जाएगा फाइनेंस डिपार्टमेंट को

शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि स्पष्टीकरण और प्रपोजल जल्द फाइनेंस डिपार्टमेंट को भेज दिए जाएंगे। इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी आवश्यक कदम तुरंत उठाए जाएं। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई में विस्तृत रिपोर्ट पेश की जाए।

एक साल और झेलना पड़ता जाम

कोर्ट की सुनवाई में यह साफ हुआ कि जनहित याचिका नहीं होती, तो नागरिकों और वकीलों को एक साल और समस्या झेलनी पड़ती। हाईकोर्ट ने रोजाना ट्रैफिक जाम की चिंता जताई थी। याचिकाकर्ता और बार एसोसिएशन ने पहले ही चिंता व्यक्त की थी। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 24 फरवरी 2026 को तय की है। 18 जनवरी को पेश होने वाले मध्य प्रदेश के बजट 2026 में पार्किंग प्रोजेक्ट के लिए बजट आवंटित होने की उम्मीद है।

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