/sootr/media/media_files/2026/01/21/radheshyam-mandloi-suspended-for-not-responding-to-high-court-on-time-2026-01-21-23-49-14.jpeg)
Photograph: (the sootr)
NEWS IN SHORT
- जबलपुर हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना पर संयुक्त संचालक राधेश्याम मण्डलोई निलंबित।
- रिट याचिका क्रमांक 23618/2025 में समय पर जवाबदावा पेश नहीं किया गया।
- हाईकोर्ट ने 15 जनवरी 2026 को जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।
- नगरीय विकास आयुक्त ने इसे घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता बताया।
- मामले की अगली सुनवाई 16 फरवरी 2026 को संभावित।
INTRO
मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने हाईकोर्ट के आदेशों की अनदेखी को गंभीरता से लेते हुए बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। जबलपुर हाईकोर्ट में समय पर जवाब पेश न करने के मामले में नर्मदापुरम संभाग के संयुक्त संचालक को निलंबित कर दिया गया। नगरीय विकास एवं आवास विभाग आयुक्त संकेत भोंडवे ने संयुक्त संचालक राधेश्याम मण्डलोई को निलंबित किए जाने के आदेश जारी किए हैं।
News in detail
मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने नर्मदापुरम संभाग के संयुक्त संचालक राधेश्याम मण्डलोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा दिए गए स्पष्ट निर्देशों का पालन न करने और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने के आधार पर की गई है। हालांकि, हाईकोर्ट में अवमानना को लेकर कोई आदेश जारी नहीं किया गया, लेकिन शासन स्तर पर इसे न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में माना है।
रिट याचिका से जुड़ा पूरा मामला
जबलपुर हाईकोर्ट में विचाराधीन रिट याचिका क्रमांक 23618/2025 (दुर्गा सिंह चंदेल बनाम मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य) में विभाग की ओर से संयुक्त संचालक राधेश्याम मण्डलोई को प्रभारी अधिकारी (OIC) नियुक्त किया गया था। प्रकरण में विभाग को अपना आधिकारिक जवाबदावा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना अनिवार्य था।
यह खबरें भी पढ़ें...
पाक हैंडलर हमजा तक OTP पहुंचाने वाला आरोपी फिर HC की शरण में, 3 बार जमानत खारिज
पोस्टिंग के 22 दिन बाद ही बदल गए असिस्टेंट प्रोफेसरों के कॉलेज
हाईकोर्ट ने दिया स्पष्ट आदेश
दिनांक 15 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को अवगत कराया था कि विभागीय जवाब शीघ्र प्रस्तुत कर दिया जाएगा। इसके बाद जस्टिस विशाल धगत द्वारा निर्देश दिए गए थे कि जवाब की प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को उपलब्ध कराई जाए। प्रकरण को 16 फरवरी 2026 से प्रारंभ होने वाले सप्ताह में सूचीबद्ध किया जाए।
समयसीमा में जवाब न देना पड़ा भारी
आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास, संकेत भोंडवे के अनुसार, निर्धारित समय-सीमा के भीतर जवाबदावा प्रस्तुत नहीं किया गया। इसे विभाग ने उच्च न्यायालय के आदेशों की सीधी अवहेलना, कर्तव्यहीनता और प्रशासनिक अनुशासन के विपरीत आचरण माना। इसी आधार पर निलंबन की अनुशंसित कार्रवाई को अमल में लाया गया।
निलंबन आदेश और विभागीय रुख
निलंबन आदेश के तहत राधेश्याम मण्डलोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास निर्धारित किया गया है। आयुक्त संकेत भोंडवे ने स्पष्ट कहा कि शासकीय दायित्वों के निर्वहन में ऐसी लापरवाही किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।
कोर्ट में स्थिति और अगली सुनवाई
हालांकि जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच के समक्ष हुई सुनवाई में जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा गया था, जिसके बाद मामले की सुनवाई 16 फरवरी 2026 तक के लिए तय की गई। इसके बावजूद समय रहते जवाब दाखिल न होने के कारण यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई। अब अगली सुनवाई में विभाग को जवाब पेश करने के साथ याचिकाकर्ता को प्रत्युत्तर (Rejoinder) का अवसर भी देना होगा।
यह खबरें भी पढ़ें...
एमपी में मंत्रियों और अफसरों के फिजूल खर्च पर 31 मार्च तक लगाम
विजय शाह केस पर इंदौर एमपी-एमएलए कोर्ट में हो सकती है सुनवाई, सीएम के दावोस से लौटने पर होगा फैसला!
प्रशासनिक सख्ती का संदेश
इस कार्रवाई को शासन द्वारा प्रशासनिक कसावट और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में न्यायालयीय आदेशों की अनदेखी या शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर और भी कड़ी नजर रखी जाएगी।
उच्च न्यायालय आदेश
/sootr/media/agency_attachments/dJb27ZM6lvzNPboAXq48.png)
Follow Us