पाक हैंडलर हमजा तक OTP पहुंचाने वाला आरोपी फिर HC की शरण में, 3 बार जमानत खारिज

पाक हैंडलर हमजा को सिम और OTP भेजने वाले आरोपी परवेज ने चौथी बार हाईकोर्ट में जमानत की गुहार लगाई है। देश की सुरक्षा से खिलवाड़ का है मामला।

author-image
Neel Tiwari
New Update
The accused who sent OTP to Pak handler Hamza is again in the custody of HC

Photograph: (the sootr)

Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

NEWS IN SHORT

  • सेना की गोपनीय जानकारियां पाकिस्तान भेजने का गंभीर मामला।
  • आरोपी परवेज पर पाक हैंडलर ‘हमजा’ को सिम और OTP देने का आरोप।
  • NIA कोर्ट और हाईकोर्ट से अब तक तीन बार जमानत खारिज।
  • UAPA और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट जैसी सख्त धाराएं लागू।
  • चौथी याचिका अब क्रिमिनल रिवीजन अपील के रूप में सुनी जाएगी।

NEWS IN DETAIL

JABALPUR. भारतीय सेना की बेहद संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान तक पहुंचाने के गंभीर आरोपों में जेल में बंद आरोपी मोहम्मद परवेज ने एक बार फिर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इससे पहले उसकी जमानत याचिकाएं विशेष एनआईए कोर्ट और हाईकोर्ट में तीन बार खारिज हो चुकी हैं। अब चौथी कोशिश में याचिका को क्रिमिनल रिवीजन अपील में परिवर्तित कर सुनवाई की जाएगी।

यह भी पढ़ें..

भोपाल स्लॉटर हाउस टेंडर में खेल? रिजेक्टेड बिड से वर्क ऑर्डर तक उठे गंभीर सवाल

फिर हाईकोर्ट की शरण में आरोपी परवेज

भोपाल के विशेष एनआईए कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद आरोपी मोहम्मद परवेज ने एक बार फिर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में गुहार लगाई है। इससे पहले भी वह तीन बार हाईकोर्ट पहुंच चुका है, लेकिन हर बार उसे कोई राहत नहीं मिली। अदालतों ने स्पष्ट रूप से माना कि परवेज की भूमिका सह-अभियुक्तों की तुलना में कहीं अधिक गंभीर और राष्ट्र की सुरक्षा से सीधे जुड़ी हुई है।

2019 से शुरू हुआ जासूसी नेटवर्क का खुलासा

मामले की जड़ें 16 मई 2019 से जुड़ी हुई हैं, जब एसटीएफ को सूचना मिली कि महू स्थित सेना मुख्यालय में तैनात नायक क्लर्क अविनाश कुमार पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में है। जांच में सामने आया कि अविनाश कुमार ‘प्रिशा अग्रवाल’ नाम की फर्जी सोशल मीडिया आईडी के जरिए सेना के गोपनीय दस्तावेज पाकिस्तान भेज रहा था।

यह भी पढ़ें..

एमपी हाईकोर्ट विवाद: सीनियर एडवोकेट रामेश्वर ठाकुर पर आरोपों के बीच बढ़ी हलचल

मोहम्मद परवेज: जासूसी नेटवर्क की डिजिटल कड़ी

विवेचना के दौरान मोहम्मद परवेज की भूमिका सामने आई, जिसे जांच एजेंसियों ने जासूसी नेटवर्क का ‘डिजिटल पुल’ बताया। परवेज दिल्ली में वीजा एजेंट के रूप में काम करता था और उसने धोखाधड़ी से सिम कार्ड हासिल कर पाकिस्तानी हैंडलर्स को भारत में डिजिटल एक्सेस उपलब्ध कराया।

फर्जी सिम, OTP और पाक हैंडलर ‘हमजा’

जांच में खुलासा हुआ कि परवेज ने नफीस नामक व्यक्ति के पासपोर्ट और फोटो का दुरुपयोग कर उसके नाम पर सिम कार्ड खरीदे। इन सिम कार्डों के नंबर और OTP उसने पाकिस्तान में बैठे हैंडलर ‘हमजा’ को भेजे, जिससे पाकिस्तानी एजेंसियों को भारत के भीतर संचार और सोशल मीडिया तक सीधी पहुंच मिल गई।

यह भी पढ़ें..

गुटखा किंग किशोर वाधवानी ईडी से बचने हाईकोर्ट में, अंतिम फैसले पर रोक लेकिन कार्रवाई पर नहीं

सेना अधिकारियों को ब्लैकमेल करने का आरोप

मामले में यह भी सामने आया कि इन्हीं सिम कार्डों का इस्तेमाल कर दिल्ली में तैनात आर्मी ऑफिसर कर्नल सीमा सिंह को आपत्तिजनक संदेश भेजे गए। आरोप है कि उन्हें ब्लैकमेल कर सेना से जुड़ी खुफिया जानकारियां हासिल करने का प्रयास किया गया।

पाकिस्तान से पारिवारिक संबंध और संदिग्ध यात्राएं

जांच एजेंसियों के अनुसार, मोहम्मद परवेज की बहनें पाकिस्तान के कराची में रहती हैं। उसका पाकिस्तान आना-जाना रहा है और आरोप है कि 2014 की पाकिस्तान यात्रा के दौरान ही वह हैंडलर ‘हमजा’ के संपर्क में आया और बाद में पैसों के लालच में देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो गया।

इसके बाद आरोपी के खिलाफ IPC की धारा 123, 120B, 419, 467, 468, 471 एवं ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 की धारा 3, 4, 5, 9 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

NIA कोर्ट में भी नहीं चली थीं बचाव की दलीलें

विशेष एनआईए कोर्ट में आरोपी के वकील ने तर्क दिया था कि परवेज लंबे समय से जेल में है और केवल संदेह के आधार पर उसे फंसाया गया है। साथ ही ‘समानता’ के आधार पर जमानत मांगी गई क्योंकि सह-अभियुक्त इरफान बेग और मुख्य आरोपी अविनाश कुमार को जमानत मिल चुकी है। वहीं, विशेष लोक अभियोजक विक्रम सिंह ने कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि परवेज के पास से जब्त मोबाइल और डिजिटल साक्ष्य सीधे पाकिस्तानी हैंडलर्स से संपर्क की पुष्टि करते हैं।

“देश की सुरक्षा सर्वोपरि”

NIA कोर्ट में विशेष न्यायाधीश रघुवीर प्रसाद पटेल ने अपने आदेश में साफ कहा था कि परवेज को समानता का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने माना था कि आरोपी के खिलाफ UAPA और ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट जैसी गंभीर धाराओं के तहत प्रथम दृष्टया पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और मामला राष्ट्र की सुरक्षा से जुड़ा है। इसी आधार पर धारा 439 दं.प्र.सं. के तहत जमानत अर्जी खारिज कर दी गई थी।

यह भी पढ़ें..

विवादों के बाद आदित्य सिंह को हटाया, बने संचालक भोपाल गैस त्रासदी

चौथी कोशिश, अब क्रिमिनल रिवीजन अपील

मोहम्मद परवेज की यह चौथी कोशिश है। इससे पहले उसकी तीन जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं-दो बार कोर्ट के रुख को देखते हुए याचिकाएं वापस ली गईं और एक बार कोई अधिवक्ता पेश नहीं हुआ। अब ताजा याचिका को क्रिमिनल रिवीजन अपील में परिवर्तित कर सुनवाई की जाएगी, जिस पर हाईकोर्ट का फैसला अभी आना बाकी है।

भारत मध्य प्रदेश हाईकोर्ट भारतीय सेना पाकिस्तान सोशल मीडिया धोखाधड़ी
Advertisment