भोपाल स्लॉटर हाउस टेंडर में खेल? रिजेक्टेड बिड से वर्क ऑर्डर तक उठे गंभीर सवाल

भोपाल नगर निगम के स्लॉटर हाउस टेंडर में अनियमितताओं के आरोप, कांग्रेस प्रवक्ता ने EOW से शिकायत दर्ज करवाई। रिजेक्टेड बिड को वर्क ऑर्डर कैसे दिया गया?

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Ramanand Tiwari
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Game in Bhopal Slaughter House Tender Serious questions raised from rejected bid to work order

Photograph: (the sootr)

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NEWS IN SHORT

  • भोपाल नगर निगम का स्लॉटर हाउस टेंडर विवादों में घिरा, कांग्रेस ने EOW में शिकायत की।
  • शिकायत में आरोप है कि कुछ फर्मों को अस्वीकृत करने के बावजूद कार्य आदेश जारी किया गया।
  • कांग्रेस ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए तुरंत जांच की मांग की।
  • शिकायत में कहा गया है कि ऑनलाइन टेंडर रिकॉर्ड और गतिविधियाँ जांची जाएं।
  • EOW से दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और टेंडर प्रक्रिया की गहन जांच की मांग की गई। 

NEWS IN DETAIL

BHOPAL.भोपाल नगर निगम द्वारा जारी स्लॉटर हाउस टेंडर एक बार फिर विवादों में घिर गया है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया ने इस पूरी निविदा प्रक्रिया को संदिग्ध बताते हुए आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) से औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

निविदा प्रक्रिया पर सीधा सवाल

शिकायत में कहा गया है कि नगर निगम अधिकारियों ने पहले टेंडर की तकनीकी जांच पूरी की। इसके बाद फाइनेंशियल बिड खोली गई। ऑनलाइन सिस्टम में तीनों फर्मों को प्रथम दृष्टया “रिजेक्टेड” दर्शाया गया, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए।

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रिजेक्टेड दिखी बिड, फिर कैसे आगे बढ़ा टेंडर?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन फर्मों को मूल्यांकन के दौरान अस्वीकार बताया गया, उन्हीं में से एक फर्म को बाद में कार्य आदेश जारी कर दिया गया। इतना ही नहीं, उस फर्म से विधिवत अनुबंध भी कर लिया गया।

आनन-फानन में किसे पहुंचाया गया लाभ?

मामले में आरोप है कि पूरी प्रक्रिया को जल्दबाजी में आगे बढ़ाया गया। उद्देश्य किसी विशेष व्यक्ति या संस्था को फायदा पहुंचाना था। यदि टेंडर फाइनेंशियल स्टेज पर ही अस्वीकृत था, तो उसे अंतिम रूप देने का आधार क्या था, यह अब भी स्पष्ट नहीं है।

इस पूरे मामले पर कांग्रेस प्रवक्ता अभिनव बारोलिया ने कहा कि जब ऑनलाइन पोर्टल पर टेंडर को रिजेक्टेड दिखाया गया था, तो उसके बाद वर्क ऑर्डर और अनुबंध कैसे किया गया? यह साफ तौर पर अधिकारियों की मिलीभगत और गंभीर वित्तीय अनियमितता की ओर इशारा करता है। इस मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

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प्रशासनिक पारदर्शिता पर असर

कांग्रेस का कहना है कि इस तरह के मामलों से न सिर्फ सरकारी सिस्टम की विश्वसनीयता प्रभावित होती है, बल्कि सामाजिक और प्रशासनिक संतुलन भी बिगड़ता है। समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति हो सकती है।

EOW से की गई गहन जांच की मांग

अभिनव बारोलिया ने महानिदेशक, EOW भोपाल को शिकायत भेजकर पूरे टेंडर प्रकरण की विस्तृत जांच की मांग की है। उन्होंने दोषी अधिकारियों और संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई का आग्रह किया है।

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ऑनलाइन दस्तावेज भी जांच के दायरे में

शिकायत में यह भी कहा गया है कि ऑनलाइन जारी निविदा से जुड़े सभी रिकॉर्ड, गतिविधियां और स्टेटस हिस्ट्री की जांच की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नियमों का उल्लंघन कहां और किस स्तर पर हुआ।

कब दर्ज हुई शिकायत?

यह शिकायत 21 जनवरी 2026 को दर्ज कराई गई है। अब सबकी निगाहें EOW पर टिकी हैं कि जांच कब शुरू होती है और इस टेंडर विवाद में आगे क्या खुलासे होते हैं। 

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भोपाल नगर निगम आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो EOW वर्क ऑर्डर स्लॉटर हाउस
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