सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकार का आश्वासन, अरावली क्षेत्र में नहीं होने देंगे खनन गतिविधियां

Ashish Bhardwaj | Jan 21, 2026, 20:18 IST
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Supreme-Court
Photograph: (the sootr)

अरावली पहाड़ियों पर आई नई सरकारी परिभाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। राजस्थान सरकार ने शीर्ष कोर्ट को आश्वासन दिया है कि अरावली क्षेत्र में खनन की अनुमति नहीं दी जाएगी।

News In Short

  • अरावली पहाड़ियों पर आई नई परिभाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
  • राजस्थान सरकार ने आश्वस्त किया कि नहीं देंगे खनन गतिविधियों की अनुमति
  • शीर्ष कोर्ट ने पहले से पारित रोक संबंधी अंतरिम आदेश को रखा जारी
  • पिछले निर्देशों में अरावली की नई सरकारी परिभाषा पर लगा दी थी रोक
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अरावली क्षेत्र में अवैध खनन को रोकना होगा

News In Detail

Jaipur: राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया है कि अरावली क्षेत्र में किसी भी खनन गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच ने अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा पर लिए गए स्वतः संज्ञान मामले में पहले से पारित अंतरिम आदेश को जारी रखा। शीर्ष कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की बदली हुई परिभाषा पर पिछले निर्देशों को रोक दिया था।

तय करें कि अवैध खनन न हो

चीफ जस्टिस ने कहा कि अरावली क्षेत्र में अवैध गतिविधियां जारी हैं। ऐसे में अवैध खनन के अपरिवर्तनीय परिणाम हो सकते हैं। राजस्थान सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि राज्य यह सुनिश्चित करेगा कि कोई अवैध खनन न हो। कोर्ट ने विशेष रूप से राजस्थान से यह सुनिश्चित करने को कहा कि अरावली क्षेत्र में कोई खनन गतिविधि न हो, यह आश्वासन बेंच द्वारा रिकॉर्ड किया गया।

हस्तक्षेप याचिकाओं पर होगा विचार

शीर्ष कोर्ट ने दानिश जुबैर खान द्वारा दायर और सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल द्वारा तर्क दी गई एक हस्तक्षेप याचिका को अनुमति दी है। इसमें एडवोकेट जॉर्ज पोथन पूथिकोते और मनीषा सिंह ने मदद की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अन्य सभी हस्तक्षेप याचिकाओं की जांच एमिक्स क्यूरी, सीनियर एडवोकेट के. परमेश्वर द्वारा की जाएगी। साथ्स ही उन पर गैर-विरोधात्मक तरीके से विचार किया जाएगा। राजस्थान के कुछ किसानों की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट राजू रामचंद्रन ने कहा कि कुछ नए खनन पट्टे दिए गए हैं, जिन्हें रोका जाना चाहिए।

अवैध गतिविधियां से सख्ती से निपटेंगे

चीफ जस्टिस ने कहा कि अवैध गतिविधियों से सख्ती से निपटा जाएगा। आप हमें अवैध गतिविधियों पर सूचित करेंगे तो हम कदम उठाएंगे। अवैध खनन को रोकना होगा। यह प्रथम दृष्टया अपराध है। इसके लिए सज़ा मिलेगी। लेकिन, आप नई रिट याचिकाएं दायर न करें। यह मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाता है।

सिब्बल ने कहा, पहाड़ों को परिभाषित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, क्या आप हिमालय को परिभाषित कर सकते हैं? अरावली को? वहां सबटेक्टोनिक परत है जो बदलती रहती हैं। हमें आधे घंटे की प्रारंभिक सुनवाई की ज़रूरत है। अगर अरावली को परिभाषित किया जाता है, तो यह एक समस्या की शुरुआत होगी।

पर्यावरणविदों के नाम सुझाने के निर्देश

बेंच ने संकेत दिया कि वह एक एक्सपर्ट बॉडी बनाएगी। एएसजी ऐश्वर्या भाटी (केंद्र सरकार के लिए) और एमिक्स क्यूरी को माइनिंग और संबंधित क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले पर्यावरणविदों और वैज्ञानिकों के नाम सुझाने का निर्देश दिया। प्रस्तावित समिति कोर्ट के निर्देश और देखरेख में काम करेगी।

चीफ जस्टिस ने 29 दिसंबर, 2025 के अपने आदेश का जिक्र करते हुए दोहराया कि कोर्ट को सोच-समझकर फैसला लेने में मदद करने के लिए मुख्य सवालों के साथ एक विस्तृत नोट रिकॉर्ड पर रखा जाएगा। बेंच ने निर्देश दिया कि मामलों को चार हफ़्ते बाद लिस्ट किया जाए। इस बीच अंतरिम आदेश जारी रहेगा।

राजेंद्र सिंह ने हस्तक्षेप की मांगी अनुमति

शीर्ष कोर्ट में अरावली पहाड़ियों की परिभाषा और संरक्षण से जुड़ी उसकी चल रही स्वत: संज्ञान कार्यवाही में हस्तक्षेप की अनुमति मांगी गई है। न्यायालय ने इस अर्जी को स्वीकार कर लिया है। यह हस्तक्षेप वरिष्ठ पर्यावरण कार्यकर्ता के रूप में तथा तरुण भारत संघ के अध्यक्ष के नाते राजेंद्र सिंह ने पेश किया है। राजेंद्र सिंह का कोर्ट से यह निवेदन रहा है कि मेरे पूर्व अनुभवों को इस कार्यवाही में सहायक माना जाए। मैं पहले भी अरावली क्षेत्र में खनन से जुड़े मामलों में पक्षकार रहा हूं। यह हस्तक्षेप याचिका इस तथ्य पर बल देती है कि वर्तमान कार्यवाही किसी एकल विकास परियोजना तक सीमित नहीं है।

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