जबलपुर हाईकोर्ट में NHM अधिकारी विजय पांडे की अवैध नियुक्ति पर सुनवाई, संबंधित विभागों को नोटिस

जबलपुर हाईकोर्ट में विजय पांडे की अवैध नियुक्ति पर सुनवाई हो रही है। पांडे पर फर्जी दस्तावेज और भ्रष्टाचार के आरोप हैं। याचिका में उनकी नियुक्ति को गैरकानूनी बताया गया है। कोर्ट ने संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है।

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Neel Tiwari
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JABALPUR. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जबलपुर में NHM के डेटा मैनेजर आरआई विजय पांडे की अवैध नियुक्ति को लेकर सुनवाई ने नया मोड़ ले लिया है। 75 वर्षीय रिटायर्ड गजेटेड अधिकारी सुबाष चंद्रा द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है।

पांडे ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 2008 में NHM (नेशनल हेल्थ मिशन) में डेटा असिस्टेंट की नौकरी हासिल की। जबकि लिखित परीक्षा में वे न्यूनतम 30 अंकों की पात्रता से नीचे ही रहे। इसके बावजूद उन्हें पद मिला और बाद में 2014 में डेटा मैनेजर, 2022 में डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम मैनेजर की जिम्मेदारी दी गई। याचिका में उनकी नियुक्ति को पूरी तरह गैरकानूनी बताते हुए क्वो वारंटो के तहत पद पर अधिकार साबित करने को कहा गया।

कोर्ट ने जारी किया सभी विभागों को नोटिस 

सुनवाई जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की सिंगल बेंच में हुई, जहां कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है। NHM के डायरेक्टर, मध्य प्रदेश ओपन स्कूल एजुकेशन बोर्ड के डायरेक्टर और लोकायुक्त को जवाब देने का आदेश दिया गया है।

कोर्ट ने अगली सुनवाई 5 जनवरी 2026 के लिए निर्धारित की है, जिसमें विभागीय जवाबों के आधार पर मुकदमे की जांच पूरी होगी और सच्चाई सामने आएगी। 

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फर्जी मार्कशीट सहित लाखों के भ्रष्टाचार के आरोप

याचिका का केंद्र बिंदु विजय पांडे की शिक्षा प्रमाण पत्रों की सत्यता है। 25 अगस्त 2025 को एक गोपनीय सत्यापन पत्र में खुलासा हुआ कि पांडे की हायर सेकेंडरी मार्कशीट एमपी ओपन स्कूल बोर्ड द्वारा फर्जी पाई गई, जिसमें परीक्षा में वे फेल हैं। बाद में विभाग ने इस पत्र को जाली बता दिया था। हालांकि, याचिकाकर्ता का दावा है कि इस पत्र में हस्ताक्षरों से छेड़छाड़ और दस्तावेजों में भी  छेड़छाड़ की गई है। 

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विजय पांडे पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप

याचिका में विजय पांडे के ऊपर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के फंडों में करीब 35 लाख रुपए की हेराफेरी का दावा है। इसमें 2020 से 2022 के बीच ट्रेनिंग के लिए 15 लाख रुपए तथा पेट्रोल खर्च के नाम पर 20 लाख रुपए बिना किसी उचित दस्तावेज के खर्च किए गए।

आशा कार्यकर्ताओं ने उत्पीड़न और जातिगत टिप्पणी के खिलाफ गुहार लगाई है। पांडे के खिलाफ दो विभागीय जांचें हुईं। पर याचिका में आरोप है कि जांच रिपोर्ट पक्षपाती और सतही हैं। 

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विधानसभा में भी उठ चुका है सवाल

मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक ने प्रश्न उठाया कि किस आधार पर ग्रुप डी कर्मचारी विजय पांडे को जिला प्रोग्राम मैनेजर बनाया गया, जबकि उनकी लिखित परीक्षा में न्यूनतम अंक भी नहीं थे। उन्होंने पूछा कि क्या इस मामले में कोई निष्पक्ष जांच हुई।

हालांकि, इसके बाद विजय पांडे को प्रोग्राम मैनेजर से हटाकर वापस मूल पद डाटा मैनेजर पर प्रस्तुत किया गया था। याचिकाकर्ता  ने आरोप लगाए हैं कि उन्होंने लोकायुक्त सहित विभाग को शिकायतें भी दी। लेकिन विभागीय जांच में भी उन पर उचित कार्यवाही नहीं की गई और क्लीन चिट दे दी गई।

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NHM सहित लोकायुक्त विभाग देगा जवाब

कोर्ट ने संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है, जिससे उम्मीद है कि मामले की गहराई से जांच होगी। 5 जनवरी 2026 को सुनवाई में विभागों के जवाब आने के बाद इस केस का फैसला बड़े पैमाने पर सरकारी नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।

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