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Photograph: (THESOOTR)
UJJAIN. उज्जैन पुलिस ने एक नया डिजिटल ऐप तैयार किया है, जिसका उद्देश्य होटल में चेक-इन करने वाले यात्रियों का डेटा पुलिस तक रियल-टाइम में पहुंचाना है।
उज्जैन पुलिस ऐप से होटल संचालक हर दिन आने वाले यात्रियों की जानकारी भरेंगे, जो सीधे पुलिस थाने, थाना प्रभारी और एसपी के पास पहुंचेगी। उज्जैन में बढ़ते श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए यह ऐप सुरक्षा और निगरानी को बेहतर बनाने के लिए बनाया गया है। सिंहस्थ कुंभ के दौरान इस ऐप का विशेष उपयोग होगा।
उज्जैन में महाकाल मंदिर के आसपास के होटलों में रुकने वाले यात्रियों के डेटा को अब पुलिस के पास डिजिटल तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए एक ऐप तैयार किया गया है, जिसका नाम GuestReport.in है। इस ऐप से होटल संचालक रोजाना अपने होटल में रुकने वाले यात्रियों का नाम, पहचान, मोबाइल नंबर और अन्य जानकारी भरेंगे, जो तुरंत पुलिस को रियल-टाइम में पहुंच जाएगी।
संदिग्धों की पहचान में आसानी
पिछले समय में, जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन आते थे, तो उनके होटल में रुकने की जानकारी पुलिस तक पहुंचने में समय लगता था। यह प्रक्रिया एक से दो हफ्ते तक की थी, जिससे संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान और निगरानी में काफी समय लग जाता था। अब यह ऐप इन सभी प्रक्रियाओं को त्वरित और ऑनलाइन बना देगा।
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2028 उज्जैन सिंहस्थ में उपयोगी
उज्जैन सिंहस्थ कुंभ (Simhastha Kumbh) के दौरान हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। इस दौरान पुलिस को यात्रियों के बारे में जल्दी से जानकारी प्राप्त करना जरूरी है। इस ऐप के माध्यम से, पुलिस को यह जानकारी रियल-टाइम में मिलेगी। अनुमान है कि सिंहस्थ कुंभ के दौरान लगभग 30 करोड़ श्रद्धालु उज्जैन आएंगे। इस ऐप से पुलिस के पास इन श्रद्धालुओं की पूरी ट्रैकिंग और लोकेशन जानकारी होगी।
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होटल वालों के लिए फायदा
इस यात्रा निगरानी ऐप से न सिर्फ पुलिस को फायदा होगा, बल्कि होटल मालिकों को भी कई सुविधाएं मिलेंगी। पहले, उन्हें पुलिस थाने जाकर मैन्युअली अपनी डिटेल्स भरनी होती थी। अब यह काम ऐप के माध्यम से ऑनलाइन हो जाएगा, जिससे समय की बचत होगी और होटल संचालक बिना किसी झंझट के अपने काम को आगे बढ़ा सकेंगे।
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आश्रम-अखाड़े भी होंगे शामिल
इस ऐप की सफलता के बाद, पुलिस का इरादा इसे होटलों के अलावा आश्रमों और अखाड़ों तक भी फैलाने का है। इससे पूरे आयोजन की निगरानी और सुरक्षा को और बेहतर किया जा सकेगा। इन जगहों पर रुकने वाले श्रद्धालुओं का डेटा भी पुलिस तक जल्दी पहुंच सकेगा।
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डेटा सुरक्षा (Data Security)
इस ऐप के जरिए जो भी डेटा साझा किया जाएगा, वह पूरी तरह से पेपरलेस (Paperless) और सुरक्षित रहेगा। हर जानकारी डिजिटल रूप से रिकॉर्ड की जाएगी और पुलिस के पास पहुँचते ही संदिग्ध अलर्ट भी जनरेट हो जाएगा।
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