ग्रीन टैक्स के 2284 करोड़ पर सवाल: बसों का घाटा और सैलरी चुकाने में खर्च हुआ फंड
समझें क्या है पूरा मामला
- 2284 करोड़ के ग्रीन टैक्स पर NGT की सख्त टिप्पणी
- ग्रीन टैक्स के पैसे से चुकाई गई की सैलरी
- NGT बोला, फंड का इस्तेमाल शॉकिंग और हैरान करने वाला
- RTI से खुला राज, 2009 करोड़ के हिसाब पर सवाल
- ग्रीन टैक्स का अलग रिकॉर्ड ही नहीं, सामने आया सच
राजस्थान में वाहनों से प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर वसूले जा रहे ग्रीन टैक्स के इस्तेमाल पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रदेश में पिछले 10 वर्षों में परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग को ग्रीन टैक्स के रूप में ₹2,283.97 करोड़ मिले। लेकिन जॉइंट कमेटी की रिपोर्ट में सामने आया कि राजस्थान ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (RTIDF) की राशि बसों के संचालन और ऑपरेशनल लॉस की भरपाई के साथ ही जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (JCTSL) में कर्मचारियों की बकाया सैलरी और ठेकेदारों के बकाया भुगतान के लिए भी इस्तेमाल हुई।
NGT की सेंट्रल जोन बेंच ने इसे लेकर कड़ी टिप्पणी की है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा अपने ही 2012 के नोटिफिकेशन का उल्लंघन करते हुए इस तरह फंड का इस्तेमाल किया जाना “surprising and shocking” है। NGT ने राजस्थान परिवहन विभाग को RTIDF Rules, 2012 का सख्ती से पालन करने और राशि का इस्तेमाल वायु प्रदूषण नियंत्रण अथवा नियमों में अनुमत उद्देश्यों के लिए ही सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
जाजू बोले- नियमों की पालना नहीं होती
इस मामले में NGT जाने वाले पर्यावरणविद बाबू लाल जाजू ने द सूत्र से बातचीत में कहा, “जनता से परिवहन विभाग और RTO ग्रीन टैक्स वसूलते हैं। ग्रीन टैक्स ग्रीनरी बढ़ाने और पर्यावरण के लिए लिया जाता है, लेकिन इस पैसे को दूसरे कामों में खर्च कर दिया जाता है। इसके लिए जो नियम बने हुए हैं, उनकी पालना नहीं होती।”
बाबू लाल जाजू ने कहा कि JCTSL के ऑपरेशनल लॉस और कर्मचारियों की सैलरी जैसी मदों में भी फंड खर्च किया गया है।
उन्होंने NGT के आदेश का स्वागत करते हुए कहा, “माननीय न्यायालय ने परिवहन विभाग को जो निर्देश दिए हैं, हम उनका स्वागत करते हैं। अगर इन निर्देशों की पालना नहीं की गई तो हमें पुनः न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा।”
RTI से शुरू हुआ ₹2009 करोड़ का सवाल
NGT के आदेश के मुताबिक बाबू लाल जाजू की ओर से पेश किए गए पक्ष में बताया गया कि RTI से मिली जानकारी के अनुसार 2015-16 से 2024-25 के बीच राजस्थान सरकार ने ₹2,009.66 करोड़ ग्रीन टैक्स वसूला था। आरोप था कि इतनी बड़ी राशि मिलने के बावजूद इसका इस्तेमाल वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने में अपेक्षित तरीके से नहीं किया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान NGT ने एक जॉइंट कमेटी गठित कर तथ्यात्मक और कार्रवाई रिपोर्ट मांगी। इसी कमेटी की जांच में पिछले 10 वर्षों में परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग को ग्रीन टैक्स से मिली राशि का आंकड़ा ₹2,283.97 करोड़ सामने आया।
JCTSL तक पहुंचा पैसा, घाटा और बकाया चुकाया
जॉइंट कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए NGT ने अपने आदेश में दर्ज किया कि फंड नगर निगमों को बसों के संचालन और ऑपरेशनल लॉस की भरपाई के लिए आवंटित किया गया। इसी तरह JCTSL को भी फंड दिया गया।
JCTSL ने इसका इस्तेमाल ऑपरेशनल लॉस की प्रतिपूर्ति के साथ कर्मचारियों की बकाया सैलरी और ठेकेदारों के बकाया भुगतान में किया। जॉइंट कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि RTIDF के नोटिफिकेशन के मुताबिक इस तरह का खर्च प्रतिबंधित है। इसी आधार पर NGT ने राज्य सरकार के फंड इस्तेमाल पर सख्त टिप्पणी की।
ग्रीन टैक्स का अलग हिसाब ही नहीं
इस पूरे मामले में एक और बड़ा सवाल ग्रीन टैक्स की ट्रैकिंग का है। NGT के रिकॉर्ड में सामने आया कि ग्रीन टैक्स, वन टाइम टैक्स और संबंधित सरचार्ज RTIDF में एक साथ जमा होते हैं। RTIDF के भीतर ग्रीन टैक्स की राशि अलग से ट्रैक नहीं की जाती।
इसका मतलब यह है कि सरकार के पास ग्रीन टैक्स से आए प्रत्येक रुपए को अलग रखते हुए यह बताने की व्यवस्था नहीं है कि वह पैसा आखिर किस विशेष काम पर खर्च हुआ। NGT के रिकॉर्ड में यह भी कहा गया कि ऐसा कोई CAG या अकाउंटेंट जनरल रिकॉर्ड नहीं मिला जिसमें RTIDF के वास्तविक खर्च को उद्देश्य के आधार पर अलग-अलग दिखाया गया हो।
आखिर किसलिए लिया जाता है ग्रीन टैक्स?
राजस्थान मोटर व्हीकल टैक्सेशन एक्ट के तहत ग्रीन टैक्स लगाने का उद्देश्य वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के उपायों के लिए संसाधन जुटाना है। वहीं RTIDF का उद्देश्य सुरक्षित, व्यवस्थित, प्रदूषण मुक्त और सुगम परिवहन व्यवस्था विकसित करना है। यही कारण है कि ग्रीन टैक्स से मिली राशि के दूसरे मदों में इस्तेमाल को लेकर मामला NGT तक पहुंचा।
NGT ने परिवहन विभाग को दिए साफ निर्देश
NGT ने 3 सितंबर को दिए आदेश में राजस्थान परिवहन विभाग को निर्देश दिया है कि वह RTIDF Rules, 2012 का सख्ती से पालन करे और फंड का इस्तेमाल वायु प्रदूषण नियंत्रण तथा उन्हीं कार्यों पर हो जिनकी अनुमति नियम देते हैं।
इसके साथ जयपुर में वायु प्रदूषण कम करने के लिए GRAP सिस्टम जल्द विकसित करने, ज्यादा प्रदूषण वाले इलाकों की नियमित निगरानी, कच्ची सड़कों को पक्का करने, वैक्यूम स्वीपिंग मशीनों के इस्तेमाल, PUC सेंटर बढ़ाने और इलेक्ट्रिक-हाइब्रिड वाहनों तथा CNG-LPG जैसे स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
अब सवाल सिर्फ ₹2,283.97 करोड़ की वसूली का नहीं है, बल्कि इसकी जवाबदेही का भी है। जब वाहन मालिकों से पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर ग्रीन टैक्स लिया जा रहा है तो उसका कितना हिस्सा वास्तव में प्रदूषण कम करने पर खर्च हुआ और कितना दूसरे कामों में गया इसका स्पष्ट और अलग हिसाब सामने आना अभी बाकी है।
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