ईरान-इजरायल युद्ध से किसानों की बढ़ी चिंता, निर्यात पर पड़ रहा है असर

Ashish Bhardwaj | Mar 03, 2026, 14:31 IST
Photograph: (the sootr)
पश्चिमी एशिया में युद्ध के कारण राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र के बासमती चावल के निर्यात पर प्रभाव पड़ रहा है। चावल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की जा रही है। इससे किसानों और व्यापारियों में चिंता है।

News In Short



पश्चिमी एशिया में युद्ध के कारण राजस्थान के हाड़ौती में बासमती चावल का निर्यात ठप हो गया।



कोटा की भामाशाह मंडी में शिपमेंट रुकने से व्यापार प्रभावित हुआ।



बासमती चावल की कीमतों में 5,000 रुपए प्रति टन की गिरावट आई।



किसानों को अपनी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा, चिंता बढ़ी।



विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव कम न होने पर कीमतें और गिर सकती हैं।



News In Detail



पश्चिमी एशिया में जारी सैन्य तनाव और ईरान-इजरायल युद्ध का असर अब राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र तक पहुंच चुका है। हाड़ौती बासमती चावल के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। वहां के किसानों और व्यापारियों की रातों की नींद उड़ी हुई है। खाड़ी देशों, विशेष रूप से ईरान को होने वाले बासमती चावल के निर्यात में आई रुकावट ने स्थानीय बाजारों में हाहाकार मचाया है।



कोटा की भामाशाह मंडी पर असर



कोटा की भामाशाह अनाज मंडी एशिया की सबसे बड़ी मंडियों में शुमार है। इन दिनों वैश्विक युद्ध के प्रभावों से जूझ रही है। खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति बनने से शिपमेंट रुक गए हैं। निर्यातकों के अनुसार, बंदरगाहों तक पहुंचा माल वहां अटक गया है, जिससे व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है।



बासमती चावल की कीमतों में गिरावट



इस स्थिति का सीधा असर बासमती चावल की कीमतों पर पड़ा है। महज दो दिनों के भीतर बासमती चावल के दाम में 5,000 रुपए प्रति टन तक की गिरावट आई है। इस भारी गिरावट ने व्यापारियों और किसानों दोनों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।



बासमती चावल के निर्यात पर प्रभाव



हाड़ौती क्षेत्र का बासमती चावल अपनी खुशबू और स्वाद के लिए खाड़ी देशों में बेहद मशहूर है, और यहां के चावल का एक बड़ा हिस्सा निर्यात पर निर्भर है। वर्तमान में, युद्ध के चलते बैंकिंग चैनल्स और शिपिंग रूट्स प्रभावित हो गए हैं, जिससे पुराने पेमेंट अटक गए हैं। इस अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय खरीदार नए ऑर्डर देने से बच रहे हैं। निर्यातकों का मानना है कि अगर स्थिति लंबी खिंची, तो स्टॉक अटकने से कैश फ्लो रुक जाएगा, जिसका सीधा दबाव किसानों पर पड़ेगा।



किसानों की चिंत



मंडी में धान लेकर पहुंच रहे किसानों को अब अपनी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा है। हालांकि, अनुभवी व्यापारियों का कहना है कि ऐसे हालात पहले भी देखे गए हैं। यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान भी सप्लाई चेन टूटी थी, लेकिन धीरे-धीरे बाजार संभल गया था। व्यापारियों को उम्मीद है कि जैसे ही पश्चिम एशिया में शांति बहाल होगी, हाड़ौती का बासमती फिर से खाड़ी देशों की थाली की शोभा बढ़ाएगा।



क्या और गिरेंगे बासमती चावल के दाम?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और इजरायल के बीच तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में लॉजिस्टिक्स और इंश्योरेंस की लागत बढ़ने से बासमती चावल की कीमतें और भी सस्ती हो सकती हैं। फिलहाल, हाड़ौती का चावल कारोबार पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति के रहमों-करम पर है।



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