राजस्थान हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा- एडीजे को अपील प्रक्रिया नहीं आती
समझें क्या है पूरा मामला
- चेक बाउंस अपील मामले में राजस्थान हाई कोर्ट का सख्त रुख।
- ADJ स्तर के न्यायिक अधिकारी को ट्रेनिंग भेजने की सिफारिश।
- हाई कोर्ट ने अपीलीय अदालत के फैसले को से त्रुटिपूर्ण माना।
- फैसले की प्रति राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी को भेजने के निर्देश।
- NI Act के तहत चेक बाउंस की सुनवाई में गलतियों पर कोर्ट ने जताई नाराजगी।
राजस्थान हाई कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में निचली अदालत के रवैये पर सख्त टिप्पणी की है। जस्टिस अशोक कुमार जैन की एकलपीठ ने कहा कि हिंडौन सिटी के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एडीजे) क्रम 2 अपील निपटाने की प्रक्रिया से परिचित नहीं लगते।
उन्होंने बिना पंजीकृत किए अपीलें वापस कर दीं। हाई कोर्ट ने उन्हें राजस्थान न्यायिक अकादमी में ट्रेनिंग देने की सिफारिश की है। अदालत ने एडीजे के 13 जुलाई के आदेशों को रद्द कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता राधेश्याम शर्मा ने हाई कोर्ट में दो याचिकाएं दायर कीं। उनके अधिवक्ता अश्विनी चौबीसा ने बताया कि निचली अदालत ने चेक बाउंस के दो मामलों में 7 मई को सजा सुनाई और जुर्माना लगाया।
याचिकाकर्ता के वारंट भी जारी किए गए। याचिकाकर्ता ने इन फैसलों के खिलाफ एडीजे कोर्ट में अपील दायर की।
एडीजे ने क्या किया?
एडीजे कोर्ट ने अपील खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि अपीलार्थी अभियुक्त की अनुपस्थिति में अपील पोषणीय नहीं हैं। इस टिप्पणी के साथ उन्होंने मूल फाइल अपीलार्थी के वकील को लौटा दी। यानी उन्होंने अपील को पंजीकृत किए बिना ही वापस कर दिया।
याचिकाकर्ता का तर्क
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत अभियुक्त को अपील करने का अधिकार है। लेकिन एडीजे ने बिना अपील दर्ज किए फाइल वापस कर दी। यह कानून के विरुद्ध है। उन्होंने एडीजे के इस आदेश को चुनौती दी।
हाई कोर्ट का फैसला
हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता की दलीलों को सही माना। अदालत ने एडीजे के 13 जुलाई के आदेशों को रद्द कर दिया। याचिकाकर्ता के वकील को चार सप्ताह में एडीजे कोर्ट में अपील पेश करने को कहा गया है।
साथ ही, हाई कोर्ट ने एडीजे को ट्रेनिंग देने की सिफारिश की और आदेश की कॉपी हाई कोर्ट प्रशासन को भेजी है।
क्यों है अहम?
यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह निचली अदालतों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है। एक सत्र न्यायाधीश का अपील की प्रक्रिया से अनजान होना गंभीर मामला है।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि न्यायाधीशों को अपनी जिम्मेदारियों की सही समझ होनी चाहिए। न्यायिक प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी बल दिया गया है।
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