हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बहू की सैलरी से सास को मिलेगा 25 प्रतिशत, अनुकंपा से मिली थी नौकरी

Ashish Bhardwaj | Sept 23, 2026, 12:36 IST
अनुकंपा नियुक्ति
राजस्थान हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति पाने वाली बहू को अपनी सैलरी का 25 प्रतिशत हिस्सा सास के खाते में जमा कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इसे कल्याणकारी उपाय बताया, विशेषाधिकार नहीं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, बहू की सैलरी से सास को मिलेगा हिस्सा।
  • अनुकंपा नौकरी पाने वाली बहू की 25% सैलरी सास के खाते में जाएगी।
  • पति की मौत के बाद मिली नौकरी पर कोर्ट ने तय की जिम्मेदारी।
  • AVVNL को वेतन कटौती कर सास के खाते में राशि जमा करने के निर्देश।
  • टर्मिनल बेनिफिट्स भी सास-बहू में बराबर बांटने का आदेश।

Jaipur: पति की मौत के बाद अनुकंपा नियुक्ति पाने वाली पत्नी यानी बहू की सैलरी से 25 प्रतिशत राशि अब सास के बैंक खाते में जमा की जाएगी। राजस्थान हाई कोर्ट की जयपुर पीठ में जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड यानी एवीवीएनएल (AVVNL) को सास-ससुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।



क्या था पूरा मामला

साल 2018 में सास-ससुर ने यह याचिका दायर की थी। हालांकि सुनवाई के दौरान ही ससुर की मृत्यु हो गई। याचिका में बताया गया था कि उनका बेटा अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में टेक्निकल हेल्पर के पद पर कार्यरत था। मार्च 2017 में उसकी मौत हो गई थी। बेटे की मौत के बाद सास-ससुर का अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी एनओसी (NOC) मिलने पर बहू को अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। नौकरी के समय बहू ने परिवार के अन्य सदस्यों की देखभाल और भरण-पोषण का शपथ पत्र भी दिया था। लेकिन नौकरी मिलने के कुछ समय बाद ही बहू ने ससुराल छोड़ दिया और दूसरी शादी कर ली, साथ ही सास-ससुर को सहारा देना भी बंद कर दिया।



अनुकंपा नियुक्ति विशेषाधिकार नहीं, कल्याणकारी उपाय

एडवोकेट रमित पारीक के मुताबिक कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई व्यक्तिगत अधिकार या विशेषाधिकार नहीं है, बल्कि यह एक कल्याणकारी उपाय है। कोर्ट ने माना कि परिवार का भरण-पोषण करने का शपथ पत्र ही इस नियुक्ति का मुख्य आधार था। इस योजना का लाभ उठाने के बाद उस जिम्मेदारी से पीछे हट जाना, अनुकंपा नियुक्ति योजना की मूल भावना और आत्मा का उल्लंघन माना गया है।



बहू का पक्ष, अन्य बेटे भी कर सकते हैं भरण-पोषण

बहू की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि उन्होंने दुर्व्यवहार के कारण अपना ससुराल छोड़ा था। उनके मुताबिक ससुर की मृत्यु हो चुकी है और सास का भरण-पोषण उनके अन्य दो बेटे भी कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें सैलरी का हिस्सा याचिकाकर्ता के साथ साझा करने और मृत पति के टर्मिनल बेनिफिट्स में हिस्सा देने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। बहू की ओर से यह भी दलील दी गई कि उन्हें जो वेतन मिल रहा है, वह उनके पति की सेवा के बदले मिली अनुकंपा नियुक्ति से प्राप्त रोजगार का नतीजा है, इसलिए इसे उनके व्यक्तिगत वेतन के तौर पर देखा जाना चाहिए।



कोर्ट का आदेश, 25% सैलरी और बराबर टर्मिनल बेनिफिट्स

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने एवीवीएनएल को निर्देश दिया कि वह बहू के मासिक वेतन में से 25 प्रतिशत की कटौती करे और यह राशि सीधे सास के बैंक खाते में जमा कराए। यह व्यवस्था सास के जीवित रहने तक जारी रहेगी। इसके साथ ही कोर्ट ने आदेश दिया कि दिवंगत कर्मचारी के सभी टर्मिनल यानी रिटायरमेंट लाभ 30 दिनों के भीतर जारी किए जाएं और इन्हें भी सास और बहू के बीच बराबर-बराबर बांटा जाए।



यह खबरें भी पढ़ें...



कोचिंग इंस्टिट्यूट हटाने की पैरवी करने वाले एडवोकेट आर डी रस्तोगी को जान से मारने की धमकी



गोपालपुरा में जाम से व्यापारी बेहाल, JDA से कोचिंग संस्थानों को शिफ्ट करने की मांग



जयपुर अग्निकांड: मानव अधिकार आयोग सख्त, कलेक्टर-कमिश्नर से 13 बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट



Rajasthan Top News: निकायों में BJP का दबदबा, जयपुर अग्निकांड पर 13 सवाल



Tags:
  • राजस्थान हाई कोर्ट
  • अनुकंपा नियुक्ति
  • भरण-पोषण
  • अजमेर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड