राजस्थान हाई कोर्ट सख्त: 12 साल पुराने आदेश की पालना नहीं, पंचायती राज सचिव को बुलाया
समझें क्या है पूरा मामला
- 12 साल से आदेश की पालना नहीं, हाई कोर्ट सख्त।
- पंचायती राज सचिव को हाजिर होने का आदेश।
- पूर्व ग्राम सेवक की वरिष्ठता का मामला।
- दो सप्ताह में पालना रिपोर्ट पेश करने को कहा।
- जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकलपीठ ने दिया आदेश।
राजस्थान हाई कोर्ट ने एक अहम मामले में सख्त रुख अपनाया है। 12 साल पहले दिए गए आदेश की पालना नहीं हुई है। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने राज्य सरकार को दो सप्ताह में पालना रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
अदालत ने साफ कहा है कि अगर इस दौरान आदेश की पालना नहीं होती है तो पंचायती राज सचिव को हाजिर होकर जवाब देना पड़ेगा। यह आदेश जस्टिस अनुरूप सिंघी की एकलपीठ ने दिया है। पीठ ने यह फैसला अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सुनाया।
क्या है पूरा मामला?
अवमानना याचिका में वकील ने बताया कि प्रार्थी पहले ग्राम सेवक पद पर कार्यरत था। उसकी पहली नियुक्ति और ज्वाइनिंग तिथि 9 जनवरी 1997 थी। लेकिन विभाग ने वरिष्ठता सूची में उसकी ज्वाइनिंग 1 सितंबर 1997 कर दी।
इस गलती का बड़ा असर हुआ। प्रार्थी से जूनियर ग्राम सेवक सीनियर हो गए। इसी आधार पर उन्हें पदोन्नति भी दी गई। इससे प्रार्थी को नुकसान उठाना पड़ा। उसने 2013 में इस फैसले को चुनौती दी।
अधिकरण ने सुनाया था फैसला
याचिकाकर्ता ने 2013 में सिविल सेवा अपीलीय अधिकरण में अपील की। अधिकरण ने उसकी अपील मंजूर कर ली। अधिकरण ने 8 मार्च 2014 को आदेश जारी किया। इसमें विभाग को याचिकाकर्ता की वरिष्ठता संशोधित करने को कहा गया। साथ ही पदोन्नति आदेश जारी करने का निर्देश दिया गया।
लेकिन आदेश की पालना नहीं हुई। इस पर अधिकरण ने इसे अवमानना माना। अधिकरण ने 2023 में मामला हाई कोर्ट को रेफर कर दिया। इस बीच राज्य सरकार ने उसकी सीनियरिटी तो निर्धारित कर दी। लेकिन पदोन्नति नहीं दी गई।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में कहा कि उससे जूनियर कई कर्मचारी पदोन्नत हो गए। वे विकास अधिकारी बन गए। लेकिन उसे 12 साल से पदोन्नति नहीं मिल पाई। उसने कोर्ट से आदेश का पालन कराने की मांग की। कोर्ट ने इस मांग को सही माना।
कोर्ट का सख्त रुख
कोर्ट ने सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया। एकलपीठ ने दो सप्ताह में आदेश की पालना न होने पर पंचायती राज सचिव को हाजिर होने को कहा है। यह आदेश सरकार के लिए बड़ी चेतावनी है।
अब सरकार को दो सप्ताह में जवाब देना है। उसे पालना रिपोर्ट पेश करनी है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पंचायती राज सचिव को कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा।
अवमानना का मतलब
अवमानना का मतलब है कोर्ट के आदेश की अनदेखी। जब कोई विभाग या अधिकारी आदेश नहीं मानता तो यह गंभीर माना जाता है। कोर्ट ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई करती है। इस मामले में भी कोर्ट ने यही रुख दिखाया है।
12 साल का इंतजार
याचिकाकर्ता 12 साल से इंतजार कर रहा है। अधिकरण का आदेश 2014 में आया था। लेकिन पालना नहीं हुई। अब कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लिया है। इससे उम्मीद जगी है कि जल्द न्याय मिलेगा।
यह मामला कर्मचारियों के लिए बड़ा संदेश है। कोर्ट के आदेश की पालना जरूरी है। विभागीय लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। अगर आदेश नहीं माना गया तो अधिकारियों को कोर्ट में हाजिर होना पड़ेगा।
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