टाइगर हैबिटेट में NHAI रेस्ट हाउस पर HC की रोक, किसानों की जमीन अवाप्ति रद्द

Mukesh Sharma | Aug 21, 2026, 19:48 IST
सरिस्का टाइगर हैबिटेट में NHAI रेस्ट हाउस पर HC की रोक
राजस्थान हाई कोर्ट ने सरिस्का टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट के 1 किमी दायरे में NHAI रेस्ट हाउस निर्माण हेतु 19 किसानों की कृषि भूमि अधिग्रहण आदेश को रद्द कर दिया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • सरिस्का टाइगर रिजर्व के 1 किमी दायरे में NHAI के लिए किसानों की जमीन अवाप्ति रद्द ।
  • वैकल्पिक जमीन और वन विभाग की चेतावनियों को नजरअंदाज कर प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण को बढ़ावा।
  • अवाप्ति अधिकारी ने नहीं किया अपने विवेक का इस्तेमल।
  • फ्यूल स्टेशन जैसी सुविधा हों तो भी पब्लिक यूटिलिटी कहकर पर्यावरण नियमों से नहीं मिल सकती छूट।

राजस्थान हाई कोर्ट ने अलवर जिले के गांव धूअरमाला में एनएचआई के प्रस्तावित रेस्ट हाउस के लिए किसानों की जमीन अवाप्ति को रद्द कर दिया है।



कोर्ट ने कहा कि यह प्रस्तावित रेस्ट हाउस सरिस्का टाइगर रिजर्व के क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट के एक किलोमीटर अंदर आता है। अधिकारियों ने वैकल्पिक जमीन होने के बाद भी उस पर विचार नहीं किया।



अदालत ने कहा है कि यह स्वीकार्य नहीं है कि अधिकारी पहले तो प्रस्तावित जमीन को प्रतिबंधित क्षेत्र में मानें,फिर वैकल्पिक स्थान तलाशें और बाद में बिना किसी ठोस कारण प्रतिबंधित क्षेत्र की उसी जमीन को चुन लें।



कोर्ट ने कहा कि वन विभाग भी अपने पत्र में साफ कर चुका था कि एक किलोमीटर वाला प्रतिबंध लागू है। इसके बावजूद हाईवे अथॉरिटी ने काम को आगे बढ़ाया। जस्टिस आनंद शर्मा की अदालत ने यह आदेश बुद्दालाल व अन्य किसानों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।



19 किसानों की जमीन का किया था अधिग्रहण

याचिकाकर्ताओं के एडवोकेट अक्षय शर्मा ने कोर्ट को बताया कि अक्टूबर 2024 में प्रशासन ने धूअरमाला गांव के 19 किसानों की कृषि भूमि को एनएच-28ए के शाहपुरा-अलवर सेक्शन के विस्तार के लिए अवा​प्त किया। इस जमीन पर रेस्ट हाउस बनाना प्रस्तावित था। जिसका किसान विरोध कर रहे थे।



किसानों का कहना था कि यह जमीन क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट के एक किलोमीटर के भीतर है। सरकार के 2015 के आदेश से इस क्षेत्र में कॉर्मिशियल,औद्योगिक एक्टिविटीज और लैंड कंवर्जन पर पूरी तरह से रोक है।



अवाप्ति अधिकारी ने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया

उन्होने बताया कि पहले 31 जनवरी 2025 को भू-अवाप्ति अधिकारी ने खुद यह माना था कि प्रस्तावित रेस्ट हाउस की जमीन क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट के एक किलोमीटर के भीतर है। इसलिए रेस्ट हाउस को दूसरी जगह शिफ्ट करना उचित होगा।



इसके बाद फरवरी-मार्च में वैकल्पिक जमीन तलाशने की प्रक्रिया भी शुरू हुई। इसके बाद कलक्टर के निर्देश पर वैकल्पिक जगहों का निरीक्षण हुआ और समिति ने गांव बांदरोले में जमीन को अधिक उपयुक्त माना।



लेकिन बाद में 6 अक्टूबर 2025 को भू-अअवाप्ति अधिकारी ने किसानों की आपत्तियों को खारिज कर दिया। इस पर कोर्ट ने 6 अक्टूबर के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि लगता है कि भू-अअवाप्ति अधिकारी ने आपत्तियां खारिज करते हुए अपने विवेक का इस्तेमाल नहीं किया।



पब्लिक यूटिलिटी कहने से प्रतिबंध खत्म नहीं हो जाते

एनएचआई की ओर से कहा गया कि यह कोई कॉर्मिशियल प्रोजेक्ट नहीं है। हम हाईवे यूजर्स के लिए पब्लिक यूटिलिटी फैसेलिटी डलवप कर रहे हैं। इस पर अदालत ने कहा कि इस रेस्ट हाउस में फ्यूल स्टेशन और कियोस्क भी शामिल हैं जिनका स्वरूप कॉमर्शियल हैं। केवल किसी परियोजना को पब्लिक यूटिलिटी कह देने से उस पर लागू पर्यावरणीय और वन संबंधी कानून खत्म नहीं हो जाते है।



कोर्ट ने 29 अक्टूबर 2024 के अवाप्ति अधिसूचना को धूअरमाला की जमीन रेस्ट हाउस के लिए अवाप्त करने की सीमा तक रद्ध कर दिया है।



ये भी पढ़ें:-

सरिस्का क्षेत्र में उमड़े हजारों किसान, महापंचायत हुई



बदलेगा सरिस्का टाइगर रिजर्व का नक्शा, बनेगा बाघों का नया कॉरिडोर



सरिस्का पैलेस होटल पर वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, एफआईआर दर्ज



कंबोडिया और कजाक में बाघ लौटाएगा भारत, सरिस्का मॉडल बनेगा ग्लोबल सक्सेस स्टोरी



Tags:
  • राजस्थान हाई कोर्ट
  • हाई कोर्ट
  • वन विभाग
  • सरिस्का टाइगर रिजर्व
  • क्रिटिकल टाइगर हैबिटेट