कलेक्टर के आदेश का पालन नहीं, HC ने टोल आय से पेड़ लगाने का दिया निर्देश
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान हाई कोर्ट का पर्यावरण और जनहित में बड़ा फैसला।
- हाई कोर्ट ने अवैध टोल वसूली की से पेड़ लगाने का दिया आदेश।
- ब्यावर टोल प्लाजा की वसूली का पैसा अब लगेगा पेड़ लगाने पर।
- HC ने कहा- पेड़ लगाना बड़ा जनहित, इसीलिए होगा हरियाली का काम।
राजस्थान हाई कोर्ट ने एक अहम आदेश में कहा है कि पेड़ लगाना बड़ा जनहित है। कोर्ट ने ब्यावर-मसूदा-गोयला स्टेट हाईवे पर स्थित एक टोल प्लाजा से अब तक वसूली गई राशि का उपयोग पेड़ लगाने में करने का आदेश दिया।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह टोल प्लाजा अवैध है, क्योंकि यह नगर सीमा से पांच किलोमीटर दूर नहीं है। जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि पेड़ दशकों तक शहर और समुदाय को लाभ पहुंचाते हैं।
क्या है याचिकाकर्ताओं की मांग?
दो याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने ब्यावर जिला कलेक्टर के 27 फरवरी 2026 के आदेश को लागू करने की मांग की थी। इस आदेश में कहा गया था कि टोल प्लाजा को नगर सीमा से पांच किलोमीटर दूर स्थानांतरित किया जाए।
याचिकाकर्ताओं ने नियमों का उल्लेख किया। राजस्थान स्टेट हाईवे शुल्क (दर निर्धारण एवं वसूली) नियम, 2015 के नियम 8 के अनुसार किसी भी नगर पालिका की सीमा से दो किलोमीटर के भीतर टोल प्लाजा नहीं हो सकता। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह टोल प्लाजा नियमों का उल्लंघन है।
कलेक्टर का आदेश क्यों नहीं लागू हुआ?
हाई कोर्ट के पहले के निर्देश पर जिला कलेक्टर ने टोल प्लाजा हटाने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस आदेश को कभी चुनौती नहीं दी गई, इसलिए यह अंतिम रूप से प्रभावी है। लेकिन इसे अब तक लागू नहीं किया गया है।
याचिकाकर्ताओं ने 21 मई 2026 को प्रोजेक्ट डायरेक्टर को आदेश लागू कराने के लिए आवेदन भी दिया था।
हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
अदालत ने प्रोजेक्ट डायरेक्टर को तीन महीने के भीतर याचिकाकर्ताओं के आवेदन पर निर्णय लेने को कहा। अदालत ने स्पष्ट किया कि अगर निर्णय नहीं लिया गया तो अवमानना अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई हो सकती है।
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि टोल प्लाजा से वसूली गई राशि का पूरा विवरण सुरक्षित रखा जाए और प्रोजेक्ट डायरेक्टर को दिया जाए।
टोल राशि से कैसे लगेंगे पेड़?
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि टोल प्लाजा द्वारा एकत्रित राशि का विवरण प्रोजेक्ट डायरेक्टर के समक्ष पेश किया जाए। प्रोजेक्ट डायरेक्टर यह तय करेंगे कि इस राशि का उपयोग सार्वजनिक स्थानों पर छायादार पेड़ लगाने के लिए किया जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि लगाए गए पेड़ों की फोटो और संबंधित व्यक्ति का शपथ-पत्र अदालत में प्रस्तुत किया जाए।
क्यों है यह आदेश अहम?
जस्टिस अनूप कुमार ढंड ने पेड़ों को दशकों या सदियों तक जीवित रहने वाला बताया। उन्होंने कहा कि पेड़ शहर और आसपास के समुदाय को नि:स्वार्थ रूप से लाभ पहुंचाते हैं। भविष्य की पीढ़ियों को स्वच्छ हवा मिलेगी।
इसलिए यह आदेश व्यापक जनहित और सार्वजनिक भलाई के लिए दिया गया है। यह पहली बार है जब अवैध टोल वसूली की राशि को पर्यावरण संरक्षण के लिए इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है।
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