बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हाई कोर्ट का कड़ा रुख, जानिए आदेश की प्रमुख बातें
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान के स्कूलों और 50 मीटर के दायरे में जंक फूड पर लगा बैन।
- आदेश के बाद कैंटीन में बंद होंगे हाई फैट, शुगर और सॉल्ट (HFSS) उत्पाद।
- 4 हफ्ते में बनानी होगी स्कूल खाद्य सुरक्षा और पोषण समिति।
- हर महीने निरीक्षण करेंगे अफसर, 8 हफ्ते में कैंटीन पर लगेगा न्यूट्रिशन बोर्ड।
- कलेक्टर्स को स्कूलों का औचक निरीक्षण कर 8 हफ्ते में देनी होगी रिपोर्ट।
राजस्थान हाई कोर्ट ने बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और बेहतर भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जस्टिस अनूप कुमार ढंडकी पीठ ने राज्य की सभी स्कूलों की कैंटीन और स्कूल परिसर के 50 मीटर के दायरे में जंक फूड (HFSS - हाई फैट, शुगर और सॉल्ट) की बिक्री पर सख्त रोक लगा दी है।
अदालत ने बच्चों में बढ़ते मोटापे, जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों और बढ़ते मोबाइल स्क्रीन टाइम पर गहरा दुख व्यक्त किया। कोर्ट ने कहा कि साल 2020 में सुरक्षित और संतुलित भोजन को लेकर बनाए गए नियमों पर 6 साल बीतने के बाद भी प्रभावी अमल नहीं हुआ है, इसलिए अब इनका सख्ती से पालन कराना अनिवार्य है।
4 सप्ताह में बनेगी समिति, कैंटीन में लगेगा न्यूट्रिशन बोर्ड
हाई कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि राज्य के सभी स्कूलों को आगामी 4 सप्ताह के भीतर स्कूल खाद्य सुरक्षा और पोषण समिति का गठन करना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा, 8 सप्ताह के भीतर स्कूल कैंटीन में उपलब्ध सभी खाद्य पदार्थों की कैलोरी, सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी वाला स्पष्ट मेन्यू बोर्ड लगाना होगा। मिड-डे मील सहित अन्य सरकारी पोषण योजनाओं में भी संतुलित आहार के तय मानकों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
अफसरों को हर महीने करना होगा निरीक्षण
नियमों को कागजों से धरातल पर उतारने के लिए जिलाधिकारियों (कलेक्टर्स) और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों (BEO) को जिम्मेदारी दी गई है।
अधिकारियों को हर महीने निरीक्षण कर इन नियमों की पालना सुनिश्चित करनी होगी। सभी जिला कलेक्टर्स को ग्रामीण सरकारी स्कूलों का औचक निरीक्षण कर 8 सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने को कहा गया है।
तकनीक के उपयोग के साथ बुनियादी शिक्षा पर जोर
हाई कोर्ट ने शिक्षा प्रणाली में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को उपयोगी माना, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि तकनीक बच्चों की मौलिक सीखने की क्षमता का विकल्प नहीं बन सकती।
कोर्ट ने हाथ से लिखने, किताबें पढ़ने, नोट्स बनाने और लिखित परीक्षा जैसी बुनियादी गतिविधियों को हर हाल में बनाए रखने पर जोर दिया। इसके अतिरिक्त, ग्रामीण स्कूलों में रिक्त पदों को भरने, इंटरनेट, शौचालय, पेयजल और खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
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