मनमाने तबादले पर चली हाई कोर्ट की कैंची, पूर्व MLA के बेटे का तबादला आदेश रद्द

Jageshwar prasad | Jul 29, 2026, 12:41 IST
पूर्व विधायक के बेटे का एक दिन में दो बार तबादला, HC ने किया निरस्त
राजस्थान हाई कोर्ट ने जेवीवीएनएल के सहायक अभियंता के एक ही दिन में दो बार किए गए तबादले की सुनवाई की। कोर्ट ने दूसरे तबादले को दुर्भावनापूर्ण मानते हुए रद्द कर दिया।

समझें क्या है पूरा मामला

  • पूर्व विधायक कमल बैरवा के बेटे का 1 दिन में 2 बार तबादला।
  • AEN विक्रम सिंह लोदी को पहले टोंक, फिर पीड़ावा भेजा।
  • दूसरे तबादले को दुर्भावनापूर्ण बताते हुए कोर्ट ने किया रद्द।
  • याचिकाकर्ता ने 11 जुलाई को ही कार्यभार ग्रहण किया था।
  • जस्टिस गणेशराम मीणा ने कहा- टोंक में ही रहेंगे।

राजस्थान हाई कोर्ट ने जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JVVNL) में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत विक्रम सिंह लोदी के स्थानांतरण विवाद में महत्वपूर्ण फैसला दिया है।



निवाई से पूर्व कांग्रेस विधायक कमल बैरवा के बेटे विक्रम सिंह लोदी के एक ही दिन में दो अलग-अलग तबादला आदेश जारी किए गए थे।



अदालत ने निगम की इस कार्रवाई पर असंतोष जताते हुए दूसरे तबादला आदेश को निरस्त कर दिया है। विक्रम सिंह को टोंक में ही वर्तमान पद पर बनाए रखने का आदेश दिया है।



10 जुलाई को जारी हुए दो विरोधाभासी आदेश

मामले के अनुसार, जेवीवीएनएल प्रशासन ने 10 जुलाई को एक आदेश जारी किया था। जिसमें एईएन विक्रम सिंह लोदी का तबादला देवली से टोंक किया था। आदेश का पालन करते हुए उन्होंने 11 जुलाई को टोंक में अपना पदभार (जॉइनिंग) भी संभाल लिया।



हालांकि, इसी बीच निगम ने 10 जुलाई की ही तारीख का एक और संशोधित आदेश जारी कर दिया। जिसके तहत उनका तबादला टोंक से झालावाड़ जिले के पीड़ावा में कर दिया गया। इस मनमाने और विरोधाभासी आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।



कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें

जस्टिस गणेशराम मीणा की एकलपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता लक्ष्मीकांत शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने तर्क दिया कि टोंक में कार्यभार ग्रहण करने के तुरंत बाद दूसरा आदेश जारी करना दुर्भावनापूर्ण मंशा को दर्शाता है।



इसके अलावा, टोंक में याचिकाकर्ता के स्थान पर किसी अन्य अधिकारी की नियुक्ति भी नहीं की गई थी। जिससे इस प्रशासनिक बदलाव की मंशा पर सवाल उठते हैं।



दूसरी ओर, जेवीवीएनएल की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता वर्ष 2010 से टोंक जिले में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे हैं। प्रशासनिक आवश्यकताओं को देखते हुए ही उनका तबादला पीड़ावा किया गया था।



हाईकोर्ट का फैसला और राहत

दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की एकलपीठ ने जेवीवीएनएल के रुख को खारिज करते हुए दूसरे स्थानांतरण आदेश को निरस्त कर दिया। अदालत के इस आदेश के बाद अब एईएन विक्रम सिंह लोदी टोंक में ही अपने पद पर सेवाएं देते रहेंगे।



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