आईपीएस पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ को माना अवमानना का दोषी, अगले महीने तय होगी सजा

Mukesh Sharma | Mar 24, 2026, 23:21 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने आईपीएस पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ को अवमानना का दोषी माना है। हाईकोर्ट अब 6 अप्रैल को सजा का निर्धारण करेगा। व्हाट्सएप पर नोटिस भेजकर की थी गिरफ्तारी

News In Short

  • राजस्थान में आईपीएस पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ को माना अवमानना का दोषी
  • हाई कोर्ट अब अगले महीने 6 अप्रेल को तय करेगा सजा
  • सजा के लिए आईपीएस को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश
  • व्हाट्सएप पर नोटिस भेजकर की थी गिरफ्तारी
  • सुनवाई में हाई कोर्ट ने आईपीएस राठौड़ को पाया अवमानना का दोषी

News In Detail

राजस्थान हाई कोर्ट ने व्हाट्सएप पर नोटिस भेजकर आरोपी को गिरफ्तार करने के मामले में आईपीएस अधिकारी और एसीबी के तत्कालीन अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ को अवमानना का दोषी माना हैं। जस्टिस प्रवीर भटनागर की अदालत ने उन्हें 6 अप्रैल को सजा के बिंदू पर सुनवाई के दौरान कोर्ट में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने यह आदेश रवि मीणा की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।



ऐसी कार्रवाई पर कोर्ट की नाराजगी

अदालत ने पुलिस की इस तरह की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए व्हाट्सएप पर नोटिस भेजने के बाद आरोपी को गिरफ्तार करने की कार्रवाई को अवैध ठहराया है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केवल व्हाट्सएप के जरिए भेजा नोटिस कानूनी तौर पर सीआरपीसी की धारा 41-ए के तहत वैध नहीं है। वहीं ऐसे नोटिस के आधार पर की गई गिरफ्तारी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हनन है।



नोटिस की व्यक्तिगत तामील हो

अदालत ने कहा कि नोटिस की तामील कानून में निर्धारित प्रक्रिया यानी व्यक्तिगत तामील, चस्पा और स्पीड पोस्ट आदि से ही होनी चाहिए। यदि आरोपी नोटिस का पालन करता है, तो उसे बिना ठोस कारण गिरफ्तार नहीं करना चाहिए।



पुलिस की कार्रवाई अदालत की अवमानना

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता मोहित खंडेलवाल ने बताया कि आरएसएलडीसी में हुए घूसकांड से जुडे मामले में एसीबी ने याचिकाकर्ता को एक फरवरी, 2023 को गिरफ्तार किया था। इससे पहले एसीबी के जांच अधिकारी ने 25 जनवरी, 2023 को उसे व्हाट्सएप के जरिए नोटिस भेजा और 31 जनवरी को पेश होने के लिए कहा। इस पर उसने एसीबी के नोटिस का जवाब देते हुए अपनी पत्नी की बीमारी के कारण समय मांगा था, लेकिन पुलिस ने बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए ही उसे सीधे ही गिरफ्तार कर लिया। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि यह कार्रवाई सीआरपीसी की धारा 41 ए की अवहेलना है और मामले में कानूनी प्रक्रिया का अनुसरण नहीं किया है। ऐसे में एसीबी की कार्रवाई कानून और अदालत की अवमानना हैं।



एसीबी ने कहा-दवाब बनाने के लिए याचिका

इसके जवाब में एसीबी की ओर से कहा गया कि उन्होंने आरोपी को नोटिस दिया था, लेकिन उसने जवाब में टालमटोल रवैया रखा। इसके अलावा याचिकाकर्ता एफआईआर को रद्द करवाने के लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जा चुके हैं और असफल रहे हैं। इसके बाद ही अनुसंधान एजेंसी पर दबाव बनाने के लिए उसने यह अवमानना याचिका दायर की है। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनकर एसीबी की गिरफ्तारी की कार्रवाई को गलत मानते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को तलब किया है।



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